4 साल पुरानी नन की लाश को सलामत देख हैरान हुए लोग, एक्सपर्ट बोले- ये चमत्कार नहीं कुछ और है
मिसौरी में रहने वाली एक नन की बॉडी चार साल बाद निकली गई। इस नन की बॉडी पर कोई लेप नहीं लगाया गया था। इसके बाद भी जब चार साल बाद उसे बाहर निकाला गया तो वो बिलकुल खराब नहीं हुई थी।

अमेरिका के मिसौरी शहर में चार साल पहले दफनाई जा चुकी एक महिला का शव बिल्कुल सही सलामत पाए जाने का मामला सामने आया है। वह महिला कथैलिक नन थी। ऐसे में इसे आस्था से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं और दूर-दूर से हजारों लोग नन का शव देखने के लिए पहुंच रहे हैं। नन के शव को 18 मई को क्रब से एक परंपरा के निर्वहन के लिए बाहर निकाला गया था। इस दौरान सब ये देख आश्चर्य में पड़ गए कि शव में कोई भी सड़न का निशान नहीं था।
शव को कई वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए उस पर लेप लगाने का चलन बहुत पुराना है। लेकिन इस शव में किसी भी प्रकार का कोई लेपन नहीं पाया गया है।
लंबे वक्त तक कब्र में शव के रहने की वजह से शरीर का कुछ हिस्सा खराब जरूर हो गया था। बेनेडिक्टिन सिस्टर्स के कॉन्वेंट की प्रमुख मदर सेसिलिया ने कहा कि नन का नाम सिस्टर विल्हेल्मिना है।
न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, नन के अवशेषों को एक लकड़ी के ताबूत से खोदकर निकाला गया था, जिसे एक नए चर्च में रखा जाना था। ननों ने इस घटना को निजी रखने की कोशिश की, लेकिन इस मामले से संबंधित एक आंतरिक ईमेल ऑनलाइन लीक हो गया।
सिस्टर विल्हेल्मिना के पैर बिलकुल वैसे हैं जैसे चार साल पहले थे। चेहरे के आइब्रो, नाक, हिन्थ, बाल सब ठीक थे। सेसिलिया ने कहा कि उन्हें लगता है कि वह पहली अफ्रीकी महिला हैं जिनका शरीर पूरी तरह से सही पाया गया है।
सेसिलिया ने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि उन्हें वहां हड्डियां मिलेंगी, लेकिन हमें नन का पूरा शरीर ही सही सलामत मिला है। सेसिलिया मानती हैं कि इस घटना के पीछे ईश्वर का संदेश छिपा है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हमारे विश्वास को जगाने के लिए ऐसा किया है।
इस चमत्कार के बाद सिस्टर विल्हेल्मिना के शव को लोगों के दर्शन के लिए चर्च में ही रख दिया गया है। उनके शव को देखने के लिए रोज हजारों लोग इकठ्ठा हो रहे हैं।
पुलिस ने छोटे शहर में यात्रियों की भीड़ से निपटने के लिए एक मोबाइल कमांड सेंटर बनाया है। चैपल के पास स्थानीय प्रशासन ने पार्किंग की जगह बनाने के लिए जमीन साफ कर दी है।
अब विशेषज्ञ इस बात का पता लगाने में जुट गए हैं कि ये चमत्कार आखिर कैसे हुआ? इस बीच, उत्तरी कैरोलिना में पश्चिमी कैरोलिना विश्वविद्यालय में मानव विज्ञान प्रशिक्षक रेबेका जॉर्ज ने कहा है कि मरने के बाद शरीर के गलन में कमी की घटना बहुत दुर्लभ नहीं है।
जॉर्ज ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बिना रसायन लेपन वाले शरीर भी कई वर्षों तक संरक्षित रह सकते हैं। जॉर्ज ने कहा कि कई बार ताबूत और कपड़े भी शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
जॉर्ज ने कहा कि आमतौर पर जब हम लोगों को दफनाते हैं, तो हम उन्हें बाहर नहीं निकालते हैं। हम उन्हें फिर से देखने का मौका ही नहीं मिल पाता है। इस बार संयोग से ऐसा हुआ है जब हमें ऐसा शव देखने को मिला है। यह अनोखा है मगर इसमें कोई चमत्कार नहीं है।












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