27 की उम्र में सांसद, अब बालेन सरकार में कानून मंत्री, कौन हैं सोबिता गौतम, क्यों हुईं वायरल?
Sobita Gautam Nepal Minister: : नेपाल की राजनीति अब पुरानी फाइलों और पुराने चेहरों के बोझ से आजाद होकर एक नई करवट ले रही है। काठमांडू के मेयर से सीधे देश की सत्ता के शिखर तक पहुँचने वाले 35 वर्षीय बालेन शाह ने अपनी कैबिनेट में 'अनुभव की उम्र' के बजाय 'जोश के विजन' को चुना है। इस युवा कैबिनेट में सबसे चमकता सितारा बनकर उभरी हैं सोबिता गौतम।
महज 27 साल की उम्र में सांसद बनकर सुर्खियां बटोरने वाली सोबिता, अब 30 वर्ष की आयु में देश की कानून, न्याय तथा संसदीय कार्य मंत्री की कमान संभाल रही हैं। पेशे से वकील और पूर्व टेलीविजन एंकर सोबिता का चितवन से दोबारा जीतना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि नेपाल के युवाओं का व्यवस्था परिवर्तन की ओर बढ़ता एक बड़ा कदम है। टीवी स्क्रीन से लेकर संसद की दहलीज तक का उनका यह सफर, अब हिमालयी देश की कानूनी दिशा बदलने के नए अध्याय में तब्दील हो चुका है।

27 साल में जीता पहला चुनाव, रचे कई कीर्तिमान
नेपाल की राजनीति में जहां उम्र को अनुभव की कसौटी माना जाता था, वहां सोबिता गौतम ने महज़ 27 साल की उम्र में एक ऐसी लकीर खींच दी जिसे पार करना दिग्गजों के लिए भी मुश्किल हो गया। तीन साल पहले जब उन्होंने काठमांडू निर्वाचन क्षेत्र संख्या-2 से चुनावी मैदान में कदम रखा, तो कईयों ने इसे 'महज़ एक युवा लहर' माना। लेकिन नतीजों ने साबित किया कि यह लहर नहीं, बल्कि बदलाव की सुनामी थी।
प्रतिनिधि सभा की सबसे कम उम्र की प्रत्यक्ष निर्वाचित सदस्य बनकर उन्होंने दशकों पुराने राजनीतिक किलों को ध्वस्त कर दिया। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की इस प्रखर चेहरा ने टीवी स्टूडियो की बहसों से निकलकर जब संसद की दहलीज पर कदम रखा, तो नेपाल के युवाओं को अपना एक 'पॉलिटिकल आइकन' मिल गया।
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चितवन से दोबारा जीत और 30 की उम्र में मंत्री
अपनी लोकप्रियता और काम के दम पर सोबिता ने इस साल हुए चुनावों में चितवन सीट से दोबारा जीत दर्ज की है। 30 साल की उम्र में दूसरी बार सांसद बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी पहली जीत कोई इत्तेफाक नहीं थी। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने उनकी कानूनी विशेषज्ञता और प्रशासनिक समझ को देखते हुए उन्हें कानून, न्याय तथा संसदीय कार्य मंत्रालय जैसा भारी-भरकम विभाग सौंपा है। इतनी कम उम्र में कैबिनेट मंत्री बनना उनकी राजनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है।
Balen Shah New PM Nepal: Gen-G आंदोलन का प्रमुख चेहरा
नेपाल में हुए हालिया 'जेन-जी' आंदोलन के दौरान सोबिता गौतम एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं। इस आंदोलन ने देश की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दी और व्यवस्था परिवर्तन की मांग की। सोबिता ने सड़कों से लेकर संसद तक युवाओं की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किया। आंदोलन के बाद उपजे राजनीतिक माहौल में उनकी सक्रियता ने उन्हें बालेन शाह की टीम का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया, जिससे उन्हें सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिली।
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Sobita Gautam Nepal Law Minister: टीवी एंकरिंग से कानून की बारीकियों तक
राजनीति में आने से पहले सोबिता नेपाल का एक जाना-पहचाना चेहरा थीं। उन्होंने चार साल तक नेपाल टेलीविजन पर 'स्वास्थ्य सरोकार' कार्यक्रम की एंकरिंग की, जहां उन्होंने जनहित के मुद्दों को उठाना सीखा। पेशे से वह एक अधिवक्ता (वकील) हैं और अंतर्राष्ट्रीय कानून में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। एक मीडिया पर्सन के रूप में जनता से जुड़ाव और एक वकील के रूप में कानून की गहरी समझ ने उन्हें कानून मंत्री के पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बनाया है।
न्यायपालिका में बड़े बदलावों की उम्मीद
कानून मंत्री के रूप में सोबिता के कंधों पर नेपाल की न्यायपालिका को सुधारने का ऐतिहासिक जिम्मा है। लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में जजों की खाली नियुक्तियां और न्यायिक भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या रहे हैं। सोबिता ने हमेशा से जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता और अदालती प्रक्रिया को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करने की वकालत की है। अब सत्ता में रहते हुए उनके पास उन समितियों की रिपोर्टों को लागू करने का मौका है, जो वर्षों से फाइलों में धूल फांक रही थीं।












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