Love Story: Nehru-Edwina में गजब इश्क, फ्लाइट से भेजे खत, एडविना की मौत पर नेवी के जहाज से दी थी श्रद्धांजलि
Nehru Edwina Love Story: जब भी कभी भारतीय नेताओं के प्रेम प्रसंग की बात होगी तो उसमें देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और आजादी के पहले भारत के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन के ओपन सीक्रेट रिश्ते की बात जरूर होगी। ये चर्चा इतनी ज्यादा दिलचस्प है कि साल 2021 तक इन दोनों के रिश्ते से जुड़े कई लैटर जारी होते रहे। इसके बावजूद, अभी भी कई पत्रों का बाहर आना बाकी है।
माउंटबेटन की पत्नी कैसे बनीं नेहरू की प्रेमिका
एडविना माउंटबेटन की भूमिका सिर्फ वायसराय की पत्नी तक सीमित नहीं थी। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ उनका रिश्ता धीरे-धीरे गहरा होता गया। इस रिश्ते को लेकर इतिहासकारों, लेखकों और आम लोगों के बीच लंबे समय से बहस होती रही है। लेकिन ये सच है कि दोनों एक दूसरे को खत लिखकर दिल्ली-लंदन की फ्लाइट्स के जरिए भेजा करते थे।

एडविना के मौत के बाद मिला खतों का भंडार
नेहरू और एडविना का रिश्ता आपसी सम्मान और साझा सोच पर टिका हुआ था। आमतौर पर शांत और आरक्षित रहने वाली एडविना, नेहरू के साथ सहज महसूस करती थीं। वहीं नेहरू उनकी बुद्धिमत्ता, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की तारीफ करते थे। दोनों के बीच लंबे समय तक पत्रों का आदान-प्रदान होता रहा। ये पत्र नेहरू ने एडविना की 1960 में मृत्यु तक लिखे। रिपोर्टों के अनुसार, एडविना के निधन के बाद उनके पास नेहरू के पत्रों का एक पूरा बंडल पाया गया था।
लोग नहीं समझेंगे ये प्रेम- एडविना की बेटी
एडविना माउंटबेटन की बेटी पामेला माउंटबेटन ने अपनी मां और नेहरू के रिश्ते की गहराई की पुष्टि की है। अपनी किताब 'डॉटर ऑफ एंपायर' (2012) में उन्होंने इस रिश्ते को एक तरह का प्रेम बताया, हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह शारीरिक नहीं था। पामेला के मुताबिक, उनका रिश्ता बेहद गहरा था और बाहर के लोगों के लिए उसे पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं था।
'हैप्पी थ्रीसम'
एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि लॉर्ड माउंटबेटन ने इस रिश्ते को लेकर कभी नाराज़गी नहीं जताई। पामेला माउंटबेटन ने इस पूरे समीकरण को "हैप्पी थ्रीसम" यानी "खुशहाल तिकड़ी" के रूप में बताया है। इससे पता चलता है कि इस रिश्ते को परिवार के भीतर भी एक अलग नज़रिए से देखा जाता था।
लंदन पहुंचे नेहरू
एक बार जवाहर लाल नेहरू लंदन पहुंचे थे। जिसको लेकर अगले दिन के अखबार में रिपोर्ट छपीं। कहा गया कि एडविना माउंटबेटन ने उन्हें नाइट गाउन में रिसीव किया। इसके अलावा ये भी छापा गया कि नेहरू, एडविना से मिलने पहुंचे जब लॉर्ड माउंटबेटन लंदन में नहीं थे।
बाहर आईं डायरियां, खुले राज
22 जुलाई 2021 को ब्रॉडबैंड आर्काइव से लॉर्ड और लेडी माउंटबेटन की निजी डायरियां और पत्र डिजिटल फॉर्म में जारी किए गए। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया, जब इसके ठीक चार दिन पहले 22 ब्रिटिश सांसदों ने हाउस ऑफ कॉमन्स में एक 'अर्ली डे मोशन' पेश किया था। इस प्रस्ताव में सरकार से मांग की गई थी कि इन ऐतिहासिक दस्तावेज़ों को तुरंत सार्वजनिक किया जाए।
इन दस्तावेज़ों से क्या-क्या सामने आ सकता है?
जारी किए गए दस्तावेज़ों से कई अहम और संवेदनशील पहलुओं पर रोशनी पड़ने की उम्मीद है। इनमें एडविना माउंटबेटन और जवाहरलाल नेहरू के रिश्ते, ब्रिटिश शाही परिवार से जुड़े निजी विचार, भारत के विभाजन को लेकर निष्पक्षता पर सवाल, और माउंटबेटन के नेहरू, महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में निजी विचार शामिल हैं। हालांकि, अभी तक केवल 1960 तक के दस्तावेज़ ही जारी किए गए हैं, जबकि 1947-48 की डायरियां और पत्र अब भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
नेहरू और एडविना माउंटबेटन का रिश्ता: एक खुला रहस्य
लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच का रिश्ता लंबे समय तक एक 'ओपन सीक्रेट' यानी सबको पता होने वाला रहस्य माना जाता रहा। पंडित जी और एडविना माउंटबेटन एक दूसरे से बेहद प्रेम करते थे। हालांकि नेहरू और एडविना दोनों पहले से शादीशुदा थे और दोनों के जीवनसाथी भी उस समय तक जीवित भी थे और रिश्ते में भी थे। डेली मेल में छपे एक लेख के मुताबिक, एडविना को नेहरू से प्यार हो गया था और इस रिश्ते का असर उनके बच्चों पर भी पड़ा।
बेटी पामेला ने रिश्ते को कैसे बताया?
लेडी माउंटबेटन की बेटी पामेला हिक्स के मुताबिक, "उन्हें पंडितजी में वो साथीपन, आत्मा की गहराई और बौद्धिक समानता मिली, जिसकी उन्हें तलाश थी। दोनों ने एक-दूसरे के अकेलेपन को समझा और उसे दूर किया।"
नेटफ्लिक्स की 'द क्राउन' में भी दिखाया गया यह रिश्ता
नेहरू और एडविना माउंटबेटन के रिश्ते को मशहूर नेटफ्लिक्स सीरीज़ 'द क्राउन' में भी दिखाया गया है। लॉर्ड माउंटबेटन ब्रिटेन के प्रिंस फिलिप के चाचा थे, और इस सीरीज़ में उनका और नेहरू का कई बार ज़िक्र आता है।
एडविना की अंतिम इच्छा और नेहरू की श्रद्धांजलि
एडविना माउंटबेटन की इच्छा के मुताबिक, लॉर्ड माउंटबेटन ने उन्हें समुद्र में दफ़नाया। 1960 में उनकी मृत्यु के बाद, जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल उनके सम्मान में एस्कॉर्ट के रूप में भेजा और उनकी याद में माल्यार्पण भी किया।
समुद्र में बिखरे गेंदे के फूल और एक भावुक पल
लेडी माउंटबेटन की बेटी पामेला हिक्स ने बताया कि जब शोकाकुल परिवार अपने माल्यार्पण के बाद वहां से चला गया, तब आईएनएस त्रिशूल चुपचाप उनकी जगह आ गया। पामेला के मुताबिक, "पंडितजी के निर्देशों पर, समुद्र की लहरों पर गेंदे के फूल बिखेरे गए।" यह पंडितजी की तरफ से उनकी एडविना के लिए एक भावुक श्रद्धांजलि थी।
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