'नाजीवाद चुप रहने से जन्म लेता है', 80 साल पुरानी त्रासदी जिसपर यूक्रेन के राष्ट्रपति ने यहूदियों से की अपील
कीव, 2 मार्च: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूसी आक्रमण के खिलाफ अबतक जिस तरह की नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है, वह सराहनीय है। दुनिया में किसी को भी अनुमान नहीं था कि नाटो और अमेरिका सही वक्त पर उनका साथ नहीं देंगे। लेकिन,फिर भी जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सेना को यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जा करने में जरूरत से ज्यादा देर हो रही है तो बौखलाहट में नागरिक इलाकों पर भी गोलाबारी हो रही है और मिसाइलें भी गिराई जा रही हैं। इसकी वजह से आम नागरिकों की मौतों की संख्या भी बढ़ी है। इसी कड़ी में रूसी सेना ने एक ऐसे स्मारक स्थल को निशाना बना दिया है, जो हिटलर के नाजी शासन की क्रूरता को याद दिलाने के लिए बना हुआ है। उसी का हवाला देकर यूक्रेन के राष्ट्रपति ने दुनिया भर के यहूदियों से एक अपील की है।

रूसी आक्रमण पर दुनिया की चुप्पी पर सवाल
यूक्रेन एक तरफ तो रूसी हमलों का डटकर मुकाबला करने में लगा हुआ है, दूसरी तरफ उसके राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की दुनिया को जगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने रूसी हमले की द्वितीय विश्व युद्ध से तुलना करते हुए दुनिया की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को राजधानी कीव के मुख्य टेलीविजन टॉवर पर रूसी हमले और बेबिन यार स्थित यहूदियों के नरंसाहर की याद में बने मुख्य स्मारक समेत बाकी जगहों को निशाना बनाए जाने के बाद उन्होंने ट्विटर के जरिए विशेष रूप से दुनियाभर के यहूदियों को चुप्पी तोड़ने की अपील की है। रूसी हमले में पांच लोग मारे गए थे।

'80 साल तक 'नेवर अगेन' कहने का क्या मतलब है'
जेलेंस्की ने अपने ट्विटर पोस्ट में लिखा है, 'दुनिया के लिए: 80 साल तक 'नेवर अगेन (फिर कभी नहीं)' कहने का क्या मतलब है, जब उसी बेबिन यार स्थल पर बम गिरता है और दुनिया चुप रहती है? कम से कम 5 मारे गए हैं। इतिहास दोहराया जा रहा है।' न्यूज एजेंसी एएफबी के मुताबिक टीवी टॉवर पर हुए हमले की वजह से कुछ प्रसारणों पर असर पड़ा, लेकिन ढांचा मोटे तौर पर बचा रह गया। रूस के खिलाफ डटकर खड़े रहने के अपने हौसले की वजह से यूक्रेन के राष्ट्रपति की काफी सराहना हो रही है।
'नेवर अगेन' नारे का क्या है इतिहास ?
'नेवर अगेन' नाजी जर्मनी में यहूदियों के नरसंहार से जुड़ा एक नारा है। यह नारा इससे जुड़े स्मारकों पर भी देखा जाता है, जैसे कि दचाऊ कंसंट्रेशन कैंप में भी। बाद में यह दो शब्द दुनियाभर में आतंकी वारदातों और नरसंहारों की निंदा करने और संवेदना जताने के लिए भी इस्तेमाल किए जाने लगा। दरअसल, इसका इस्तेमाल कर यूक्रेन के राष्ट्रपति ने दुनिया के ताकतवर देशों को एक तरह से आईना दिखाया है, जो हमेशा कहते रहे हैं कि नाजी जर्मनी की दहशत की स्थिति फिर कभी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, लेकिन जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो सबने एक तरह से चुप्पी साध ली।

'नाजीवाद चुप रहने से जन्म लेता है'
वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि रूस यूक्रेन का अस्तित्व और इसका इतिहास मिटाना चाहता है और यहूदियों का आह्वान किया है कि वह इस आक्रमण पर चुप होकर ना बैठें। उन्होंने कहा, 'अब मैं दुनिया भर के सभी यहूदियों से कह रहा हूं। क्या आप नहीं देख पा रहे कि क्या हो रहा है? इसलिए यह बहुत जरूरी है कि दुनिया भर के लाखों यहूदी इस समय चुप न रहें।' वो बोले- 'नाजीवाद चुप रहने से जन्म लेता है। इसलिए सिविलियन के कत्लेआम के खिलाफ जोर की आवाज उठाइए। यूक्रेन के लोगों की हत्याओं पर आवाज उठाइए।'

क्या है बेबिन यार का इतिहास ?
कीव जिले में स्थित बेबिन यार में नाजियों के जमाने में यहूदियों के नरसंहार से जुड़ा स्मारक केंद्र बना हुआ। 1941 के सितंबर में बेबिन यार में 33,000 से ज्यादा यहूदियों का नरसंहार हुआ था। यह नाजी शासन के दौरान हुए सबसे बड़े कत्लेआम की घटनाओं में से एक था। बाद के वर्षों में यह घाटी सोवियत यूनियन के दौरान युद्ध बंदियों और यूक्रेन के राष्ट्रवादियों के नरसंहार का गवाह बना। रूस ने मंगलवार को बेबिन यार होलोकॉस्ट मेमोरियल सेंटर पर ही हमला किया है।












Click it and Unblock the Notifications