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Dubai Airport Attack: लड़ाई अमेरिका-इजराइल से, लेकिन दुबई के पीछे क्यों पड़ा ईरान? ये हैं 5 बड़े कारण

Dubai Airport Attack: मध्य पूर्व के रेगिस्तान में चमकता 'दुबई' आज केवल अपनी लग्जरी के लिए नहीं, बल्कि युद्ध की तपिश के कारण चर्चा में है। हाल ही में दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हुए ड्रोन हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। सुरक्षा के लिहाज से सबसे मजबूत माने जाने वाले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर हो रहे ये हमले एक बड़े खतरे का संकेत हैं।

देखते ही देखते, यह आलीशान देश ईरान और इजराइल की दुश्मनी के बीच एक 'सॉफ्ट टारगेट' बन गया है। इस युद्ध में यूएई अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि संघर्ष का मुख्य केंद्र यानी 'एपीसेंटर' बन चुका है। आखिर क्यों ईरान की सुइयां दुबई पर ही आकर टिकी हैं और इस पूरे खेल में इजराइल का एंगल क्या है?

Dubai Airport Attack

Iran UAE conflict: इजराइल से बढ़ती 'पक्की दोस्ती' का नतीजा

ईरान की सबसे बड़ी चिढ़ यूएई और इजराइल के बीच हुए 'अब्राहम अकॉर्ड' (शांति समझौता) से है। इस समझौते के बाद दोनों देशों ने व्यापार और रक्षा के क्षेत्र में हाथ मिला लिया है। ईरान को डर है कि इजराइल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' यूएई की धरती का इस्तेमाल उसके खिलाफ जासूसी के लिए कर सकती है। इसलिए, ईरान दुबई पर हमले करके यूएई को इजराइल से दूर रहने की चेतावनी दे रहा है।

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दुबई की 'सुरक्षित इमेज' को बड़ा झटका

दुबई की पूरी अर्थव्यवस्था उसकी सुरक्षा और पर्यटन पर टिकी है। दुनिया भर के निवेशक इसे सबसे सुरक्षित निवेश केंद्र मानते हैं। ईरान जानता है कि अगर वह दुबई एयरपोर्ट या मशहूर पर्यटन स्थलों को निशाना बनाता है, तो विदेशी कंपनियों और पर्यटकों का भरोसा टूट जाएगा। शहर की इस 'सॉफ्ट इमेज' को चोट पहुँचाकर ईरान असल में यूएई की आर्थिक कमर तोड़ना चाहता है।

'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बिना तेल का विकल्प

दुनिया का 20% तेल 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के संकरे रास्ते से गुजरता है, जिस पर ईरान का बड़ा प्रभाव है। यूएई ने इसका तोड़ निकालते हुए 'फुजैरा पोर्ट' का इस्तेमाल शुरू किया है, जो इस खतरे वाले रास्ते से दूर स्थित है। यह पोर्ट संकट के समय दुनिया के लिए तेल की 'लाइफलाइन' बन गया है। यूएई का यह कदम ईरान की उस ताकत को चुनौती देता है जिससे वह दुनिया को ब्लैकमेल करता था।

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यूएई की खास पाइपलाइन: ईरान का सिरदर्द

यूएई ने एक मास्टरप्लान के तहत 'हब्शान-फुजैरा' पाइपलाइन बनाई है। इसके जरिए रोजाना 15 लाख बैरल तेल सीधे फुजैरा पोर्ट तक पहुँचता है, जिससे जहाजों को ईरान के प्रभाव वाले समुद्री रास्ते में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। ईरान लगातार इन तेल ठिकानों और पाइपलाइनों को ड्रोन से निशाना बना रहा है ताकि यूएई का तेल निर्यात ठप हो सके और वह फिर से ईरान पर निर्भर हो जाए।

Iran America War: अमेरिका को दबाने के लिए 'प्रॉक्सि वॉर'

यूएई में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने और हजारों सैनिक तैनात हैं। ईरान जब दुबई को निशाना बनाता है, तो वह सीधे तौर पर अमेरिका को संदेश देता है कि उसके सहयोगी देश सुरक्षित नहीं हैं। यह एक तरह की 'फॉरवर्ड डिफेंस' नीति है, जिसमें ईरान युद्ध को अपनी सीमा से दूर रखकर दूसरों के घर में लड़ना चाहता है। इस पूरी लड़ाई में दुबई एक 'रणनीतिक मोहरा' बनकर रह गया है।

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