Mali Terrorist Attack: आतंकी हमले से दलहा माली! हवाई अड्डे पर अंधाधुंध फायरिंग, कांप उठे लोग
Mali Terrorist Attack: अफ्रीकी देश माली एक बार फिर भीषण आतंकी हमलों की चपेट में है। शनिवार सुबह राजधानी बमाको के मोदिबो कीता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सैन्य ठिकानों के पास भारी गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह हमला इतना सुनियोजित था कि राजधानी के साथ-साथ किदाल और गाओ जैसे पूर्वोत्तर शहरों को भी एक साथ निशाना बनाया गया।
स्थानीय प्रशासन को अंदेशा है कि इन हमलों के पीछे अल-कायदा या इस्लामिक स्टेट जैसे खूंखार समूहों का हाथ हो सकता है। फिलहाल सेना स्थिति को नियंत्रण में करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लोगों में भारी दहशत का माहौल है।

एयरपोर्ट और सैन्य बेस पर बड़ा हमला
हमलावरों ने बमाको के मुख्य एयरपोर्ट और उसके पास स्थित वायुसेना के एयर बेस को निशाना बनाया। चश्मदीदों के मुताबिक, शनिवार तड़के ऑटोमैटिक राइफलों और भारी हथियारों से फायरिंग शुरू हो गई। एयरपोर्ट शहर के केंद्र से महज 15 किलोमीटर दूर है, जिसके चलते पूरे इलाके में तनाव फैल गया। आसमान में सेना के हेलीकॉप्टर गश्त कर रहे हैं और सैनिकों ने मोर्चा संभाल लिया है। धमाके इतने तेज थे कि आसपास के घरों की खिड़कियां तक हिल गईं।
कई शहरों में एक साथ 'कोऑर्डिनेटेड' स्ट्राइक
यह हमला सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रहा। उत्तर-पूर्वी शहर किदाल और गाओ में भी आतंकियों ने धावा बोला। पूर्व मेयर और स्थानीय निवासियों ने बताया कि बंदूकधारी शहर के अंदर घुस गए और कई इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश की। किदाल में अलगाववादी गुटों और सेना के बीच आमने-सामने की जंग छिड़ गई है। जानकारों का कहना है कि एक ही समय पर कई जगहों पर हमला करना आतंकियों की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
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सेना और आतंकी समूहों के बीच संघर्ष
माली की सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि कुछ 'अज्ञात आतंकी समूहों' ने सैन्य बैरकों और खास ठिकानों को निशाना बनाया है। सेना फिलहाल जवाबी कार्रवाई कर रही है। माली पिछले काफी समय से दो मोर्चों पर लड़ रहा है। एक तरफ अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े कट्टरपंथी गुट हैं, और दूसरी तरफ उत्तर में सक्रिय अलगाववादी विद्रोही। इस दोहरी चुनौती ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।
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बिगड़ते सुरक्षा हालात और आम जनता का डर
माली ही नहीं, बल्कि उसके पड़ोसी देश नाइजर और बुर्किना फासो में भी सुरक्षा स्थिति बदतर होती जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, इन क्षेत्रों में हिंसा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। आतंकी अब केवल सेना को ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी निशाना बना रहे हैं। शहरों में रहने वाले लोग अपने घरों में कैद हैं और भविष्य को लेकर डरे हुए हैं। बार-बार होने वाले इन हमलों ने सरकार की सुरक्षा नीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।












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