डोंबिवली के पिंपलेश्वर महादेव मंदिर की क्‍या है खासियत? 20 साल की लड़ाई के बाद मिली जीत, होगा भव्य शिवोत्सव

Pimpaleshwar Mahadev Temple Dombivli: महाराष्‍ट्र के डोंबिवली के प्रसिद्ध पिंपलेश्वर महादेव मंदिर इन दिनों सुर्खियों में है। क्‍योंकि इस मंदिर से जुड़ा करीब दो दशक पुराना भूमि विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। महाराष्‍ट्र की महायुति सरकार की ओर से मंदिर को 4 एकड़ 25 गुंठा जमीन देवस्थान के अधिकार में देने के फैसले के बाद पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल है। श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक इस निर्णय को आस्था और संघर्ष की जीत मान रहे हैं।

डोंबिवली स्थित पिंपलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ा प्रकरण सिर्फ एक धार्मिक स्थल की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और सामूहिक शक्ति का सशक्त उदाहरण है। हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने लगभग दो दशकों तक संघर्ष किया, जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने मंदिर के लिए 4 एकड़ 25 गुंठा भूमि अंततः मंजूर कर दी।

Pimpaleshwar Mahadev Temple

संकल्प पूर्ति पूजन के साथ हुआ आभार व्यक्त

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक रविंद्र चव्हाण ने सोमवार तड़के अपनी पत्नी के साथ मंदिर में संकल्प पूर्ति पूजन किया। उन्होंने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह कदम हजारों शिवभक्तों की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है।

दो दशक का संघर्ष, आखिरकार मिली जीत

राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंदिर की 4 एकड़ से अधिक भूमि को आधिकारिक रूप से मंदिर ट्रस्ट के नाम करने का निर्णय लिया गया, जिससे भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला है। रविंद्र चव्हाण ने बताया कि यह मुद्दा करीब 20 साल से लंबित था। ग्राम सभाओं, प्रशासनिक बैठकों और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए लगातार प्रयास किए जाते रहे। 2012 में डोंबिवली बंद जैसे आंदोलन भी हुए, जिसके बाद अब जाकर यह मामला सुलझ पाया है।

8 जून को होगा भव्य शिवोत्सव

इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में 8 जून 2026 को मंदिर परिसर में भव्य शिवोत्सव और कृतज्ञता समारोह का आयोजन किया जाएगा। इसमें भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक प्रार्थना जैसे कार्यक्रम होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्राताई पवार, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे और उद्योग मंत्री उदय सामंत सहित कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

श्री पिंपलेश्वर महादेव मंदिर की क्‍या है खासियत?

डोंबिवली (पूर्व) के नांदिवली-सागाव क्षेत्र में स्थित श्री पिंपलेश्वर महादेव मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और गहरी धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है। लगभग 125 वर्ष पुराने इस जागृत देवस्थान की स्थापना स्वामी शिवानंद नामक एक तपस्वी ने एक पीपल के पेड़ के नीचे की थी, जिससे इसकी आध्यात्मिक परंपरा और भी विशेष मानी जाती है।

यह मंदिर कल्याण-शिळ रोड के पास लगभग सात एकड़ के शांत और हरियाली से भरे परिसर में स्थित है, जो इसे एक प्राकृतिक तीर्थ स्थल का स्वरूप देता है। इसकी महिमा को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इसे 'क' दर्जा तीर्थक्षेत्र का स्थान भी प्रदान किया है।

यहां हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूरा परिसर भक्ति और उत्सव के माहौल से भर जाता है।

शिवभक्तों की आस्था की जीत

चव्हाण ने कहा कि पिंपलेश्वर महादेव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। भूमि विवाद खत्म होने से अब मंदिर में सुविधाओं के विकास का रास्ता भी साफ हो गया है। उन्होंने सभी शिवभक्तों और नागरिकों से 8 जून के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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