Iran US peace Talks: शांति वार्ता में शामिल होगा ईरान, इस्लामाबाद पहुंच रहा है ईरानी डेलिगेशन
Iran US peace Talks: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए कोशिश जारी है। पहले ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने से स्पष्ट इंकार कर दिया था, जिससे कूटनीतिक गलियारों में मायूसी छा गई थी।
हालांकि, अब घटनाक्रम ने करवट ली है और ताज़ा खबरों के मुताबिक ईरान इस बातचीत के लिए तैयार हो गया है। ईरानी विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह यू-टर्न न केवल वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि मध्य-पूर्व में तनाव कम करने की एक आखिरी उम्मीद भी जगाता है।

Abbas Araghchi Pakistan visit: ईरान का पहले इनकार और अब हां
शुरुआत में ईरान ने इस्लामाबाद की इस बैठक में आने से साफ मना कर दिया था। ईरान का मानना था कि अभी बातचीत के लिए सही माहौल नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और पाकिस्तान के समझाने के बाद ईरान ने अपना फैसला बदल लिया है। अब ईरानी नेतृत्व का इस्लामाबाद आना यह दिखाता है कि वे कूटनीति को एक और मौका देना चाहते हैं। यह बदलाव साबित करता है कि बंद कमरों में हुई बातचीत रंग लाई है और शांति की उम्मीद अभी बाकी है।
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पाकिस्तान की मध्यस्थता का असर
पाकिस्तान इस पूरे मामले में पड़ोसी की भूमिका निभा रहा है। जब ईरान और अमेरिका के बीच दूरियां बढ़ीं, तब पाकिस्तान ने दोनों को एक मेज पर लाने की कोशिश की। पाकिस्तानी नेताओं ने लगातार फोन पर ईरानी अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा। इसी का नतीजा है कि ईरान अब बातचीत के लिए तैयार हुआ है। पाकिस्तान चाहता है कि उसके पड़ोसी देशों में शांति रहे ताकि पूरे क्षेत्र का व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो सके।
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दूसरे दौर की वार्ता की अहमियत
शांति वार्ता का यह दूसरा दौर बहुत खास है क्योंकि पहले दौर में कई मुद्दे अनसुलझे रह गए थे। इस बार कोशिश यह होगी कि अमेरिका और ईरान के बीच जमी बर्फ पिघले। अगर यह बैठक सफल रहती है, तो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील मिल सकती है और तेल के बाजार में भी स्थिरता आएगी। दुनिया भर की नजरें इस बात पर हैं कि क्या इस बार दोनों पक्ष पुरानी कड़वाहट भूलकर किसी ठोस समझौते पर पहुंच पाएंगे।
दुनिया भर में इस मीटिंग की चर्चा
जैसे ही यह खबर आई कि ईरान अब इस्लामाबाद जाएगा, वैश्विक बाजारों और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। अमेरिका भी इस दौरे को बहुत ध्यान से देख रहा है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर ईरान शांति का हाथ बढ़ाता है, तो मध्य-पूर्व में चल रहे कई विवाद खत्म हो सकते हैं। यह मीटिंग केवल दो देशों की नहीं है, बल्कि इससे पूरी दुनिया की सुरक्षा जुड़ी है। अब सबकी नजरें शुक्रवार और शनिवार को होने वाली इस बड़ी हलचल पर टिकी हैं।












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