LPG Crisis: खत्म होगा रसोई गैस का संकट? होर्मुज से सुरक्षित निकला भारत का दो और जहाज, कब तक पहुंचेगा
LPG Crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। दो और भारतीय एलपीजी टैंकर इस खतरनाक समुद्री रास्ते को पार कर सुरक्षित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, जिससे दुनिया भर में ईंधन का संकट पैदा हो गया है।
इन जहाजों के भारत पहुंचने से देश में रसोई गैस (LPG) की किल्लत दूर होने की उम्मीद है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगवाता है।

Strait of Hormuz crisis 2026: सुरक्षित निकले दो नए जहाज
भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर, बीडब्ल्यू टीवाईआर (BW TYR) और बीडब्ल्यू ईएलएम (BW ELM), युद्ध प्रभावित क्षेत्र से सफलतापूर्वक बाहर निकल चुके हैं। इन जहाजों पर लगभग 94,000 टन रसोई गैस लदी है, जो भारत के पूरे एक दिन की खपत के बराबर है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ये जहाज अब भारतीय समुद्री सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। ईरान द्वारा दी गई विशेष अनुमति के बाद इन जहाजों का निकलना संभव हो पाया है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
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India LPG crisis update: कब और कहां पहुंचेंगे टैंकर?
इन दोनों जहाजों के अगले कुछ दिनों में भारतीय बंदरगाहों पर लंगर डालने की उम्मीद है। बीडब्ल्यू टीवाईआर टैंकर मुंबई की ओर आ रहा है और इसके 31 मार्च तक पहुंचने की संभावना है। वहीं, बीडब्ल्यू ईएलएम टैंकर न्यू मंगलौर बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है और यह 1 अप्रैल तक भारत पहुंच जाएगा। इन जहाजों के समय पर आने से देश के विभिन्न हिस्सों में रसोई गैस की सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी और स्टॉक की कमी का डर कम होगा।
Iran US conflict oil prices: होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
मार्च 2026 में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे खतरनाक इलाका बना दिया है। इस संकीर्ण रास्ते से ही दुनिया का अधिकांश तेल और गैस गुजरता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। रास्ते बंद होने से न केवल ईंधन, बल्कि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए जरूरी हीलियम गैस की सप्लाई भी रुक गई है, जिससे तकनीकी क्षेत्र पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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अब तक कितने जहाज आए?
भारत सरकार की कूटनीति के चलते अब तक कुल छह एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से इस संकटग्रस्त क्षेत्र को पार कर चुके हैं। हालिया दो जहाजों से पहले, पाइन गैस और जग वसंत जैसे टैंकर मार्च के आखिरी हफ्ते में भारतीय तटों पर पहुंचे थे। उससे भी पहले, एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी गुजरात के मुंदड़ा और कांडला बंदरगाहों पर गैस की खेप उतार चुके हैं। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि युद्ध के माहौल में भी वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है।
खाड़ी देशों पर भारत की निर्भरता
भारत अपनी रसोई गैस की कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से खरीदता है। इसमें से करीब 90 प्रतिशत आयात अकेले पश्चिम एशिया यानी खाड़ी देशों से आता है। पिछले साल भारत ने 3.31 करोड़ टन एलपीजी का इस्तेमाल किया था। होर्मुज जलडमरूमध्य भारत की रसोई के लिए 'लाइफलाइन' की तरह है। यही कारण है कि वहां जारी तनाव सीधे भारतीय आम आदमी की जेब और चूल्हे पर असर डालता है, जिससे पार पाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।












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