उत्तर कोरिया में बाइबिल रखना भी गुनाह, जेल में कैद 70,000 ईसाई, 2 साल के बच्चे को हुई उम्रकैद की सजा
अमेरिका की विदेश विभाग की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2022 का अनुमान है कि उत्तर कोरिया में 70,000 से अधिक ईसाई और अन्य धर्मों के लोगों के साथ कैद हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट में पाया गया है कि उत्तर कोरिया में बाइबिल रखने वाले ईसाइयों को मौत की सजा का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं वहां पर बच्चों सहित उनके परिवारों को आजीवन कारावास की सजा दे दी जाती है।
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने एक एनजीओ 'कोरिया फ्यूचर' से मिली जानकारियों के आधार पर एक रिपोर्ट बनाई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया में 70,000 से अधिक ईसाई अन्य धर्मों के लोगों के साथ कैद हैं।
इससे पहले दिसंबर 2021 में कोरिया फ्यूचर ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें उत्तर कोरिया में महिलाओं के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग का दस्तावेजीकरण किया गया था। ये रिपोर्ट उन 151 ईसाई महिलाओं के इंटरव्यू पर आधारित थी जिन्होंने दुर्व्यवहार का अनुभव किया था।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जेल भेजे गए कई लोगों में एक दो साल का बच्चा भी था जिसे कथित तौर पर उसके माता-पिता के पास बाइबिल पाए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
ये मामला 2009 का बताया जा रहा है। एनजीओ ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया में ईसाई लोगों को उनके धर्म का पालन करने पर टॉर्चर किया जाता है। उनसे जबरन मजदूरी कराई जाती है और महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सुरक्षा मंत्रालय शैमैनिक अनुयायियों और ईसाइयों दोनों के खिलाफ 90 फीसदी मानवाधिकारों के हनन के लिए जिम्मेदार था।
उत्तर कोरिया छोड़कर आए लोगों ने कोरिया फ्यूचर को बताया है कि वहां ईसाइयों को लेकर दुष्प्रचार किया जाता है। मिशनरी को खून पीने वाले, हत्यारा और रेपिस्ट बताया जाता है।
कम्युनिस्ट देश होने की वजह से उत्तर कोरिया नास्तिक देश है। जो किसी धर्म में यकीन नहीं करता है। हालांकि दावा किया जाता है कि वहां सभी लोगों को अपने धर्म का पालन करने की आजादी है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया में 56.1 फीसदी लोग नास्तिक हैं। 25.5 फीसदी लोग बौद्ध धर्म में आस्था रखते हैं, लगभग 8 फीसदी लोग ईसाई धर्म में यकीन रखते हैं। बाकी लोग दूसरे मजहब के हैं।












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