5-14 साल के बच्चे तेजी से हो रहे हैं संक्रमित, यूरोप में कोरोना वायरस के नये ट्रेंड से दहशत में WHO
बच्चे सिर्फ खुद तेजी से संक्रमित नहीं हो रहे हैं, बल्कि 10 गुना ज्यादा तेजी से घर के बुजुर्गों को भी संक्रमित कर सकते हैं।
नई दिल्ली, दिसंबर 08: कोरोना वायरस का नया वेरिएंट 'ओमिक्रॉन' कितना खतरनाक है, इसपर अभी भी रिसर्च चल रहा है और विश्व के दर्जनों वैज्ञानिक 'ओमिक्रॉन' वेरिएंट को लेकर रिसर्च कर रहे हैं। लेकिन, इन सबके बीच यूरोप में कोरोना वायरस के शिकार होने वाले मरीजों में बच्चों की तादाद काफी तेजी से जुड़ रही है और अब इसकी पुष्टि डब्ल्यूएचओ ने कर दी है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि, यूरोप में 5 साल से 14 साल की उम्र तक के बच्चे काफी तेजी के साथ कोरोना वायरस के शिकार बन रहे हैं।

बच्चों पर विकराल स्थिति
यूरोप के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यालय ने मंगलवार को कहा है कि, 5 से 14 आयु वर्ग के बच्चे सर्वोच्च रफ्तार से कोरोना वायरस के शिकार बन रहे हैं, जो काफी ज्यादा चिंताजनक है। डब्ल्यूएचओ यूरोप के क्षेत्रीय निदेशक डॉ हैंस क्लूज ने तर्क देते हुए कहा कि, वैक्सीन जनादेश "एक पूर्ण अंतिम उपाय" होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि, कोविड 19 से होने वाली मौते, पिछली लहर के दौरान होने वाली मौतों से कम है, लेकिन उन्होंने कहा कि, मध्य एशिया तक फैले 53 देशों में पिछले दो महीनों में कोरोनावायरस के मामले और मौतें दोगुने से ज्यादा हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने बढ़ते मामलों और मौतों के लिए अभी भी डेल्टा वेरिएंट को ही जिम्मेदार माना है और कहा है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले 21 देशों में अभी तक सिर्फ 432 ही मिले हैं।

'अभी भी डेल्टा ही खतरनाक'
डेनमार्क के कोपेनहेगन में डब्ल्यूएचओ यूरोप मुख्यालय के प्रमुख डॉ हैंस क्लूज ने संवाददाताओं से कहा कि, "डेल्टा वेरिएंट पूरे यूरोप और मध्य एशिया में प्रमुख तौर पर मौजूद है, और हम जानते हैं कि सीओवीआईडी-19 के टीके गंभीर बीमारी और इससे होने वाली मौतों को कम करने में प्रभावी हैं।" उन्होंने कहा कि, "यह अभी देखा जाना बाकी है कि, कैसे और क्या चिंता की वजह ओमिक्रॉन वेरिएंट है और यह किस स्तर तक लोगों को प्रभावित कर रहा है''। क्लूज ने यूरोपीय देशों से आग्रह किया है कि, बच्चों में कोविड के तेजी से बढ़ते मामलों को रोकने के लिए फौरन कदम उठाए जाएं और वैक्सीनेशन की रफ्तार को तेज किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल जाने वाले बच्चों को भी सुरक्षित रखने के लिए फौरन कदम उठाने की अपील की है।

बच्चों पर कोरोना का कैसा असर?
रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक जो देखने को मिल रहा है, उसमें जो बच्चे कोरोना वायरस से पीड़ित हो रहे हैं, उनके ऊपर बुजुर्गों की तुलना में कोरोना का गंभीर असर नहीं हो रहा है। वहीं, डब्ल्यूएचओ अधिकारी ने कहा कि, "जैसे-जैसे स्कूल की छुट्टियां नजदीक आती हैं, हमें इस बात के लिए तैयार रहना होगा कि, भले बच्चों पर वायरस ज्यादा असर ना दिखा पाए, लेकिन ये बच्चे 10 गुना ज्यादा रफ्तार से घर में मौजूद दूसरे बुजुर्ग को वायरस बांट सकते हैं। और अगर इन वयस्कों ने टीका नहीं लगवाया है, तो उनकी जिंदगी पर खतरा 10 गुना तक ज्यादा बढ़ जाएगा।

महामारी का 'केन्द्र' रहा है यूरोप
डब्ल्यूएचओ के यूरोपीय क्षेत्र में हफ्तों के लिए महामारी का वैश्विक उपरिकेंद्र है, जो पिछले सप्ताह जारी संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी की साप्ताहिक महामारी विज्ञान रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 70% मामलों और 61 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार है।












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