ईरानी मिसाइलों को रोकने में Israel का डूबा अरबों रुपए! बर्बादी की ओर नेतन्याहू सरकार?
Israel Iran War: मध्य पूर्व फिर से युद्ध और अस्थिरता के खतरनाक दौर से गुजर रहा है, जहाँ ईरान और इजरायल के बीच पुराना छिपा संघर्ष अब खुला सैन्य मुकाबला बन चुका है। इस संघर्ष में दोनों पक्षों के मिसाइल हमलों और सैन्य कार्रवाइयों के कारण सैकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं, जिनमें आम नागरिक और सुरक्षा बल दोनों शामिल हैं। ईरान ने इजरायल के आवासीय इलाकों को निशाना बनाकर उसके नागरिकों की सुरक्षा को चुनौती दी है, वहीं इजरायल की सेना ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं पर बमबारी कर उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
हाल ही में ईरान ने इजरायल पर 400 से अधिक मिसाइलें दागी हैं, जिनमें से इजरायल अपने मिसाइल रक्षा तंत्र के जरिए कई को रोकने में सफल रहा है। लेकिन इस लगातार हो रहे मिसाइल हमलों से इजरायल को भारी आर्थिक और सुरक्षा क्षति झेलनी पड़ रही है। इस वजह से इजरायल गंभीर आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है।

इज़रायल की मिसाइल डिफेंस, नई चुनौतियां
इज़रायल की सुरक्षा रणनीति तीन-स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणालियों पर आधारित है, जो अलग-अलग रेंज से आने वाले खतरों से देश की रक्षा के लिए विकसित की गई हैं। ये सिस्टम Iron Dome, David's Sling, और Arrow System मिलकर एक ऐसी सुरक्षा परत तैयार करते हैं जो छोटी से लेकर लंबी दूरी तक के हमलों को रोकने में सक्षम है। हालांकि, हालिया हालात में ये रक्षा प्रणालियां बेहद दबाव में आ गई हैं। लगातार हो रहे मिसाइल हमलों ने न सिर्फ इनके ऑपरेशनल स्टॉक को तेजी से खत्म किया है, बल्कि हर इंटरसेप्शन पर आने वाला भारी आर्थिक बोझ अब इज़रायल की सुरक्षा नीति के सामने एक नई चुनौती बन गया है।
Arrow System: लंबी दूरी का सबसे महंगा रक्षक
- उद्देश्य: लॉन्ग-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना
- टारगेट: ईरान जैसी दूर स्थित शक्तियों की मिसाइलें
- मिसाइल कीमत: लगभग ₹16.7 करोड़ से ₹25 करोड़ प्रति मिसाइल खर्च आ रहे हैं
- स्थिति: स्टॉक तेजी से घट रहा है, जिससे सुरक्षा नीति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं
David's Sling: मध्यम दूरी का सुरक्षा कवच
- उद्देश्य: मिड-रेंज मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और भारी रॉकेट
- मिसाइल कीमत: लगभग ₹8.3 करोड़ प्रति मिसाइल
- उपयोग: सीमावर्ती और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा के लिए अहम
Iron Dome: नजदीकी खतरों के खिलाफ ढाल
- उद्देश्य: कम दूरी से दागे गए रॉकेट, मोर्टार और ड्रोन्स
- मिसाइल कीमत: लगभग ₹16.7 लाख से ₹83 लाख प्रति मिसाइल
- उपयोग: गाजा और सीमावर्ती इलाकों से हमलों में सबसे ज़्यादा सक्रिय
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इज़रायल की रणनीति पर मंडराते खतरे
एक तरफ युद्ध की आहट तेज़ हो रही है, दूसरी ओर इज़रायल के सामने एक नई रणनीतिक उलझन खड़ी हो गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका को इस संकट के शुरुआती संकेत पहले ही मिल गए थे, लेकिन अब जब हालात सीधे टकराव की ओर बढ़ रहे हैं, तो इज़रायल की रक्षा प्रणाली अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर दबाव में आ गई है।
तेज़ होते हमलों ने इज़रायली डिफेंस सिस्टम, खासकर महंगे इंटरसेप्टर मिसाइल्स पर जबरदस्त बोझ डाल दिया है। स्टॉक लगातार घट रहा है, और हर हमले को रोकना अब करोड़ों डॉलर की कीमत पर पड़ रहा है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लम्बे समय तक चलता है, तो इज़रायल को न सिर्फ भारी आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि उसकी सुरक्षा प्रणाली की टिकाऊ शक्ति भी संदेह के घेरे में आ सकती है।
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