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ISIS-K ने पूरी दुनिया में शरिया कानून लागू किया, पाकिस्तान को नष्ट करना पहला लक्ष्य बताया

15 अगस्त के बाद से ISIS-K ने अफगानिस्तान के कई प्रांतों में आत्मघाती हमलों और टार्गेट बम विस्फोटों को अंजाम दिया है, सैकड़ों लोगों की जान ले चुका है। जबकि कुछ हमलों ने तालिबान को भी निशाना बनाया गया है।

काबुल, अक्टूबर 31: अफगानिस्तान में दर्जनों बम धमाके कर सैकड़ों बेगुनाह लोगों की हत्या करने वाला विश्व का खूंखार आतंकवादी संगठन आईएसआईएस-खोरासन ने पूरी दुनिया में शरिया कानून लागू करने का ऐलान किया है। अफगानिस्तान में मौजूद आईएसआईएस खुरासान (आईएसआईएस-के) को दाएश के नाम से भी जाना जाता है, उसने कहा है कि, उसका कट्टर लक्ष्य शरिया कानून को लागू करवाना है और उसने चेतावनी दी है, कि जो भी दुनिया में इस्लाम और कुरान के खिलाफ गया उसे आतंकवादी समूह के क्रोध का सामना करना पड़ेगा।

दुनिया फतह करने का बताया प्लान

दुनिया फतह करने का बताया प्लान

रिपोर्ट के मुताबिक, नजीफुल्लाह नाम का एक आतंकवादी, जो आईएसआईएस-खोरासन का उच्च सदस्य है, उसने पूरी दुनिया पर फतह हासिल करने का प्लान भी बताया है और उसने अपने खतरनाक मंसूबों को दुनिया पर लादने का प्लान बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने कहा है कि, ''आईएसआईएस-के का पहला लक्ष्य पाकिस्तान को नष्ट करना है, क्योंकि अफगानिस्तान में हर चीज का मुख्य कारण पाकिस्तान ही है। जब तालिबान यहां थे (पिछली सरकार के शासन के वक्त में), वे कह रहे थे कि हम देश के 80 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करते हैं, लेकिन अब, जब वो पूरे देश पर शासन कर रहे हैं, फिर भी वो देश में इस्लामिक शासन को लागू नहीं कर रहे हैं। इसलिए हम इस क्षेत्र में सख्त शरिया कानून को लागू कर चुके हैं।

'अफगानिस्तान में बदतर हालात'

'अफगानिस्तान में बदतर हालात'

आतंकवादी संगठन आईएसआईएस-के ने कहा है कि, तालिबान के आने के बाद से अफगानिस्तान में हालात बद से बदतर होता चला गया है। इस आतंकवादी संगठन ने तालिबान पर "देश को नष्ट करने" का आरोप लगाया है, जिसने ढाई महीने पहले अफगानिस्तान में सत्ता संभाली है। नजीफुल्ला ने कहा कि, "हम शरिया कानून को लागू करना चाहते हैं। हम जिस तरह से हमारे पैगंबर जी रहे थे, जिस तरह से उन्होंने कपड़े पहने थे, उसी हिसाब से ड्रेसिंग हिजाब को लागू करना चाहते हैं। वर्तमान में हमारे पास लड़ने के लिए बहुत कुछ नहीं है। लेकिन अगर आप मुझे कुछ भी देते हैं, तो मैं अब पाकिस्तान से लड़ने जा रहा हूं,"।

आईएसआईएस बनाम तालिबान

आईएसआईएस बनाम तालिबान

नजीफुल्ला का इंटरव्यू करने वाले 'न्यूज' ने कहा कि, नजीफुल्ला हर जगह वांटेड है और उसकी तलाश अमेरिकी सैनिकों को तो है ही, इसके अलावा तालिबान के लोग भी सख्ती से उसकी तलाश कर रहे हैं। उन्होंने अपने रिपोर्ट में कहा है कि, 15 अगस्त के बाद से आईएसआईएस-के ने कई प्रांतों में आत्मघाती हमलों और टार्गेट बम विस्फोटों को अंजाम दिया है और सैकड़ों लोगों की जान ली है। जबकि कुछ हमलों में तालिबान के नेताओं और लड़ाकों को भी निशाना बनाया है। ये संगठन खास तौर पर अफगानिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों और शिया समुदाय के लोगों पर हमला करता है। इसी महीने अफगानिस्तान के दो प्रांतों में शिया मस्जिदों पर भीषण हमला किया था, जिनमें 100 से ज्यादा शिया मुसलमानों की मौत हो गई थी।

खूंखार होता जा रहा आईएसआईएस-के

खूंखार होता जा रहा आईएसआईएस-के

ऐसी रिपोर्ट है कि, तालिबान में आईएसआईएस-खोरासन के जो आतंकवादी पहले शामिल हुए थे, उन्हें तालिबान ने अपने संगठन से निकाल दिया है, लेकिन ये काफी ज्यादा खतरनाक अब तालिबान के लिए ही हो चुके हैं और उसी तरह से तालिबान के लोगों पर हमला कर रहे हैं, जिस तरह से तालिबान के लड़ाके अमेरिकी फौज पर या अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती सरकार पर हमले करती थी। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि, पाकिस्तान के अलग अलग इलाकों में आईएसआईएस-खोरासन के जो कैंप्स थे, उन्हें पाकिस्तानी आर्मी ने हटा दिया है, जिसके बाद इस संगठन ने घरेलू स्तर पर जोरदार हमलों को अंजाम देना शुरू कर दिया है और इसका कहना है कि, पाकिस्तान में भी 'खिलाफत' का नियंत्रण होना चाहिए और देश में बेहद सख्त शरिया कानून लागू होना चाहिए।

'तालिबान में सच्चाई की कमी'

'तालिबान में सच्चाई की कमी'

आईएसआईएस-खोरासन का नेता नजीफुल्ला ने कहा कि, वह आईएसआईएस-खोरासन में इसलिए शामिल हुआ है, क्योंकि तालिबान में सच्चाई की कमी को देखते देखते वो थक गया था। Knowz ने नजीफुल्ला के हवाले से कहा है कि, ''हम तालिबान से मुल्ला उमर का वीडियो दिखाने के लिए कहते रहे, लेकिन हमें उसका वीडियो नहीं दिखाया गया। इसलिए अफगानिस्तान में दाएश (आईएसआईएस का अरबी शब्द) बनाया गया था।'' नजीफुल्ला ने कहा कि, ''पहले तालिबान सच्चे लग रहे थे, वो शरिया कानून लाने की बात कर रहे थेष इसीलिए मैं उनमें शामिल हुआ था, लेकिन अब उनमें सच्चाई नहीं है और वो देश में सख्त शरिया कानून लागू करने में नाकाम रहे हैं''। आपको बता दें कि, साल 2013 में तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर की अमेरिकी हमले में मौत हो गई थी, जिसे तालिबान ने करीब 2 सालों तक छिपाकर रखा था। अब तालिबान ने अपने सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा को भी पर्दे में छिपा कर रखा है, जिसके बारे में खबर है कि, उसकी मौत हो चुकी है।

अफगानिस्तान पर कहर बरपाने की क्षमता

अफगानिस्तान पर कहर बरपाने की क्षमता

24 वर्षीय नजीफुल्ला ने आगे कहा कि, आईएसआईएस-खोरासन के पास अफगानिस्तान में भीषण कहर बरपाने की क्षमता है। आपको बता दें कि, अफगान सरजमीं पर तालिबान के गुर्गों की संख्या लगभग सत्तर हजार होने का अनुमान है, जबकि आईएसआईएस के आतंकवादियों को अमेरिकी खुफिया जानकारी के अनुसार दो हजार के आसपास माना जाता है। इस बात को साबित करने के लिए आईएसआईएस ने 15 अगस्त को तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के बाद आईएसआईएस ने नागरिकों को निशाना बनाकर हमले करने शुरू कर दिए हैं। इस तरह का सबसे बड़ा उदाहरण काबुल में हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आत्मघाती हमला था।

तालिबान ने ही निकाला था जेल से बाहर

तालिबान ने ही निकाला था जेल से बाहर

आपको बता दें कि, नजीफुल्ला को पिछली अफगानिस्तान की सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था और उसे बगराम जेल में बंद कर रखा गया था। लेकिन, काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने बगराम जेल से सभी आतंकियों को रिहा कर दिया था, जिसनें नजीफुल्ला भी शामिल था और उसके बाद से ही आईएसआईएस-खोरासन लगातार अफगानिस्तान में उत्पात मचा रहा है। आतंकवादी नजीफुल्ला ने आगे खुलासा किया कि, उसने अबू बक्र बगदादी के प्रति अपनी निष्ठा का वचन दिया है, और उसे पूरा करने के लिए काम कर रहा है। नजीफुल्ला ने खुलासा किया है कि, आईएसआईएस में शामिल होने वाले लड़ाकों को ट्रेनिंग के लिए पूर्वी नंदहर प्रांत में भेजा जाता है और नज़ीफुल्ला ने दावा किया कि आईसआईएस- खोरासन चीन, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और रूस से आने वाले जिहादियों के एक अंतरराष्ट्रीय कैडर से जुड़ गया है।

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