इंडोनेशिया में हिंसक झड़प, जकार्ता-दक्षिण तंगेरांग में सांसदों के घर लूटे गए, राष्ट्रपति की चीन यात्रा रद्द
Indonesia Protests: इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता और कई प्रमुख शहरों में पिछले एक सप्ताह से चल रहे विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण तंगेरांग और जकार्ता के अन्य इलाकों में सांसदों और मंत्रियों के घरों पर हमला किया, सामान लूटा और तोड़फोड़ की।
प्रदर्शन का कारण हाल ही में उजागर हुआ था कि इंडोनेशिया के 580 सांसदों को वेतन के अलावा हर महीने 50 लाख रुपिया (करीब 3,075 डॉलर) मकान भत्ते के रूप में मिल रहे हैं, जो राजधानी के न्यूनतम वेतन से दस गुना अधिक है। महंगाई और बेरोजगारी से परेशान जनता ने इसे अन्याय और भेदभाव के रूप में देखा और सड़कों पर उतर आई।

सड़क पर हिंसा से यातायात बाधित
सड़क पर हिंसा के कारण जकार्ता में यातायात बाधित हुआ और कई मुख्य मार्ग घंटों तक बंद रहे। सुराबाया, योग्याकर्ता, मेदान, मकास्सर, मनाडो, बांडुंग और पापुआ में भी प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर तोड़फोड़ की, सिग्नल और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।
वित्त मंत्री के घर पर तोड़फोड़
प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण तंगेरांग में वित्त मंत्री मुलयानी इंद्रावती के घर पर हमला किया और सुरक्षा में तैनात सैनिकों को निशाना बनाते हुए एंट्री गेट तोड़ दिया। घर में मौजूद कीमती सामान और उपकरणों की लूटपाट की गई। इसी समय नास्देम पार्टी की सांसद और पूर्व अभिनेत्री नाफा उरबाक के घर पर भीड़ ने हमला किया और सामान चोरी किया। पूर्वी जकार्ता के दुरेन सावित जिले में पूर्व टीवी होस्ट उया कुया के घर में भी इसी तरह की लूटपाट हुई।
दक्षिण जकार्ता में विधायक एको पैट्रियो के घर में भीड़ ने तोड़फोड़ की और उनके घर से कपड़े, रेफ्रिजरेटर और एलपीजी गैस सिलेंडर लूट लिए। उया और एको इस महीने पहले भी चर्चा में आए थे, जब संसद के वार्षिक सत्र के दौरान उनका डांस करते हुए वीडियो वायरल हुआ था। इन वीडियोज़ की आलोचना के बाद उनकी छवि पर सवाल उठाए गए थे, जिससे अब उनके घरों पर हमला और भी बढ़ गया।
राष्ट्रपति ने चीन का दौरा किया रद्द
इस हिंसा के चलते राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो को अपनी चीन यात्रा रद्द करनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में दो दिन पहले जकार्ता में एक डिलीवरी राइडर की मौत भी हुई थी। यह पूरी घटनाक्रम इंडोनेशिया में बढ़ती असंतोष और आर्थिक विषमता का स्पष्ट उदाहरण है, जिसने देश की सामाजिक स्थिरता को चुनौती दी है।
प्रदर्शन और हिंसा ने सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जनता का गुस्सा महंगाई, बेरोजगारी और नेताओं की सुविधाओं के असंतुलन के कारण भड़क रहा है। अब सरकार को स्थिति को नियंत्रण में लाने और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।












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