फाइटर जेट का इंजन अब खुद बनाएगा भारत! रूस में की जाएगी कावेरी की टेस्टिंग, ऐतिहासिक कामयाबी को जानिए
Kaveri Fighter Jet Engine: फाइटर जेट इंजन बनाने के लिए भारत को दूसरे देशों की तरफ मुंह ताकते रहना पड़ा है और अभी भी, फाइटर जेट तेजस का निर्माण इसलिए अटका पड़ा है, क्योंकि अमेरिकी डिफेंस कंपनी GE इंजन की सप्लाई करने में देरी कर रहा है।
लेकिन, अब भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने घोषणा की है, कि उसकी शाखा गैस टर्बाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (GTRE) कावेरी इंजन के विकास के महत्वपूर्ण स्टेज में प्रवेश कर रहा है, और अब इंजन का एडवांस टेस्ट किया जाएगा। यानि, भारत एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल करने के कगार पर पहुंच रहा है। और अगर कामयाबी मिल जाती है, तो अगले कुछ सालों में उम्मीद की जानी चाहिए, कि भारत भी लड़ाकू विमानों का इंजन खुद बनाना शुरू कर देगा।

कावेरी इंजन भारत के लिए कितनी बड़ी कामयाबी? (Kaveri Fighter Jet Engine Flight Test)
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बनी कावेरी इंजन की फ्लाइट टेस्ट रूस की राजधानी मॉस्को में होने वाली है और रूस के स्पेशल विमान इल्यूशिन IL-76 विमान के साथ इस इंजन की 70 घंटे तक अलग अलग कठोर उड़ान और कठोर वातावरण में टेस्ट किया जाएगा। यह परीक्षण चरण करीब एक महीने तक चलने का अनुमान है।
इन परीक्षणों का उद्देश्य इंजन की क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है, विशेष रूप से 40,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर, जो इसके विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इससे पहले, कावेरी इंजन की टेक्नोलॉजी का टेस्ट किया गया था, जिसमें बैंगलोर की GTRE सुविधा में 70 घंटे का ग्राउंड परीक्षण और रूस में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन मोटर्स (CIAM) में 75 घंटे की ऊंचाई परीक्षण शामिल है। इन टेस्टिंग्स से इंजन की उच्च प्रदर्शन करने की क्षमता और अलग अलग स्थितियों और अलग अलग वातावरण में उड़ान भरने की क्षमता की जांच की जाती है।
इस बार रूस की राजधानी मॉस्कों में जो टेस्टिंग होने वाली है, उसके लिए GTRE ने नए इंजनों के उत्पादन के लिए गोदरेज एयरोस्पेस की विशेषज्ञता को शामिल किया है। 20 GTRE वैज्ञानिकों और उनके रूसी समकक्षों को शामिल करने वाला एक सहयोगी प्रयास इन परीक्षणों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
स्पेशल टेक्नोलॉजी से इंजन की टेस्टिंग
रिपोर्ट के मुताबिक, कावेरी इंजन का अब एक विशेष उड़ान परीक्षण बेड (FTB) पर वास्तविक दुनिया में प्रदर्शन करने की क्षमता का टेस्ट किया जाएगा। परीक्षण के इस स्टेज में, ड्राई-कावेरी इंजन को अलग अलग उड़ान परिस्थितियों के प्रति इसकी प्रतिक्रिया, विमान प्रणालियों के साथ इसके एकीकरण और एक गतिशील और चुनौतीपूर्ण वातावरण में इसकी विश्वसनीयता का टेस्ट करने के लिए एफटीबी पर रखा जाएगा। विस्तारित उड़ान में इंजन की सहनशक्ति और दक्षता का भी परीक्षण किया जाएगा।
फ्लाइंग टेस्ट बेड (FTB) के रूप में चुने गए IL-76 विमान में कावेरी इंजन को लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। विशेष रूप से, विमान के चार इंजनों में से एक को हटाकर उस जगह पर कावेरी इंजन को लगाया गया है, जिससे विमान को परीक्षणों के लिए आवश्यक सेंसर और डेटा अधिग्रहण उपकरणों की एक सरणी से लैस किया गया था। ये संशोधन यांत्रिक, विद्युत और ईंधन प्रणालियों तक फैले हुए हैं, जो उड़ान के दौरान कावेरी इंजन के निर्बाध एकीकरण और ऑपरेशन को सुनिश्चित करते हैं।
इन महत्वाकांक्षी उड़ान परीक्षणों के शुरू होने से पहले, कावेरी इंजन के IL-76 विमान के साथ सुरक्षित और प्रभावी एकीकरण को वेरिफाई करने के लिए टैक्सी टेस्टिंग की एक सीरिज की जाएगी। इन परीक्षणों का मकसद उच्च ऊंचाई पर इंजन की विश्वसनीयता, दक्षता और प्रदर्शन का आकलन करना है। इस डेटा से प्राप्त जानकारी इंजन के डिज़ाइन को सोफिस्टिकेट करने, पहले के परीक्षणों के दौरान पहचाने गए किसी भी समस्या को सुधारने और ऑपरेशनल सर्टिफिकेशन की तरफ बढ़ने में मददगार साबित होगी।
परीक्षण का यह चरण कावेरी इंजन के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में इनोवेशन और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जीटीआरई और उसके भागीदार इन परीक्षणों से मूल्यवान डेटा हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं, जो इंजन के भविष्य के विकास की नई दिशा तय करेगा।












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