OI Explained: क्या भारत बना पाएगा अपना स्पेस स्टेशन? कितना आएगा बनाने में खर्चा? अब तक किन-किन देशों के पास?
Indian Space Station: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के स्पेस सेक्टर को लेकर अपना विजन दुनिया के सामने रखा। मेलबर्न में आयोजित इवेंट में भारतीय लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत चंद्रयान मिशन की सफलता पर रुकने वाला नहीं है। भारत अब गगनयान ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन और खुद का स्पेस स्टेशन बनाने जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रहा है। पीएम मोदी इस वक्त ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंडोनेशिया के तीन देशों के दौरे पर हैं। उन्होंने करीब 30,000 भारतीयों के सामने साफ कहा कि भारत का स्पेस मिशन "ग्रो मोर-अचीव मोर" के मोटो पर चल रहा है। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर एक स्पेस स्टेशन कितने रुपए में बनता है, कितना खर्चा आता है और ये है किस काम का।
भारत लॉन्च कर रहा पहला ऑर्बिटल रॉकेट
पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने अपने विक्रम-1 ऑर्बिटल रॉकेट की टेस्ट फ्लाइट का एलान किया है। 'मिशन आगमन' नाम का यह प्रोजेक्ट भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है क्योंकि यह देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च होगा। कंपनी के मुताबिक, सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड (FLP) पर रॉकेट को पूरी तरह असेंबल कर लिया गया है। इसका लॉन्च विंडो 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच तय किया गया है, जिसका मकसद पेलोड को 450 किलोमीटर की लो अर्थ ऑर्बिट में 60-डिग्री के झुकाव पर स्थापित करना है।

किस-किस के पास है स्पेस स्टेशन?
मौजूदा वक्त में ISS (International Space Station) और Tiangong Space Staion (तियानगोन्ग) दो स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में काम कर रहे हैं। जिसमें से ISS अमेरिका, रूस, यूरोप, कनाडा और जापान का साझा स्पेस स्टेशन है, जबकि तियानगोन्ग चीन का अकेले स्वामित्व वाला स्पेस स्टेशन है जो 2022 से स्पेस में काम कर रहा है। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि एक स्पेस स्टेशन को बनाने और उसे चलाने में कितना खर्च आता है।
क्या-क्या है स्पेस स्टेशन के भीतर?
NASA की वेबसाइट के मुताबिक ISS 109 मीटर लंबा स्पेस स्टेशन है जो 4,19,725 किलोग्राम का है। जो सोलर एनर्जी से चलता है। इसके सोलर पैनल आकार में इतने बड़े हैं कि 1 एकड़ के खेत को कवर कर लें। इस स्पेस स्टेशन में रहने के लिए 7 स्लीपिंग केबिन (क्वार्टर), दो टॉयलेट, एक जिम और एक खिड़की है जिससे धरती का 360 डिग्री का नजारा मिलता है। यह स्पेस स्टेशन धरती से 402 मीटर की ऊंचाई पर घूमता रहता है जो धरती की कुल आबादी के 90 प्रतिशत हिस्से को कवर कर लेता है।
एक स्पेस स्टेशन बनाने और चलाने में कितना आता है खर्च?
NASA की रिपोर्ट के मुताबिक उसे ISS चलाने में हर साल तकरीबन 3 बिलियन डॉलर (लगभग 29 हजार करोड़ भारतीय रुपए) का खर्चा आता है। जबकि इसे बनाकर लॉन्च करने में तकरीबन 150 बिलियन डॉलर (लगभग 14.3 लाख करोड़ भारतीय रुपए) का खर्च आता है। ये 20 नवंबर 1998 को लॉन्च हुआ था, इसलिए इसमें अगर आज की महंगाई को जोड़ लें तो ये रकम और ऊपर चली जाएगी। पिछली रकम के हिसाब से अगर देखा जाए तो भारत का 2026-27 का बजट 53.5 लाख करोड़ रुपए का था, इस गणित के हिसाब से भारत को अपने सालभर के बजट का कम से कम 26.7% हिस्सा सिर्फ स्पेस स्टेशन बनाने पर खर्च करना होगा। बाकी इसे चलाने का खर्च रहेगा।
यक्ष प्रश्न- किस काम आता है स्पेस स्टेशन?
स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष की खोज में लगने वाली जानकारियों, स्पेस साइंस के रिसर्च, दूसरे ग्रहों की जानकारी, स्पेस रिसर्च, एस्ट्रोनॉट द्वारा किए जाने वाले नए टेस्ट, सैटेलाइट, स्पेस मेडिकल साइंस और कई ऐसी खोजों में काम आता है जो धरती से संभव नहीं है। यहां तक कि किसी दूसरे ग्रह पर अगर जीवन तलाशना हो तो यह बिना स्पेस स्टेशन के संभव नहीं है। इसे और ज्यादा आसान भाषा में समझें तो आपके इंटरनेट, मोबाइल और दूसरे कई इक्विपमेंट ये सब इसीलिए चल पाए क्योंकि कई खोजें स्पेस स्टेशन के दम पर हुईं।
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