Explainer: स्वदेशी स्टील्थ टेक्नोलॉजी, खामोशी के साथ हमला... UAV बनाने वाले इलिट ग्रुप में शामिल हुआ भारत

India Vs China Drone War: भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेलवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानि डीआरडीओ ने पिछले हफ्ते कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से अपने ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर, एक स्वदेशी हाई-स्पीड फ्लाइंग-विंग मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है और इसके साथ ही, भारत के स्टील्थ ड्रोन युग की शुरूआत हो गई है।

डीआरडीओ की इस कामयाबी पर भारतीय रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, कि यूएवी को डीआरडीओ के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है और दो इन-हाउस निर्मित प्रोटोटाइप का उपयोग करके अलग अलग तरह के 6 उड़ानों की टेस्टिंग की गई है।

India Vs China Drone War

रक्षा मंत्रालय के 15 दिसंबर के बयान में कहा गया है, कि यूएवी की स्वायत्त लैंडिंग ने एक अद्वितीय क्षमता का प्रदर्शन किया है, जो इस ड्रोन को किसी भी रनवे से टेक-ऑफ और लैंडिंग करने के काबिल बनाता है। डीआरडीओ की ड्रोन की इस क्षमता का प्रदर्शन इस बात पर भी प्रकाश डालता है, कि जीपीएस-सहायता प्राप्त जीईओ-संवर्धित नेविगेशन (जीएजीएएन) रिसीवर का उपयोग करके, बोर्ड पर सेंसर डेटा को फ्यूज करके यह उपलब्धि हासिल की गई, जो जीपीएस नेविगेशन को बेहतर बनाने के लिए सैटेलाइट का उपयोग करता है।

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बताया है, कि ड्रोन की टेस्टिंग से एयरोडाइनेमिक एंड कंट्रोल सिस्टम, इंटीग्रेटेड रीयल-टाइम क्षमता, हार्डवेयर-इन-लूप सिमुलेशन और स्टेट ऑफ द आर्ट गाउंड कंट्रोल स्टेशन क्षमता का भी डेवलपमेंट हो गया है।

यानि, भारत ने एडवांस स्वदेशी ड्रोन विकसित कर लिया है।

भारतीय रक्षा मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया है, कि "इस प्रोजेक्ट के पीछे अनुसंधान टीम ने अंतिम कॉन्फ़िगरेशन में सफल, सातवीं उड़ान के लिए एवियोनिक सिस्टम, एकीकरण और उड़ान संचालन को अनुकूलित किया था।

स्वदेशी ड्रोन की टेस्टिंग के साथ ही, अब भारत ऐसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के सफल स्वदेशी विकास से भारतीय सशस्त्र बल और मजबूत होंगे और भारत "विंग तकनीक की उड़ान के नियंत्रण में महारत हासिल करने वाले देशों के क्लब" में शामिल हो गया है।

हालांकि, भारतीय रक्षा मंत्रालय ने परीक्षणों में शामिल ड्रोन की स्पष्ट रूप से पहचान नहीं की है, लेकिन संभवतः यह घातक फ्लाइंग विंग स्टील्थ ड्रोन का एक वेरिएंट है।

ड्रोन की दुनिया में भारत की ऐतिहासिक उड़ान

जून 2022 में, एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था, कि भारत ने कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में अपने ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था।

यूएवी, जिसे स्टील्थ विंग फ्लाइंग टेस्टबेड (स्विफ्ट) का स्वदेश में निर्माण करना भारत की हथियारों को लेकर आत्मनिर्भरता की दिशा में काफी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ड्रोन का एयरफ्रेम, हवाई जहाज़ के पहिये, उड़ान नियंत्रण और एवियोनिक्स सिस्टम, सभी कल पुर्जे भारत में ही बनाए गये हैं। स्विफ्ट ड्रोन 4.8 मीटर पंखों के साथ 3.96 मीटर लंबा है और इसका वजन लगभग 1,043 किलोग्राम है।

हालांकि, यह रूसी एनपीओ सैटर्न 36MT टर्बोफैन इंजन द्वारा संचालित था, जिससे पता चलता है, कि भारत को अभी भी छोटे ड्रोन विमान इंजन बनाने के लिए तकनीक में सुधार करने की आवश्यकता है।

वहीं, डिजाइन और ड्रोन की घातक क्षमता का सटीक परीक्षण करने के लिए अभी कम से कम 10 और टेकऑफ और लैंडिंग की जरूरत है, ताकि हर एक पैमाने पर ड्रोन को पूरी तरह से परखा जा सके।

भारत का ये घातक स्टील्थ ड्रोन, चीन और पाकिस्तान के किसी भी घुसपैठ को रोकने से लेकर सर्विलांस करने तक में सक्षम है।

कार्नेगी इंडिया के लिए जुलाई 2023 के एक लेख में, सूर्या कृष्णा और आशिमा सिंह ने लिखा है, कि 2020 और 2022 के बीच भारत-पाकिस्तान सीमा पर 492 ड्रोन देखे गए, जिनमें से 311 2022 में, 104 2021 में और 77 2020 में देखे गए।

कृष्णा और सिंह ने उल्लेख किया कि पाकिस्तान की बढ़ती ड्रोन घुसपैठ भारत के सीमा सुरक्षा बलों के लिए एक नई चुनौती है। उन्होंने ध्यान दिया कि पाकिस्तान के ड्रोन उच्च ऊंचाई और कम गति पर उड़ सकते हैं, जिससे उनका पता लगाना और रोकना मुश्किल हो जाता है। उनका यह भी कहना है कि ड्रोन घुसपैठ अभियानों में लगे मानव गुर्गों के लिए खतरे को कम करते हैं।

कृष्णा और आशिमा सिंह का मानना है, कि चूंकि ड्रोन लंबी दूरी तक पेलोड ले जा सकते हैं, इसलिए वे सीमा पार हथियार, विस्फोटक, ड्रग्स और अन्य आपूर्ति के परिवहन के लिए एक प्रभावी उपकरण हैं। उनका यह भी कहना है, कि ड्रोन का इस्तेमाल सैन्य प्रतिष्ठानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और अन्य लक्ष्यों के खिलाफ जासूसी के लिए किया जा सकता है।

चीन ने भारत के साथ अपने सीमा विवादों में भी ड्रोन का उपयोग किया है, लिहाजा अब भारत भी अपने स्वदेशी ड्रोन से ड्रैगन को मुंहतोड़ जवाब देने की काबिलियत हासिल कर चुका है।

फाउंडेशन फॉर स्ट्रैटेजिक रिसर्च के जुलाई 2023 के पेपर में, एंटोनी बॉन्डाज़ और साइमन बर्थॉल्ट ने लिखा है, हिमालय के जटिल वातावरण में चीन के लिए ड्रोन सर्विलांस, इंटेलिजेंस, राहत और बचाव जैसे काम करते हैं। इसके अलावा, चीन भारत के साथ अपनी सीमा पर यूएवी का इस्तेमाल विभिन्न मिशनों जैसे कि रसद सहायता, सीमा निगरानी, युद्ध क्षति मूल्यांकन, तोपखाने स्पॉटिंग, स्निपिंग, माइन क्लीयरेंस और संचार समर्थन के लिए करता है।

वहीं, भारत अभी तक ड्रोन के क्षेत्र में पीछे चल रहा था, लेकिन अब भारत मुंहतोड़ जवाब देने की स्थिति में आ चुका है और आने वाले वक्त में भारतीय ड्रोन, हिमालय के क्षेत्र में चीन को उसी की भाषा में जवाब देते दिख जाएंगे।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+