Pics: अंतरिक्ष में 33 साल बाद वरुण का 'फोटोशूट'! JWST से आई तस्वीरों में मोती जैसा दिखा 'हरा ग्रह'
नई दिल्ली, 22 सितंबर। नासा को अंतरिक्ष में लंबे समय बाद नेपच्यून यानी वरुण ग्रह की तस्वीरें मिली हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी के जेम्स वेब टेलीस्कोप ने ताजा तस्वीरें भेजी हैं। इन खास तस्वीरों को स्पेस साइंटिस्ट्स को लंबे समय से प्रतीक्षा थी। नासा ने वरुण ग्रह की ताजा तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है कि नेपच्यून की रिंग के साथ 33 साल बाद ये फोटो मिली है, जिसे पहली बार इन्फ्रारेड लाइट में देखा गया।

NASA को 33 साल बाद मिली खास तस्वीरें
वेब द्वारा ली गई इस छवि में नेपच्यून के छल्ले स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि वरुण ग्रह अंधेरे बैकग्राउंड में चारों ओर ईथर संकेंद्रित रिंग्स के साथ मौजूद है। नासा के कैमरे जेम्स वेब टेलीस्कोप द्वारा भेजी गई तस्वीर को लेकर नासा ने कहा ये पिछले 33 साल के दौरान ये पहली तस्वीर है जो इतनी स्पष्टता के साथ ली गई। इसमें वरुण ग्रह को रिंग्स के बीच मोती जैसा चमकता देखा जा सकता है।

इन्फ्रारेड लाइट में वरुण
ताजा तस्वीरों का ब्यौरा देते हुए नासा ने कहा कि नेपच्यून और ट्राइटन की लेटेस्ट तस्वीरें काफी स्पष्ट हैं। जिसे जेम्स वेब टेलीस्कोप के शक्तिशाली लेंस ने इन्फ्रारेड बैकग्राउंड के साथ कैप्चर की हैं। ये तस्वीर आकाशगंगाओं और सितारों को भी दिखाती है।

चारों ओर दिखे चंद्रमा के शेप के 6 डॉट्स
सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों को लेकर नासा ने कहा कि दूसरी और तीसरी छवियों में बाईं ओरकोई तारा नहीं है। ये ट्राइटन है, जो नाइट्रोजन के अणुओं से ढका है। ये सूरज की रोशनी में 70% चमकता है। जेम्स वेब की तस्वीरों में ये काफी स्पष्ट दिखाई देता है। जबकि अन्य 6 चंद्रमाओं को नेपच्यून और उसके छल्ले के आसपास छोटे बिंदुओं के रूप में देखा जा सकता है।

मोती जैसा दिखा वरुण ग्रह
जेम्स वेब की तस्वीरों में नेपच्यून के रिंग्स और उसके चंद्रमाओं को जूम ऑउट करके देखा जा सकता है। रिंग्स के बीच में छोटा चक्राकार मोती जैसा नेपच्यून है। जबकि ब्लैक बैकग्राउंट में आकाशगंगा और उसमें 8 चमकीले डॉट्स दिखाई दे रही हैं। निचले बाएं कोने में एक छोटी सफेद सर्पिल आकाशगंगा विशेष रूप से दिखाई देती है।

पहली बार इन्फ्रारेड में नेपच्यून की तस्वीर
टेलीस्कोप से भेजी की गई नेप्च्यून की ताजा तस्वीरें खास हैं। नेप्च्यून सिस्टम विशेषज्ञ हेइडी हैमेल ने नासा के एक ब्लॉग में कहा, "तीन दशक हो गए हैं जब हमने पिछली बार इन धुंधले, धूल भरे छल्लों को देखा था, और यह पहली बार है जब हमने उन्हें इन्फ्रारेड में देखा है।" 1846 नेपच्यून की खोज के बाद इस ग्रह ने शोधकर्ताओं को आकर्षित किया। ये ग्रह यह पृथ्वी से सूर्य की तुलना में 30 गुना दूर स्थित है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) नासा के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग से लांच किया गया थी। इससे भेजी गई स्पेस में मौजूद ग्रहों, आकाशगंगाओं आदि की तस्वीरों काफी स्पष्ट होती हैं।












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