'जान बचाने के लिए वो दो-दो मंजिल से लगा रहे थे छलांग'
काबुल। मौत को सामने खड़ा देख इंसान को अपनी जान बचाने के लिए जो भी सूझता है, वह उसे करने से नहीं कतराता। कुछ ऐसा ही हुआ था काबुल की अमेरिकी यूनिवर्सिटी पर हुए हमले में। बुधवार की शाम को हुए इस हमले में 7 छात्र, तीन सुरक्षाकर्मी, दो सुरक्षा बल के जवान और एक प्रोफेसर की मौत हो गई है।

हमले में बहुत से लोग अपनी जान बचाने में कामयाब रहे, लेकिन वे किसी हाल में हैं अब ये भी जान लीजिए। जब आतंकी यूनिवर्सिटी में घुसे तो वे अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे। अपनी जान बचाने के लिए लोग खिड़कियों से कूद कर भाग रहे थे।
कई छात्रों की टूट गईं टांगें
आपको यह सुनकर थोड़ी हैरानी हो सकती है, लेकिन अपनी जान बचाने के चक्कर में बहुत से लोगों की टांगें टूट गईं। छात्र खुद की जान बचाने के लिए दो-दो मंजिल ऊपर से ही जमीन पर कूद रहे थे।
खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे अब्दुल्लाह फाहिमी ने बताया कि अपनी जान बचाने के लि तो कई छात्र दूसरी मंजिल से भी कूद गए। अपनी जान बचाने की इस जद्दोजहद में कई छात्रों के पैर टूट गए तो कइयों के सिर में गंभीर चोट आई। आपको बता दें कि अब्दुल्लाह फाहिमी के भी पैर में चोट लगी है।
कैसे हुआ ये हमला
बुधवार की शाम को कुछ आतंकियों ने काबुल की एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी पर हमला बोल दिया था। इस हमले में छात्रों और एक प्रोफेसर समेत कुल मिलाकर 13 लोगों की मौत हो गई थी।
यूनिवर्सिटी में घुसते ही आतंकवादियों ने गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। गोलियां बरसाते हुए ही वह सीधे स्टाफ और लोगों के लिए रुकने वाले कॉम्प्लैक्स में घुस गए।
बुधवार रात को हुए इस हमले पर कार्रवाई अगले दिन गुरुवार को खत्म हुई, जब सुरक्षा बलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। इस हमले की जिम्मेदारी अफगान तालिबान और इस्लामिक स्टेट की एक स्थानीय इकाई ने ली है।
पाकिस्तान में रची गई थी हमले की साजिश
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस हमले पर कहा है कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि यह हमला पाकिस्तान में रचा गया था। वहीं अशरफ गनी ने कहा है कि यह हमला कायरता से भरा हुआ था। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान पर हमले करने के लिए आतंकी पाकिस्तानी धरती को अपना हथियार बना रहे हैं।












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