Greenland Crisis: 'फायर ब्रिगेड आएगी इसलिए पहले ही घर जला लें', फ्रांस के राष्ट्रपति ने ट्रंप का उड़ाया मजाक
Greenland Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मन में ग्रीनलैंड को लेकर लालच अब जगजाहिर है। जिसके वजह से NATO के सहयोगी देश फ्रांस ने ट्रंप का खुलकर मजाक उड़ाया। दरअसल अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ट्रंप के ग्रीनलैंड को कब्जा करने वाले जुनून को सही ठहराने की कोशिश की, जिस पर फ्रांस ने बिना देर किए वाशिंगटन डीसी का मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया।
आर्कटिक में रूस का डर, ट्रंप का बचाव
रविवार को दिए एक इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने 79 वर्षीय डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड प्लान का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का फोकस भविष्य में आर्कटिक क्षेत्र से रूस की ओर से आने वाले खतरों पर है। बेसेंट ने कहा- "आने वाले समय में आर्कटिक के लिए लड़ाई पूरी तरह वास्तविक है। हम अपनी नाटो (NATO) सुरक्षा गारंटी बनाए रखेंगे। अगर रूस या किसी और ने ग्रीनलैंड पर हमला किया, तो अमेरिका को इसमें घसीटा जाएगा।"

'ताकत के ज़रिए शांति' का ट्रंप फॉर्मूला
बेसेंट ने आगे कहा कि संघर्ष से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि ग्रीनलैंड को पहले ही अमेरिका का हिस्सा बना लिया जाए। उनके शब्दों में "अभी बेहतर है कि ताकत के माध्यम से शांति स्थापित की जाए। अमेरिका इस वक्त दुनिया का सबसे 'हॉट' और ताकतवर देश है। यूरोप कमज़ोरी दिखाता है, जबकि अमेरिका ताकत का प्रदर्शन करता है।"
फ्रांस का तंज: पहले घर ही जला दो!
इस बयान के तुरंत बाद फ्रांस ने सोशल मीडिया पर जोरदार पलटवार किया। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक अकाउंट 'French Response' ने ट्रंप प्रशासन की दलीलों का मज़ाक उड़ाते हुए व्यंग्यात्मक ट्वीट किया।
ट्वीट में लिखा गया:
"अगर आग लगे तो फायर ब्रिगेड आएगी - तो बेहतर है पहले ही घर जला दें।
अगर शार्क हमला करे - तो बेहतर है पहले ही लाइफगार्ड को खा लें।
अगर दुर्घटना होगी - तो नुकसान होगा - तो बेहतर है अभी कार टकरा दें।"
EU की चेतावनी
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्कुर ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की किसी भी कोशिश से अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापारिक और आर्थिक रिश्ते खतरे में पड़ सकते हैं। लेस्कुर ने साफ कहा- "ग्रीनलैंड एक संप्रभु देश का संप्रभु हिस्सा है और वह यूरोपीय संघ का हिस्सा है। इसके साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।"
तनाव के बावजूद सहयोग की बात
हालांकि, लेस्कुर ने यह भी कहा कि तनाव के बावजूद कुछ साझा प्राथमिकताओं पर अमेरिका के साथ मिलकर काम करना ज़रूरी है। खासतौर पर चीन पर रेयर अर्थ मिनरल्स की निर्भरता कम करने के लिए G7 में फ्रांस के नेतृत्व वाली पहल का उन्होंने ज़िक्र किया। गौरतलब है कि 27 देशों वाला यूरोपीय संघ अमेरिका के साथ अब तक का सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध साझा करता है। वाशिंगटन, EU का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है।
ट्रंप का टैरिफ वार: यूरोप पर 10% टैक्स
ग्रीनलैंड विवाद के बीच ट्रंप ने बड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए ऐलान किया कि 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क और फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड पर समझौता नहीं हुआ, तो 1 जून से यह टैरिफ 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाएगा।
'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप का हमला
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'Truth Social' पर लिखा कि अमेरिका सदियों से यूरोप को "सब्सिडी" देता आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब जब "विश्व शांति दांव पर है", तो डेनमार्क के लिए "वापस देने" का समय आ गया है।
मैक्रॉन का दो टूक जवाब
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने ट्रंप की धमकियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा- "कोई धमकी और कोई डर यूरोपीय संघ को न यूक्रेन में, न ग्रीनलैंड में और न ही दुनिया में कहीं और झुका सकता है।"
डेनमार्क के साथ खड़ा हुआ यूरोप
आठ यूरोपीय देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर "डेनमार्क राज्य और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूरी एकजुटता" व्यक्त की। इसके बाद मैक्रॉन द्वारा आपातकालीन बातचीत के बाद, यूरोपीय संघ ने ट्रंप के टैरिफ के जवाब में अपने सबसे सख्त हथियार के इस्तेमाल पर विचार शुरू कर दिया।
क्या है EU का 'ट्रेड बजाका'?
यूरोपीय संघ जिस 'ट्रेड बजाका' की बात कर रहा है, वह असल में Anti-Coercion Instrument (ACI) है। यह एक ऐसा तंत्र है जिसे EU ने गैर-सदस्य देशों के आर्थिक दबाव का जवाब देने और अपने हितों की प्रभावी रक्षा के लिए तैयार किया है।
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