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पाकिस्तान में फिर लड़कियों की पढ़ाई पर हमला, बम से उड़ाया बच्चियों का स्कूल

School bombing Pakistan: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में एक बार फिर लड़कियों की शिक्षा पर हमला हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू ज़िले में एक निर्माणाधीन बालिका विद्यालय को आतंकियों ने विस्फोटक से उड़ा दिया। यह हमला उस कट्टरपंथी सोच को उजागर करता है, जो अब भी आधुनिक शिक्षा, विशेषकर लड़कियों की पढ़ाई के खिलाफ ज़हर उगल रही है।

हालाँकि स्कूल में उस वक्त कोई मौजूद नहीं था, जिससे जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने क्षेत्र में डर का माहौल जरूर बना दिया है। पाकिस्तान के ऐसे इलाकों में, जहां पहले ही महिला शिक्षा को लेकर सामाजिक चुनौतियां मौजूद हैं, इस तरह के आतंकी हमले हालात को और जटिल बना देते हैं। यह घटना केवल एक स्कूल की दीवारें ढहाने की कोशिश नहीं थी, बल्कि एक पूरे भविष्य को दबाने की साज़िश थी।

Girls education attacked again in Pakistan

शिक्षा पर हमला, विकास को बाधित करने की साज़िश

स्थानीय अधिकारियों ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्र में शैक्षणिक विकास को पटरी से उतारने की कोशिश बताया है। ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2007 से 2017 के बीच पाकिस्तान के आदिवासी इलाकों में 1,100 से अधिक बालिका विद्यालयों को नष्ट किया जा चुका है। इन हमलों में शिक्षकों और छात्राओं को भी निशाना बनाया गया।

TTP की फिर से वापसी की कोशिश

2014 में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों द्वारा शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन से पहले, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात सहित कई जिलों में सैकड़ों बालिका विद्यालयों पर हमले किए थे। ऑपरेशन के बाद, TTP के आतंकी अफगानिस्तान भाग गए थे और वहाँ से सीमा पार हमलों को अंजाम देने लगे।

2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद TTP एक बार फिर से सक्रिय हो गया है और अपने पूर्व गढ़ों पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहा है। अफगान तालिबान की तरह ही TTP भी एक कट्टर इस्लामी एजेंडे को पाकिस्तान के आदिवासी इलाकों में लागू करना चाहता है।

महिलाओं की शिक्षा के खिलाफ कट्टरपंथी रवैया

तालिबान ने अफगानिस्तान में छठी कक्षा के बाद लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया है और महिलाओं के विश्वविद्यालय जाने पर भी रोक है। इसी तरह TTP पाकिस्तान में भी लड़कियों की शिक्षा के खिलाफ अभियान चला रहा है।

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मलाला यूसुफजई का उदाहरण

स्वात ज़िले की ही रहने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को 2012 में उस समय सिर में गोली मार दी गई थी जब वह मात्र 14 साल की थीं और शिक्षा हासिल करना चाहती थीं। यह हमला TTP के आतंकियों ने किया था। इस घटना ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था और आज भी यह पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की लड़ाई का प्रतीक है।

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