Meloni Election Plan: सत्ता बचाने के लिए मेलोनी का मास्टर स्ट्रोक! चुनाव से छेड़छाड़ के लगे आरोप, क्या किया?

Meloni Election Plan: इटली की राजनीति में आने वाले महीनों में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। देश की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी एक बड़े फैसले पर विचार कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेलोनी अगले साल यानी 2027 के आखिर में होने वाले चुनावों को समय से पहले कराने के मूड में हैं। लेकिन मेलोनी ऐसा कर क्यों रही हैं इसकी वजह दिलचस्प है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेलोनी को आशंका है कि यदि चुनाव काफी समय तक टाले गए, तो उनकी लोकप्रियता में और गिरावट आ सकती है। ऐसे में वह जनता से नया जनादेश लेने के लिए जल्द चुनाव कराने का जोखिम उठाने पर विचार कर रही हैं।

Meloni Election Plan

राष्ट्रपति कार्यालय के साथ शुरू हुई चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, इस संभावित चुनावी योजना को आगे बढ़ाने के लिए मेलोनी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला के कार्यालय के साथ प्रारंभिक स्तर पर बातचीत शुरू कर दी है। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इटली के संविधान के तहत संसद को भंग करने और समय से पहले चुनाव कराने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास होता है। यदि राष्ट्रपति मैटारेला इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो देश में नई चुनावी प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इससे इटली का राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल सकता है और सभी दल चुनावी मोड में आ सकते हैं। इसी वजह से मेलोनी पर चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने के आरोप भी लग रहे हैं।

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जनमत संग्रह में हार के बाद बढ़ा दबाव

पिछले कुछ महीने जॉर्जिया मेलोनी सरकार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं। इसी साल मार्च में न्याय व्यवस्था में सुधार से जुड़े एक महत्वपूर्ण जनमत संग्रह में उनकी सरकार को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। इस हार को मेलोनी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सरकार के तीन प्रमुख मंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर बना हुआ है। वहीं गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के भीतर भी असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

अपनी ही विचारधारा वाले दलों से मिल रही चुनौती

मेलोनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से नहीं बल्कि उनके अपने दक्षिणपंथी राजनीतिक खेमे से आ रही है। हाल के ओपिनियन पोल्स में धुर दक्षिणपंथी 'नेशनल फ्यूचर' पार्टी की लोकप्रियता में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस पार्टी का आरोप है कि मेलोनी ने अपनी मूल दक्षिणपंथी विचारधारा से समझौता कर लिया है और अब वह खुद को एक नरम या सेंट्रिस्ट नेता के रूप में पेश कर रही हैं। इसी वजह से दक्षिणपंथी वोट बैंक का एक हिस्सा उनसे दूर होता नजर आ रहा है, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है।

इतिहास रचने के करीब हैं जॉर्जिया मेलोनी

राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद मेलोनी के पास एक बड़ा रिकॉर्ड बनाने का मौका भी है। यदि वह सितंबर की शुरुआत तक प्रधानमंत्री पद पर बनी रहती हैं, तो वह इटली गणराज्य के 80 साल के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली प्रधानमंत्री बन जाएंगी। फिलहाल यह रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री और दिवंगत नेता Silvio Berlusconi के नाम दर्ज है। मेलोनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से केवल कुछ कदम दूर हैं।

आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ा रही हैं मेलोनी की परेशानी

राजनीतिक दबाव के अलावा इटली की आर्थिक स्थिति भी सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। बढ़ती महंगाई, आर्थिक चुनौतियां और मध्यम वर्ग की नाराजगी सरकार की लोकप्रियता को प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मेलोनी समझती हैं कि यदि वह मौजूदा हालात में पूरा कार्यकाल पूरा करने की कोशिश करती हैं, तो विपक्ष को सरकार की कमियों को उजागर करने का ज्यादा समय मिल जाएगा। यही वजह है कि वह जल्दी चुनाव कराने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।

ट्रंप के साथ विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

घरेलू चुनौतियों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के साथ हुआ विवाद भी मेलोनी के लिए नई मुश्किल बन गया है। हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 Summit के बाद दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। इस विवाद ने इटली की राजनीति में नई बहस छेड़ दी और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मौका दे दिया।

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ट्रंप के बयान पर मेलोनी का जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि जी-7 सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए कई बार अनुरोध किया था। उन्होंने यह भी कहा कि मेलोनी की लोकप्रियता लगातार गिर रही है क्योंकि उन्होंने ईरान के परमाणु सुरक्षा मुद्दे पर अमेरिका का खुलकर समर्थन नहीं किया। मेलोनी ने इन आरोपों का तुरंत जवाब दिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता के समर्थन पर निर्भर नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र लक्ष्य इटली के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।

कैबिनेट का मिला पूरा समर्थन

ट्रंप के बयानों के बाद मेलोनी की पूरी कैबिनेट उनके समर्थन में उतर आई। कई मंत्रियों ने इसे इटली के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया। विवाद इतना बढ़ गया कि इटली के विदेश मंत्री ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा भी रद्द कर दी। सरकार के नेताओं ने साफ कहा कि वे किसी भी विदेशी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।

क्या सफल होगा मेलोनी का चुनावी दांव?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समय से पहले चुनाव कराने का मेलोनी का दांव सफल होगा। वह इस कदम के जरिए जनता और विरोधियों दोनों को यह संदेश देना चाहती हैं कि उनकी राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत है। हालांकि यह फैसला काफी जोखिम भरा माना जा रहा है। यदि चुनावी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, तो मेलोनी का राजनीतिक भविष्य पूरी तरह बदल सकता है। फिलहाल इटली की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां आने वाले कुछ महीने तय करेंगे कि जॉर्जिया मेलोनी अपनी सत्ता को और मजबूत करेंगी या देश एक नए राजनीतिक दौर में एंट्री लेगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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