Hormuz Crisis: क्या बदलने वाला है हॉर्मुज का कंट्रोल? ईरान और ओमान ने शुरू की नई डील! कौन लगाएगा टोल?

Hormuz Crisis: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी युद्ध और युद्ध के बाद की बातचीत के बीच अचानक कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक तरफ ओमान और ईरान दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक हॉर्मुज स्ट्रेट के नए प्रशासनिक ढांचे पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ लेबनान और इजरायल के बीच वाशिंगटन में नए दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है।

इन दोनों बड़े घटनाक्रमों के साथ ईरान ने यह भी पुष्टि की है कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ उसकी तकनीकी स्तर की बातचीत पूरी हो चुकी है। इन सभी कोशिशों का मकसद क्षेत्र में जारी तनाव को कम करना और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को सुरक्षित बनाए रखना है। यही वजह है कि दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इन सभी बातचीत के दौरों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

Hormuz Crisis

स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका में क्या बात हुई?

ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही तकनीकी बातचीत अब समाप्त हो गई है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक दोनों देशों ने अपने लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए चार अलग-अलग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई है। माना जा रहा है कि यह कदम भविष्य की औपचारिक वार्ताओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

इन चार कार्य ग्रुपों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। पहला समूह अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पर काम करेगा। दूसरा समूह न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़े मुद्दों को देखेगा। तीसरा समूह आर्थिक विकास और दोबारा निर्माण के मुद्दों पर चर्चा करेगा, जबकि चौथा समूह भविष्य में होने वाले समझौतों की निगरानी और उनके पालन को सुनिश्चित करने का काम करेगा। हालांकि इसके साथ ही ईरान ने एक सख्त संदेश भी दिया है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को उन न्यूक्लियर सेंटर का दौरा नहीं करने देगा, जिन्हें हालिया सैन्य हमलों के दौरान निशाना बनाया गया था। इससे पारदर्शिता और निगरानी को लेकर नए विवाद पैदा हो सकते हैं।

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हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और ओमान की नई बातचीत

एक और बातचीत में ईरान और ओमान ने हॉर्मुज स्ट्रेट के प्रशासन और संचालन को लेकर नई बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने कहा है कि यह बातचीत मुख्य रूप से उनके विदेश मंत्रालयों के जरिए आगे बढ़ाई जाएगी।

इस प्रस्तावित बातचीत में हॉर्मुज जलमार्ग से जुड़े अन्य देशों और हितधारकों को भी शामिल किया जाएगा। चर्चा का मुख्य फोकस समुद्री सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, Technical Sea Facility Services और इनके मेंटेनेंस की लागत तय करने पर रहेगा। दोनों देशों ने यह भी कहा है कि किसी भी नए समझौते में उनकी समुद्री संप्रभुता और अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाएगा।

क्यों इतना महत्वपूर्ण है हॉर्मुज स्ट्रेट?

हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया भर में होने वाले तेल और गैस निर्यात का बड़ा हिस्सा रोजाना इसी रास्ते से गुजरता है। यही कारण है कि इस समुद्री रास्ते में किसी भी प्रकार की रुकावट का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और तेल-गैस की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसलिए इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

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क्या कूटनीति से मिलेगा स्थायी समाधान?

हालांकि इससे पहले भी दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी युद्धविराम या बड़ा समझौता नहीं हो सका है। इसके बावजूद दोनों पक्षों का एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटना पॉजिटिव साइन माना जा रहा है। देखना होगा कि बातचीत के बाद होर्मुज का कंट्रोल किसके पास और किन शर्तों के साथ जाता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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