Gaza Ceasefire: गाजा में हुआ युद्धविराम, नेतन्याहू भी माने, फिर भी अमेरिकी मुसलमान बाइडेन से क्यों हैं गुस्सा?
Israel Hamas Ceasefire Agreement Update: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को घोषणा की है, कि उगाजा में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए एक समझौता किया गया है, जो लंबे समय से प्रतीक्षित युद्धविराम को अंतिम रूप देने में अंतिम क्षणों की बाधाओं को पार करता है, जो 15 महीने के क्रूर संघर्ष को रोक देगा।
उनके बयान से पहले युद्धविराम वार्ता के फेल होने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन प्रधानमंत्री नेतन्याहू की घोषणा के बाद अब तय हो गया है, कि गाजा में युद्धविराम का रास्ता साफ हो गया है।

युद्धविराम समझौते के तहत लड़ाई में अस्थायी रोक का प्रावधान है और हमास की कैद से इजराइली बंधकों की रिहाई के बदले इजराइल, इजराइली जेल में बंद सैकड़ों फिलीस्तीनियों को रिहा करने के लिए तैयार हो गया है। इसके अलावा, इस समझौते के तहत युद्धग्रस्त गाजा पट्टी से विस्थापित लोगों के लिए भी अपने घरों में फिर से लौटने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, अब गाजा पट्टी में मानवीय सहायता भी पहुंचाया जाएगा।
युद्धविराम का ये समझौता रविवार से लागू होने वाला है, लेकिन उससे पहले गुरुवार को भी इजराइली सेना ने गाजा पट्टी में भारी बमबारी की है, जिसमें 72 फिलीस्तीनियों के मारे जाने की रिपोर्ट आई है। जिससे 15 महीनों से चल रहे इस युद्ध में मरने वालों की संख्या में और इजाफा होने की आशंका है।
युद्धविराम से बाइडेन के खिलाफ गुस्सा क्यों भड़का? (Gaza Ceasefire)
युद्धविराम की घोषणा के साथ ही अमेरिका में रहने वाले अरब देशों के मुस्लिमों में राष्ट्रपति जो बाइडेन के खिलाफ गुस्सा भड़क उठा है। अरब देशों के कई मुस्लिम वोटरों ने 5 नवंबर को हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ये सोचकर ही डोनाल्ड ट्रंप को वोट डाला था, कि ट्रंप के शासनकाल में ही गाजा में युद्धविराम की एक प्रतिशत भी संभावना है और उनका मानना था, कि बाइडेन की तुलना में ट्रंप, युद्ध रोकने के लिए एक बेहतर विकल्प साबित होंगे और डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को शपथ लेने से पहले ही वो रेस जीत ली है।
डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को व्हाइट हाउस में प्रवेश करने वाले हैं और उनके शासनकाल की शुरूआत होने से पबले ही इजराइल और हमास के बीच जंग खत्म होने का समझौता हो गया है, जहां पिछले 15 महीनों से चल रहे युद्ध में 46 हजार 700 से ज्यादा लोग मारे गये हैं।
अमेरिकी मुस्लिमों का मानना है, कि जो बाइडेन, जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, वो इस युद्ध को रोकने में पूरी तरह से नाकामयाब रहे हैं।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट में एक मुस्लिम वोटर लुकमान ने कहा है, कि "मैं और भी ज्यादा नाराज हूं, क्योंकि ट्रंप, जो पद पर भी नहीं हैं, उन्होंने थोड़ा दबाव डाला और युद्धविराम समझौता तुरंत हो गया। यह पहले भी हो सकता था। यह बहुत दुखद है, इतनी सारी जानें चली गईं।"
पिछले चुनावों में डेमोक्रेट्स का भारी समर्थन करने के बाद, कई अरब अमेरिकी मतदाता नवंबर के चुनाव में पार्टी और उसकी उम्मीदवार, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के खिलाफ हो गए, क्योंकि उन्होंने इजराइल के युद्ध का समर्थन किया था।
जबकि कई अरब मतदाताओं का कहना है, कि नाजुक युद्धविराम समझौते का जश्न मनाना अभी जल्दबाजी होगी, वे इस बात पर जोर देते हैं, कि ट्रंप के हस्तक्षेप से पता चलता है, कि कमला हैरिस को वोट नहीं देना, उनका सही फैसला था।
आपको बता दें, कि स्विंग स्टेट मिशिगन में अरब मुस्लिम वोटरों ने अहम भूमिका निभाई है।
डेट्रॉयट उपनगर डियरबॉर्न के पूर्वी हिस्से में, जहां मुस्लिमों की काफी आबादी है, वहां कमला हैरिस को 20 प्रतिशत से भी कम वोट मिले। ज्यादातर निवासियों ने या तो डोनाल्ड ट्रंप को या ग्रीन पार्टी के उम्मीदवार जिल स्टीन के लिए अपने वोट डाले। जबकि कमला हैरिस ने तर्क दिया है, कि वह और बाइडेन, गाजा में युद्ध विराम हासिल करने के लिए "अथक" काम कर रहे थे।
हालांकि, कमला हैरिस ने बिना किसी शर्त के इजराइल को हथियारों की सप्लाई करने का भी वादा किया था।
बाइडेन प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चार प्रस्तावों को भी वीटो कर दिया था,जो गाजा में युद्ध विराम का आह्वान करते।
युद्धविराम में डोनाल्ड ट्रंप का कितना योगदान? (Gaza Ceasefire Donald Trump)
मिशिगन के हैमट्रैक के यमन अमेरिकी मेयर अमीर गालिब उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने पिछले साल ट्रंप का समर्थन किया था, यहां तक कि उनकी रैलियों में भी शामिल हुए थे।
अलजजीरा की रिपोर्ट में उन्होंने बताया है, कि गाजा में युद्ध विराम पर बातचीत करना पूर्व राष्ट्रपति के अरब और मुस्लिम समर्थकों की शीर्ष मांग थी।
उन्होंने कहा, कि "हमने उनका (ट्रंप का) समर्थन किया और युद्ध विराम, शांति, इस्लामोफोबिया से लड़ने, उनके प्रशासन में मुसलमानों के लिए उचित प्रतिनिधित्व और आस्था और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने और हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित शिक्षा की मांग की। उन्होंने अपने हर वादे को पूरा करने के लिए आगे बढ़ने के कुछ संकेत दिखाए हैं।"
बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप और बाइडेन, दोनों ने युद्ध विराम समझौते का श्रेय लिया है, जिसमें ट्रंप ने जोर देकर कहा, कि अगर वह नवंबर में चुनाव नहीं जीतते, तो यह "महाकाव्य" समझौता नहीं हो पाता। हालांकि, पर्दे के पीछे की कूटनीति में ट्रंप की भूमिका कितनी थी, इसका आकलन करना काफी मुश्किल है।
लेकिन कई इजराइली मीडिया रिपोर्टों ने संकेत दिया है, कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को समझौते पर सहमत कराने में डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका निर्णायक थी, जिसके परिणामस्वरूप गाजा में इजराइली बंदी और इजरायल द्वारा पकड़े गए सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई होगी।
ट्रंप ने पिछले हफ्ते कतर में मध्यस्थों और इजराइल में नेतन्याहू से मिलने के लिए अपने दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा था।
गुरुवार को, अमेरिका के भावी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायली रिपोर्टों की पुष्टि करते हुए कहा, कि विटकॉफ ने नेतन्याहू को समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर टाइम्स ऑफ इजराइल के एक लेख को साझा किया, जिसमें एक अज्ञात अरब अधिकारी के हवाले से कहा गया था, कि "ट्रंप के दूत ने एक बैठक में नेतन्याहू को इतना प्रभावित किया, जितना कि बाइडेन ने पूरे साल में नहीं किया।"
आपको बता दें, कि कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी ने बुधवार को समझौते की घोषणा करते समय विटकॉफ का नाम लेकर धन्यवाद किया था।
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