G7 Summit 2025: इजरायल-ईरान तनाव के बीच G-7 समिट का आगाज, अहम होगी भारत की भूमिका
G7 2025: कनाडा में जब दुनिया की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं के नेता इकट्ठा हुए, तो उम्मीद थी कि वैश्विक विकास, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर बड़ी बातें होंगी। लेकिन इस बार का जी-7 शिखर सम्मेलन एक अलग ही माहौल में शुरू हुआ है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और वैश्विक अस्थिरता ने इस बैठक की दिशा ही बदल दी है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने तो इस बार सम्मेलन के अंत में कोई संयुक्त बयान जारी न करने का फैसला लिया है। ट्रंप जहां फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने अंदाज में लौटे हैं, वहीं भारत, ब्राजील और यूक्रेन जैसे आमंत्रित देशों की मौजूदगी ने समिट को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। खासतौर पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

कनाडा में शुरू हुआ जी-7 समिट
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के नेता रविवार को कनाडा के रॉकी पर्वत क्षेत्र में पहुंचे। यहां जी-7 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई। हालांकि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियां वैश्विक चिंता का कारण बन गई हैं।
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इजरायल-ईरान टकराव ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। यह टकराव दुनिया के कई नेताओं के लिए चौंकाने वाला रहा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप ने इजरायल के उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने की योजना थी। इससे यह साफ हुआ कि इजरायल कितना बड़ा कदम उठाने को तैयार था।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कूटनीतिक कोशिशें
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत कर तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर समिट में गहन वार्ता जारी रहेगी।
संयुक्त बयान नहीं जारी करेगा कनाडा
जी-7 की मेजबानी कर रहे कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस बार समिट के अंत में संयुक्त घोषणा पत्र जारी न करने का फैसला लिया है। ट्रंप की टैरिफ नीति पर चर्चा के चलते समिट का फोकस सामूहिक बातचीत से हटकर व्यक्तिगत बैठकों की ओर जाता दिख रहा है।
भारत समेत कई देश आमंत्रित
इस समिट में जी-7 सदस्य देशों के अलावा भारत, यूक्रेन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको और यूएई के राष्ट्राध्यक्षों को भी आमंत्रित किया गया है। इन देशों के लिए भी टैरिफ से बचाव प्रमुख एजेंडा बना रहेगा।
ट्रंप और जेलेंस्की की अहम मुलाकात
यूक्रेन युद्ध भी इस बैठक का प्रमुख मुद्दा रहेगा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की इस समिट में हिस्सा लेने पहुंचे हैं और उनकी ट्रंप से मुलाकात भी तय मानी जा रही है। यह वही नेता हैं जिनके बीच पिछली मुलाकात वॉशिंगटन में विवादों में घिर गई थी।
अब आगे क्या?
समिट के पहले दिन ट्रंप और कार्नी की द्विपक्षीय बैठक के बाद पूरा कार्यक्रम शुरू होगा। हालांकि, इजरायल-ईरान तनाव और व्यापारिक टकराव की वजह से यह शिखर सम्मेलन उम्मीद के मुताबिक सामूहिक ताकत का प्रदर्शन बन पाएगा या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।
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