Delhi Health Scam Row: दिल्ली स्वास्थ्य घोटाले की आंच, सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी से पूछा सवाल
Delhi Health Scam Row: दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। बीजेपी द्वारा लगाए गए करीब 650 करोड़ रुपये के कथित स्वास्थ्य घोटाले के आरोपों पर पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने विपक्षी दल के सामने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर बीजेपी के दावों के मुताबिक वर्तमान स्वास्थ्य संकट और कथित अनियमितताओं के लिए डॉ. वत्सला अग्रवाल जिम्मेदार हैं, तो फिर उन्हें स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के महत्वपूर्ण पद पर किसने बैठाया था?
बीजेपी नेताओं की संलिप्तता का आरोप
इस राजनीतिक विवाद को नया मोड़ देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने डॉ. वत्सला अग्रवाल की पृष्ठभूमि और उनके संपर्कों पर निशाना साधा है। उन्होंने बीजेपी नेता रेखा गुप्ता और डॉ. वत्सला अग्रवाल के बीच के कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं। भारद्वाज ने पूछा कि इन दोनों के बीच का वास्तव में क्या रिश्ता है और इसकी जांच क्यों नहीं की जा रही है?
आप नेता ने इस पूरे कथित घोटाले के सबसे अहम किरदार और कथित मास्टरमाइंड राजीव रंगीला के देश से बाहर जाने के मामले पर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि आखिर किस व्यवस्था या अधिकारियों ने इस मुख्य आरोपी को कानून की पहुंच से दूर भागने का सुरक्षित अवसर मुहैया कराया?
AAP ने BJP से पूछा-अधिकारियों की जवाबदेही और LG का अधिकार क्षेत्र
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का मुद्दा हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। आम आदमी पार्टी का तर्क है कि दिल्ली सरकार के पास अधिकारियों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है क्योंकि सेवाओं का पूरा जिम्मा केंद्र सरकार और उपराज्यपाल के अधीन है। सौरभ भारद्वाज का यह हमला भी इसी प्रशासनिक व्यवस्था की तरफ इशारा करता है, जहां वे अधिकारियों के गलत निर्णयों के लिए अंततः नियुक्त करने वाली अथॉरिटी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर बीजेपी और आप के बीच चल रहा यह तीखा संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है। दोनों ही दल एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में किस दिशा में आगे बढ़ती हैं और इन गंभीर राजनीतिक सवालों के क्या कानूनी जवाब सामने आते हैं।













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