'विधायक का बेटा है और घमंड', अब PM मोदी ने पत्रकार का पोस्ट शेयर कर बताया नितिन नबीन कौन है?
PM Modi and Nitin Nabin: राजनीति में कब कौन सा मुद्दा सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा ट्रेंड बन जाए, यह कहना मुश्किल है। लखनऊ में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुई जुबानी जंग अब देश के सबसे बड़े नेताओं के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर सिर्फ तीन शब्द लिखे- 'आप कौन हैं?'।
इस एक सवाल के बाद इंटरनेट पर मानो सैलाब आ गया। बीजेपी के दिग्गज नेता से लेकर आम लोग तक यह बताने में जुट गए कि आखिर नितिन नबीन कौन हैं। लेकिन इस पूरे ट्रेंड ने तब सबसे बड़ा मोड़ ले लिया जब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पत्रकार की लिखी भावुक पोस्ट को शेयर कर नितिन नबीन की सादगी की तारीफ की।

केजरीवाल के एक सवाल से कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत लखनऊ के एक कार्यक्रम से होती है। बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने विपक्ष के बड़े चेहरों- राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सनातन धर्म को इतना कमजोर समझने की भूल कोई न करे कि लोग बहकावे में आ जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब हिंदू देवी-देवताओं का अपमान होता है, तब ये नेता चुप्पी साध लेते हैं। देश की जनता अपनी विरासत का अपमान कभी स्वीकार नहीं करेगी क्योंकि इसके लिए पुरखों ने कुर्बानियां दी हैं।
बीजेपी ने जैसे ही नितिन नबीन के इस बयान को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, अरविंद केजरीवाल ने उस पर रीपोस्ट करते हुए लिख दिया, 'आप कौन हैं?'। बस, केजरीवाल का यह अंदाज बीजेपी नेताओं और समर्थकों को नागवार गुजरा। इसके बाद सोशल मीडिया पर नितिन नबीन के परिचय और उनके सफर को बताने की होड़ लग गई।
पत्रकार दोस्त पीयूष पद्माकर ने बताया नितिन नबीन कौन हैं? PM मोदी ने शेयर कर की तारीख
इस पूरे ट्रेंड के बीच नितिन नबीन के कॉलेज के दिनों के साथी और जाने-माने पत्रकार पीयूष पद्माकर ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और आंखें खोल देने वाली पोस्ट लिखी। पीयूष ने उन दिनों को याद किया जब नितिन नबीन राजनीति के शिखर पर नहीं, बल्कि दिल्ली की सड़कों पर एक आम छात्र की तरह संघर्ष कर रहे थे।
पत्रकार पीयूष पद्माकर लिखते हैं कि यह कहानी साल 1998 की है, जब वे दोनों दिल्ली में 12वीं पास करने के बाद कॉलेज में एडमिशन के लिए भागदौड़ कर रहे थे। नितिन ने अपनी स्कूली पढ़ाई सीएसकेएम (CSKM) से की थी और पीयूष केंद्रीय विद्यालय के छात्र थे। पीयूष के मुताबिक, नितिन के पिता बिहार में एक कद्दावर विधायक थे, लेकिन नितिन के भीतर इस बात का रत्ती भर भी घमंड नहीं था। मई और जून के तपते महीनों में दोनों दोस्त दिल्ली के एक छोटे से कमरे में साथ रहते थे।
जब ₹10 बचाने के लिए शेयर करते थे ₹20 की हाफ थाली
पीयूष पद्माकर की पोस्ट में नितिन नबीन की जो सादगी सामने आई, उसने हर किसी का दिल जीत लिया। उन्होंने बताया कि विधायक का बेटा होने के बावजूद नितिन बेहद किफायती जिंदगी जीते थे। उन्होंने लिखा कि पैसे बचाने के लिए दोनों दोस्त दोपहर के लंच में मिलने वाली महज 20 रुपये की एक थाली मंगाते थे और उसे आपस में आधा-आधा शेयर करते थे ताकि 10 रुपये की बचत हो सके।
दिल्ली में कहीं भी आने-जाने के लिए वे ऑटो या टैक्सी का खर्च नहीं उठाते थे, बल्कि डीटीसी (DTC) बसों के धक्के खाते थे ताकि ऑटो का किराया बच सके। उस दौर में 50 रुपये से ऊपर खर्च होने वाली टैक्सी का नाम लेना भी उनके लिए बड़ी बात थी।
पीयूष बताते हैं कि जब कभी उनके कमरे पर छह-सात दोस्त आ जाते थे, तो नितिन और वे मिलकर बजट का गणित बिठाने लगते थे कि कम से कम पैसों में सबको खाना कैसे खिलाया जाए। नितिन ने कभी अपनी रसूखदारी का दिखावा नहीं किया।

पत्रकार दोस्त पीयूष लिखते हैं,
''नितिन नबीन कौन ? नितिन कैसे यहां तक पहुंचे ? क्या नितिन की तरह कोई और भी 45 साल में बीजेपी अध्यक्ष बन सकता है? नितिन ने आज लखनऊ में अपनी पॉलिटिकल जर्नी के बारे में कुछ बातें बीजेपी नेताओं को बताई। नितिन ने जो बातें नहीं बताई वो बताता हूं। ये कहानी साल 1998 से शुरू होती है। मैं और नितिन दोनों दिल्ली में ही पढ़ते थे। दोनों ने बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। वो CSKM में पढ़ता था और मैं केंद्रीय विद्यालय में। नितिन के पिताजी विधायक थे लेकिन मुझे बहुत मानते थे। 1998 के मई और जून के महीने में मैं और नितिन साथ एक ही कमरे में रहते थे। 12वीं पास होने के बाद हम दिल्ली के अलग अलग कॉलेज में दाखिले की दौड़ में शामिल हुए थे। नितिन विधायक का बेटा था लेकिन घमंड एक पैसे का नहीं। लंच में बीस रुपये की थाली हम शेयर करते थे ताकि दस रुपये बच सके। डीटीसी बस में चलते थे, ताकि ऑटो का किराया बच सके। टैक्सी ले लें, इतनी बात नितिन के मुंह से कभी निकली भी नहीं। उस जमाने में टैक्सी का मतलब पचास रुपये से ऊपर का खर्च था। हमारे छह सात दोस्त अगर आ जाते तो हम दोनों सोचते थे आज थाली कैसे ऑर्डर की जाए ताकि कम खर्च हो। उस वक्त भी नितिन ने कभी किसी को दिखाने या जताने के लिए भी नहीं कहा - वो MLA का बेटा है।''
प्रॉपर्टी डीलर के सामने जब महंगे फ्लैट को कर दिया मना, कहा-पापा 2 हजारा से ज्यादा नहीं देंगे
नितिन नबीन के जमीन से जुड़े होने का एक और दिलचस्प किस्सा पीयूष ने साझा किया। दिल्ली के पटपड़गंज और आईपी एक्सटेंशन इलाके में जब ये दोस्त किराए का कमरा ढूंढने निकले, तो बजट बेहद कम था। वाघवा नाम के एक प्रॉपर्टी डीलर की दुकान पर जब बातचीत चल रही थी, तो पीयूष ने डीलर को बता दिया कि नितिन के पिता बिहार की राजधानी पटना के माननीय विधायक हैं।
विधायक का नाम सुनते ही प्रॉपर्टी डीलर के तेवर बदल गए और वह उन्हें महंगे और आलीशान फ्लैट्स दिखाने की बात करने लगा। लेकिन नितिन नबीन ने तुरंत पैर पीछे खींच लिए। उन्होंने किसी भी तरह के दिखावे या महंगे वीआईपी कल्चर को अपनाने से साफ मना कर दिया और अपने सीमित बजट वाले दायरे में ही रहना पसंद किया।
पीयूष लिखते हैं,
''जून के बाद अगले कुछ महीने हम साथ ही एक ही कॉलेज में पढ़ने लगे। दिल्ली के IP Extension इलाके में मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनी हैं। रहने का मन तो वहां था। लेकिन मैं, नितिन, विश्वजीत और सीताराम, चार दोस्त मिलकर भी दिल्ली-92 पटपड़गंज के अपार्टमेंट्स में फ्लैट नहीं ले पाए। मुझे आज भी याद है वाघवा प्रोपर्टी डीलर की दुकान थी। बेंच पर मैं और नितिन बैठे थे। सस्ता मकान दिलाने की बात कह रहे थे। उसने पूछा पिताजी क्या करते हैं। मैंने ही नितिन का भी परिचय करवाया। जैसे ही दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलर को पता चला किरायेदार के पिता बिहार की राजधानी पटना के विधायक हैं उसने महंगे फ्लैट दिखाने शुरू कर दिए। बाद में नितिन ने ही कहा, हमारा बजट महीने का दो हजार है। पापा इससे ज्यादा नहीं देंगे। रहना, खाना, कॉलेज जाना, सब दो हजार रुपये में करना होगा। इसके बाद अपार्टमेंट में रहना भूलना पड़ा। पश्चिम विनोद नगर के मंडावली इलाके में अंदर की गली में आज का बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन अपने तीन दोस्तों के साथ रहने लगा। नौकर या मेड रखने के पैसे थे नहीं। दो दोस्त सुबह सुबह ब्रेकफास्ट बनाते तो बाकी दो दोस्त बर्तन धोते। झाडू पोछा लगाते । शुरू शुरू में मैं और नितिन एक साथ ड्यूटी पर लगे। दोनों मिलकर झूठे बर्तन भी धो लेते थे। झाडू भी लगा लेते थे। पोछा भी। फिर फटाफट तैयार होकर दो बस बदलकर कॉलेज पहुंच जाते थे । नितिन उस जमाने में भी चारों दोस्तों में सबसे ज़्यादा अनुशासित और मिलनसार था । झगड़े हमारे होते तो सुलझाता नितिन था।''

पीएम नरेंद्र मोदी ने पोस्ट शेयर कर क्या कहा?
पत्रकार दोस्त की इस कहानी ने सोशल मीडिया पर लोगों को तो भावुक किया ही, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसे शेयर करने से खुद को रोक नहीं पाए। पीएम मोदी ने इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया हैंडल से रीपोस्ट करते हुए लिखा कि नितिन नबीन की यह सरलता, सादगी और जमीनी जुड़ाव हर पार्टी कार्यकर्ता के लिए गर्व की बात है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महज 45 साल की उम्र में बीजेपी जैसे बड़े संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलना नितिन नबीन की इसी सादगी, बेहद मीठी भाषा और लोगों के बीच अटूट भरोसा बनाने की कला का नतीजा है। यही वजह है कि आज पीएम मोदी से लेकर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन पर इतना बड़ा भरोसा जता रहा है।














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