Trump Tariff Policy: कौन हैं नील कात्याल, जिन्होंने गिराई ट्रंप के टैरिफ की दीवार! कई देशों में जगी उम्मीद
Donald Trump Tariff Policy: अमेरिका की अदालत में हुआ एक ऐतिहासिक फैसला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय मूल के वकील नील कात्याल ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को अदालत में चुनौती दी और शानदार जीत हासिल की।
ट्रंप, जिनकी नीतियों ने भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था को झटका दिया था, अब खुद कानून की जकड़ में आ गए हैं। इस फैसले ने न सिर्फ भारत में बल्कि उन सभी देशों में उम्मीद जगा दी है जो लंबे समय से अमेरिकी टैरिफ के बोझ तले दबे थे।

अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया। अदालत ने साफ कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
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नील कात्याल की जोरदार दलीलें
55 साल के नील कात्याल अमेरिका के मशहूर वकील और कानूनी विशेषज्ञ हैं। उन्होंने अदालत में यह साबित किया कि ट्रंप ने मनमाने ढंग से टैरिफ लगाकर अमेरिकी कानून का उल्लंघन किया। उनके मजबूत तर्कों के सामने ट्रंप प्रशासन की दलीलें कमजोर पड़ गईं।
भारतीय मूल का चमकता सितारा
नील कात्याल के पिता इंजीनियर और मां डॉक्टर थीं। ओबामा प्रशासन के दौरान वे अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। इस जीत के बाद नील कात्याल को न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में सराहना मिल रही है।
भारत के लिए बड़ी राहत की उम्मीद
अमेरिका ने भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाया था, जिससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये के निर्यात पर असर पड़ा और हजारों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा था। अब कोर्ट के फैसले से उम्मीद जगी है कि ये टैरिफ हट सकते हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा और 14 अक्टूबर तक टैरिफ पर रोक नहीं लगेगी।
टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में अमेरिकी ट्रेजरी ने लगभग 134 अरब डॉलर टैरिफ से जुटाए, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से ज्यादा हैं। लेकिन उम्मीद के मुताबिक आय नहीं हुई, जिससे ट्रंप की आर्थिक योजनाओं पर सवाल खड़े हो गए।
अमेरिका में भारतीयों का दबदबा
- यह जीत अमेरिका में भारतीय समुदाय की बढ़ती ताकत का भी सबूत है।
- अमेरिका में लगभग 52 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो कुल आबादी का करीब 1.5% हैं।
- भारतीय-अमेरिकी औसतन 85,000 डॉलर सालाना कमाते हैं, जो अमेरिकी औसत से काफी ज्यादा है।
- अमेरिका के 10% डॉक्टर भारतीय मूल के हैं, वहीं सिलिकॉन वैली के एक-तिहाई टेक प्रोफेशनल भारतीय हैं।
- गूगल के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला, IBM के अरविंद कृष्णा और एडोबी के शांतनु नारायण जैसे दिग्गज भारतीय मूल के हैं।
दुनिया के लिए नई उम्मीद
कोर्ट का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, उन सभी देशों के लिए राहत की खबर है, जो ट्रंप के टैरिफ से प्रभावित हुए थे। आने वाले दिनों में अगर सुप्रीम कोर्ट भी इस फैसले को बरकरार रखता है, तो अमेरिकी व्यापार नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
नील कात्याल बने नए हीरो
इस ऐतिहासिक जीत के बाद नील कात्याल को ट्रंप की "टैरिफ पॉलिसी" के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नायक कहा जा रहा है। उन्होंने दिखा दिया कि कानून और तर्क की ताकत किसी भी मनमानी को चुनौती दे सकती है।
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