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Defence News: 1953 से 2026 तक Dassault ने भारत को दिए ये शानदार जेट, टाइमलाइन से समझें पूरी ऐतिहासिक साझेदारी

Defence News: भारत की वायु शक्ति की कहानी अगर लिखी जाए, तो उसमें एक नाम बार-बार आता है - Dassault Aviation (डसॉल्ट एविएशन)। ये कोई आज की डील नहीं है। ये रिश्ता 1950 के दशक से शुरू होकर 2026 के मेगा $36 बिलियन डील तक पहुंच चुका है। अगर आप सोच रहे हैं कि ये सिर्फ हथियारों की खरीद है, तो रुकिए, ये टेक्नोलॉजी, भरोसे और स्ट्रैटेजिक ग्रोथ की लंबी कहानी है।चलिए, टाइमलाइन के हिसाब से समझते हैं किस साल क्या अपडेट आए भारत-फ्रांस के स्ट्रेटजिक रिलेशन में।

1953: 'तूफानी' की एंट्री से शुरूआत

आजादी के बाद भारत के पास ज्यादातर पुराने प्रोपेलर विमान थे। कॉल्ड वॉर शुरू हो चुका था। पाकिस्तान और चीन दोनों अनिश्चित फैक्टर थे। ऐसे में इंडियन एयर फोर्स (IAF) को जेट चाहिए थे, और जल्दी चाहिए थे।

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1953 में भारत ने 71 MD 450 Ouragan जेट का ऑर्डर दिया। बाद में कुल संख्या लगभग 104 तक पहुंची (इनमें एक बड़ी संख्या सेकेंड-हैंड विमानों की भी थी)। IAF में इनका नाम पड़ा- 'तूफानी'। इनमें, पहले 4 विमान 1953 के अंत तक हवाई मार्ग से पहुंचे और बाकी समुद्र के रास्ते से आए। ये 1930 के बाद फ्रांस का पहला बड़ा फाइटर एक्सपोर्ट था।

क्या असर हुआ?

• IAF की जेट एज (age) की शुरुआत
• 1961 गोवा मुक्ति अभियान में इस्तेमाल
• 1962 के भारत-चीन युद्ध में भी ऑपरेशन

1957: Mystère IV- जब स्पीड और सुपरसोनिक का मिला साथ

1957 में भारत ने 104 Mystère IV जेट खरीदे। उस समय ये Dassault का भारत को दिया गया सबसे बड़ा एकल ऑर्डर था। इसकी खास बात थी इसकी, स्वीप्ट विंग डिजाइन। जो गोता लगाते समय सुपरसोनिक स्पीड छूने की क्षमता रखती थी। 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में इन विमानों दुश्मन के पसीने छुड़ा दिए थे। युद्ध जीतने में इनका रोल महत्वपूर्ण साबित हुआ।

ये विमान पायलटों के लिए ये pure adrenaline मशीन थी। Propeller से जेट पर आना सिर्फ टेक अपग्रेड नहीं था, ये mindset shift (दिमागी तौर पर खुद को ढालना) था। यहां से भरोसे की नींव और मजबूत होती चली गई।

1979: Jaguar- फ्रेंच-ब्रिटिश प्रोजेक्ट, लेकिन देसी प्रोडक्शन

अब कहानी में एंट्री होती है SEPECAT Jaguar की। एक बार में सीधे 40 विमानों की डील हुई। जबकि 120 विमान HAL ने लाइसेंस के तहत भारत में बनाए। HAL (Hindustan Aeronautics Limited) के जरिए इनका लोकल लेवल पर प्रोडक्शन शुरू हुआ। असल मायने में यही ग्रोथ थी।

जगुआर ग्राउंड अटैक में माहिर था। जिसमें जमीन के काफी नजदीक तक जाकर गहरी चोट करने में असरदार था और यही उसकी पहचान थी। अब फ्रांस के साथ पार्टनर्शिप सिर्फ 'खरीदो और उड़ाओ' नहीं रही, बल्कि 'सीखो और बनाओ' में बदलने लगी।

1982: Mirage 2000 - 'वज्र' जिसने गेम पलट दिया

1982 में भारत ने 40 Mirage 2000 जेट (ऑप्शन सहित) लिए। IAF (Indian Air Force) में इनका नाम पड़ा- 'वज्र'। ये एक चौथी पीढ़ी (Fourth-generation multirole aircraft) का जेट था। इसकी खास बात थी कि इसके अटैक बहुत सटीक थे।

• 1999 कारगिल युद्ध - सटीक बमबारी, पहाड़ों में हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन
• 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक - precision strike

Mirage 2000 ने ये साबित किया कि टेक्नोलॉजी + ट्रेनिंग = निर्णायक असर। IAF को दुनिया की टॉप एयरफोर्स में शामिल कराने में इसका रोल अहम रहा।

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2016: Rafale Deal - विवाद से क्षमता तक

अब आते हैं उस नाम पर जिसने दुश्मन देशों के साथ-साथ भारतीय राजनीति में भी तूफान खड़ा किया, हम बात कर रहे हैं 'Rafale' की। 2016 में भारत ने 36 राफेल जेट का सौदा किया। पहली खेप दिसंबर 2022 तक पूरी हुई। जिसे IAF की 101 स्क्वाड्रन इन्हें ऑपरेट कर रही है। इसमें डीप स्ट्राइक, इलैक्ट्रोनिक वॉरफेयर और एयर सुपीरियरटी जैसी कैपेसिटी भरी हुई है।

राफेल की खासियत:

• सेंसर फ्यूजन
• बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल
• ओमनीरोल कैपेबिलिटी

यह सिर्फ नया जेट नहीं था, बल्कि हवा में दबदबा बनाने वाला अपग्रेड था।

2025: इंडियन नेवी की फ्रेंच क्लब में एंट्री

अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना ने 26 Rafale-M जेट खरीदने का समझौता किया। ये जेट INS Vikrant और INS Vikramaditya जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर तैनात होंगे। जिनकी डिलीवरी 2028 के आखिर तक हो जाएगी। कमाल की बात ये है कि एयरफोर्स के साथ-साथ अब नेवी भी राफेल इकोसिस्टम में आ गई।

फरवरी 2026: 114 Rafale की मेगा डील

अब कहानी अपने चरम पर है। भारत ने फ्रांस के साथ एक या दो नहीं बल्कि पूरे 114 राफेल की डील लॉक कर ली है। फरवरी 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 114 अतिरिक्त Rafale जेट के लिए $36 बिलियन से ज्यादा की डील को मंजूरी दी। जिसमें, 18 फ्लाई-अवे यूनिट्स मिलेंगी जबकि बाकी के जेट का निर्माण भारत में ही होगा। इसमें डसॉल्ट के साथ Tata Advanced Systems पार्टनरशिप करेगा। इससे Make in India को भी बल मिलेगा और भारत भी नई टेक्नोलॉजी पर काम करना सीखेगा। ये 1957 के 104 Mystère IV ऑर्डर को पार करने वाला सबसे बड़ा अधिग्रहण है।

अब सवाल - भारत को कितना फायदा हुआ?

भारत सिर्फ खरीददार नहीं बल्कि, सह-निर्माता (co-producer) बन रहा है। चीन की PLA Air Force तेजी से अपग्रेड हो रही है। Rafale संख्या बढ़ना चीन को सीधा मैसेज है कि भारत भी अब टक्कर देने की ओर बढ़ रहा है। इसमें Tata + Dassault का साथ में निर्माण करना सबसे बड़ा फेक्टर है, क्योंकि अब तक हम नई टेक्नोलॉजी सिर्फ खरीदते थे। लेकिन टाटा के आने से अब न सिर्फ सीखेंगे बल्कि अपग्रेड भी करेंगे। इससे बड़ी तादाद में स्किल्ड मैनपावर भी तैयार होगी।

ये सिर्फ जेट नहीं, 70 साल की दोस्ती

1953 के 'तूफानी' से लेकर 2026 के Rafale तक, ये पार्टनर्शिप युद्ध, शांति, संकट सब झेल चुकी है।
कई पीढ़ी के भारतीय पायलट फ्रेंच प्लेटफॉर्म पर ट्रेनिंग लेते आए हैं। लेकिन, अब ट्रेनिंग भी भारत में जल्द स्टार्ट होगी। फ्रांस और भारत की डिफेंस पार्टनर्शिप अब tactical नहीं, strategic हो चुकी है।

इस एक्सप्लेनर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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