Chinese Ambassador India: नई दिल्ली में बैठे चीनी राजदूत क्यों हुए अपने देश में गद्दार? किस बात की मिल रही सजा

Chinese Ambassador India: चीन ने हाल ही में भारत में राजदूत बनाए शू फेइहोंग इन दिनों अपने ही देश में घिर गए हैं। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'वेइबो' पर उनके खिलाफ कई प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। जिसके बाद उनके लिए नई मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मामला चीनी वीजा से जुड़ा है जिसे लेकर फेइहोंग को घेरा जा रहा है। जानेंगे क्या है मामला और कैसे रडार पर आए चीनी राजदूत

दरअसल, नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास द्वारा इस साल की पहली तिमाही में लगभग 85,000 भारतीय नागरिकों को वीज़ा जारी किए गए। साल 2020 में गलवान घाटी में हुए सैनय संघर्ष के बाद पैदा हुए तनाव के बीच वीज़ा के इन आंकड़ों में यह एक बड़ा उछाल है। अब इसी को लेकर राजदूत पर आरोप लग रहे हैं कि वे भारतीयों के प्रति जरूरत से ज्यादा नर्म हैं। जबकि नई दिल्ली ने अभी भी चीनी लोगों के लिए अभी भी सख्ती कर रखी है। बस इसी बात को लेकर पूरा मामला बिगड़ा हुआ है।

Chinese Ambassador India

चीन में उठी राजदूत को हटाने की मांग

वेइबो पर कई यूजर्स ने सीधे राजदूत शू फेइहोंग को निशाना बनाते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की माग तक कर डाली है। सोशल मीडिया पर लोग इस उदार वीज़ा नीति को अपने देश की सुरक्षा के लिए एक चुनौती के रूप में देख रहे हैं। कई जगहों पर यह सवाल पूछा जा रहा है कि जब भारत अभी भी चीन को एक प्रतिद्वंद्वी देश के रूप में देखता है, तो इतनी बड़ी संख्या में भारतीयों को चीन में आने की इजाजत देना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता क्यों नहीं है?

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चीनी दूतावास ने क्या दी सफाई

बढ़ते सोशल मीडिया विवाद को देखते हुए नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास को सार्वजनिक रूप से हसतक्षेप करना पड़ा। दूतावास ने एक स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि भारतीयों को जारी किए गए कुल वीज़ा में से 80 प्रतिशत से अधिक केवल बिजनेस वीज़ा हैं। इसका अर्थ यह है कि ये लोग दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए चीन जा रहे हैं।

दूतावास ने इस बात को स्वीकार किया कि चीनी नागरिकों के प्रति भारत की वीज़ा नीति अभी भी काफी सख्त बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि वीज़ा जैसे आधिकारिक मुद्दों को भावनात्मक रंग देना द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाएगा। दूतावास ने चीनी इंटरनेट यूजर्स को नकारात्मक और कॉन्टेंट न फैलाने की सलाह दी है।

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सफाई के बाद भी चीन में क्यों उपजा मतभेद?

चीनी थिंक टैंक और एक्सपर्ट्स भी इस मुद्दे पर दो धड़ों में बंटा हुआ नजर आ रहा है। चीनी सोशल साइंस अकेडमी की रिसर्चर शी वुई का मानना है कि आम जनता की राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, चीनी नागरिकों का सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना पूरी तरह जायज़ है। इसके उलट कुछ एक्सपर्ट्स ने राजदूत के रुख का समर्थन किया है। इस मामले में एक्सपर्ट्स जो भी सोचें, लेकिन एक बात तय है कि फिलहाल नई दिल्ली में बैठे चीनी राजदूत की बेचैनी जरूर बढ़ रही होगी।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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