बाल-बाल बचे फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, जिस होटल में गुजारी रात उसी के बगल में धमाका, किसने रची साजिश?
Syria Hotel Blast: सीरिया की राजधानी दमिश्क मे उस होटल के पास धमाके हुए, जहां फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ठहरे हुए थे। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेसियां तुरंत हरकत में आ गईं।। राहत की बात यह रही कि मैक्रों पूरी तरह सुरक्षित रहे। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय एलिसी पैलेस के मुताबिक, धमाको के समय मैक्रों होटल से निकल चुके थे और सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ राष्ट्रपति भवन मे बैठक कर रहे थे। घटना के बाद होटल के आसपास सुरक्षा और बढ़ा दी गई।
धमाके के बाद बैठकों का क्या हुआ?
धमाको के बाद भी राष्ट्रपति मैक्रों ने अपना दौरा जारी रखा। यह यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि साल 2024 में बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद सीरिया जाने वाले मैक्रों यूरोपीय संघ (ईयू) के पहले राष्ट्राध्यक्ष बन गए हैं। फ्रांस इस दौरे के जरिए सीरिया की नई सरकार के साथ रिश्तो को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि सुरक्षा घटना के बाद भी तय कार्यक्रम मे कोई बड़ा बदलाव नही किया गया।

असद के बाद बदला सीरिया का राजनीतिक माहौल
बशर अल-असद के कई दशक पुराने शासन के खत्म होने के बाद सीरिया की राजनीति मे बड़ा बदलाव आया है। इसी बदलाव के बीच फ्रांस समेत कई यूरोपीय देश नई सरकार के साथ बातचीत बढ़ाना चाहते हैं। मैक्रों का यह दौरा भी इसी दिशा मे एक कदम माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पश्चिमी देश अब सीरिया के नए नेतृत्व के साथ काम करने की संभावनाओ को देख रहे हैं, लेकिन सुरक्षा हालात अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
विद्रोही से नेता बने शरा के सामने क्या चुनौती?
सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा पहले उस विद्रोही गुट के नेता रहे, जिसने बशर अल-असद की सरकार को सत्ता से हटाया था। अब वह पश्चिमी देशो और पश्चिमी एशिया के पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं। लंबे समय तक अलग-थलग रहने के बाद नई सरकार दुनिया का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है। लेकिन दमिश्क मे हुए धमाको ने यह दिखा दिया कि देश मे कानून व्यवस्था को मजबूत करना अभी भी आसान नही है।
सुरक्षा अब भी सबसे बड़ी चुनौती
करीब 13 साल तक चले गृहयुद्ध का असर आज भी सीरिया मे दिखाई देता है। इस दौरान कई आतकवादी और विद्रोही गुट मजबूत हो गए। इस्लामिक स्टेट (आईएस) समेत कई सशस्त्र संगठन अलग-अलग इलाको मे सक्रिय रहे हैं। फिलहाल दमिश्क के धमाको की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है। सुरक्षा एजेसियां हमलावरो की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं। इस घटना ने विदेशी नेताओं की सुरक्षा को लेकर भी नए सवाल खड़े किए हैं।
अल-शरा के सामने चुनौतियां भी कम नहीं
राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने वादा किया है कि वह सभी धर्मो और समुदायो को साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने कहा है कि सीरिया मे समावेशी राजनीतिक व्यवस्था बनाई जाएगी। लेकिन जमीनी हालात अब भी आसान नही हैं। कई धार्मिक और जातीय समूहो के साथ-साथ पूर्व सरकार के समर्थको का विरोध भी सामने आ रहा है। देश के कई हिस्सो से हिंसा और सुरक्षा से जुड़ी घटनाओ की खबरें लगातार आती रही हैं।
विदेशी रिश्तो पर भी पड़ सकता है असर
फ्रांस के राष्ट्रपति का यह दौरा दिखाता है कि पश्चिमी देश सीरिया की नई सरकार से बातचीत जारी रखना चाहते हैं। हालांकि, इस तरह की सुरक्षा घटनाए विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर असर डाल सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषको का मानना है कि जब तक सीरिया मे सुरक्षा और शाति पूरी तरह बहाल नहीं होती, तब तक दूसरे देशों का भरोसा पूरी तरह जीतना मुश्किल रहेगा।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।














Click it and Unblock the Notifications