1 दिन में नहीं, अब 5 से 6 दिन चलेगी NEET-UG परीक्षा, हर शिफ्ट में बैठेंगे 5 लाख छात्र, क्या है पूरा नया मॉडल?
NEET-UG की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए अगले साल से परीक्षा का अनुभव पूरी तरह बदल सकता है। केंद्र सरकार मेडिकल प्रवेश परीक्षा को पहले से ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नए मॉडल पर काम कर रही है। योजना के तहत अब तक एक दिन और पेन-पेपर मोड में होने वाली परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) बनाया जा सकता है। इसके साथ ही परीक्षा को एक ही दिन कराने के बजाय 5 से 6 दिनों तक अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित करने की तैयारी है।
इससे एक साथ बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को संभालना आसान होगा और पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना भी कम करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा सिर्फ परीक्षा का तरीका ही नहीं, बल्कि इसे कराने वाली एजेंसी NTA की व्यवस्था में भी बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि इन सुधारों का मकसद भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाना है।

एक दिन नहीं, कई दिनों तक चलेगी परीक्षा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले साल से NEET-UG परीक्षा एक ही दिन आयोजित नहीं की जाएगी। इसकी जगह परीक्षा को 5 से 6 दिनों में अलग-अलग शिफ्ट में कराने की योजना है। सभी उम्मीदवार कंप्यूटर के जरिए परीक्षा देंगे, जिससे परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत देश के लगभग 500 शहरों में करीब 1,000 परीक्षा केंद्र तैयार किए जाएंगे।
इनमें अधिकतर केंद्र केंद्रीय विद्यालय (KV), जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और दूसरे सरकारी संस्थानों में बनाए जाने की संभावना है। हर दिन करीब 5 लाख छात्र परीक्षा देंगे, जबकि प्रत्येक केंद्र पर रोज लगभग 500 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। इसी मॉडल के जरिए 5 से 6 दिनों में सभी उम्मीदवारों की परीक्षा पूरी कराई जाएगी।
बदलाव सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तकनीकी व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासनिक ढांचा और काम करने के तरीके में भी बड़े सुधार किए जाएंगे। एजेंसी के पूरे सिस्टम को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे अक्टूबर तक पूरा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
पेपर लीक विवाद के बाद तेज हुई तैयारी
इन बदलावों के पीछे हाल में सामने आया NEET-UG पेपर लीक मामला सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। इस साल 3 मई को हुई परीक्षा में करीब 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था, लेकिन पेपर लीक विवाद के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई और पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी गई। इसके बाद परीक्षा सुरक्षा को लेकर सरकार ने व्यापक बदलाव की दिशा में काम शुरू किया। सरकार परीक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को आधार बना रही है। समिति ने परीक्षा को सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई सुझाव दिए थे, जिन पर अब अमल की तैयारी चल रही है।
NTA में बदलाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार नई परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगी। इसमें परीक्षा शहरों की सूची, शिफ्ट का समय, परीक्षा का प्रारूप और अन्य जरूरी नियम शामिल होंगे। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और सुरक्षा के लिए नई तकनीक लागू किए जाने की भी तैयारी की जा रही है।
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