पाक में CPEC का विस्तार नहीं करेगा चीन, क्या भयानक आर्थिक संकट का सामना कर रहा है ड्रैगन?
अमेरिका से दोस्ती और खुद के देश में शुरू हुई आर्थिक तबाही की शुरुआत के बाद अब चीन ने पाकिस्तान पर ध्यान देना कम कर दिया है। कई सालों से पाकिस्तान और चीन की दोस्ती के तौर पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) मिसाल बना था, मगर अब चीन ने उसके विस्तार पर रोक लगा दी है।
ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि बीजिंग ने ऊर्जा, पर्यटन, जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन सहित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत कई क्षेत्रों में प्रत्यक्ष निवेश से संबंधित इस्लामाबाद के कई प्रस्तावों को खारिज कर दिया है।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन, पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित कई उपायों से असहमत है। दस्तावेजों के मुताबिक पाकस्तान ने चीन की चिंताओं को दूर करने के लिए कई चीनी मांगों का विरोध छोड़ दिया है।
इसी क्रम में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर में एक नया कोयला आधारित बिजली संयंत्र बनाने को लेकर अपना विरोध छोड़ दिया है। पाकिस्तान पहले इस प्लांट को थार में बनाने पर अड़ा हुआ था ताकि स्थानीय कोयले का इस्तेमाल किया जा सके।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की बिजली कंपनियों का काफी पैसा पाकिस्तान पर बकाया है जो कंगाली की वजह से इसे चुका नहीं पा रहा है। चीन के दबाव के बाद अब पाकिस्तान ने ग्वादर में 300 मेगावाट के पॉवर प्लांट पर चीन को बड़ी रियायत भी दी है।
अब ग्वादर प्लांट को चीन से कोयला मंगाकर चलाया जाएगा। दुनियाभर में जिस तरह कोयले की कीमतें बढ़ रही हैं यहां पैदा होने वाली बिजली भविष्य में मंहगी होने की आशंका है। ऐसे में पाकिस्तान के विदेशी मुद्राभंडार पर अतिरिक्त दबाव बनेगा। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के ग्वादर में पर्यावरण पर भी इस प्लांट का असर पड़ेगा।
इसके अलावा चीन ने गिलगित-बाल्टिस्तान, खैबर-पख्तूनख्वा, पाकिस्तान-नियंत्रित जम्मू और कश्मीर और देश के तटीय क्षेत्रों में सीमा पार पर्यटन में सहयोग को अस्वीकार कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन, सीपीईसी ढांचे में जल संसाधन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन और शहरी बुनियादी ढांचे के विकास को शामिल करने के पाकिस्तान के दबाव से भी सहमत नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान के साथ-साथ चीन भी आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। इस वजह चीन अब पाकिस्तान में सीपीईसी का विस्तार नहीं करना चाहता।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार ने सीपीईसी की 11वीं संयुक्त सहयोग समिति (जेसीसी) की बैठक के विवरण के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक जेसीसी जो कि सीपीईसी की रणनीतिक निर्णायक इकाई है और इसकी 11वीं बैठक पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज)-नीत सरकार के जोर देने पर पिछले साल 27 अक्टूबर को वर्चुअल तरीके से हुई थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल 31 जुलाई को दोनों देशों के 11वीं जेसीसी की शर्तों पर सहमति बनी और एक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। इस समझौते के मिनट में दोनों पक्षों के बीच बहुत से मुद्दों पर असहमति थी जिस कारण आम सहमति तक पहुंचने में इतनी देरी हुई। पाकिस्तान की तरफ से प्रस्तावित कई मुद्दों पर चीन ने सहयोग करने से मना कर दिया जिससे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा।
खबर के अनुसार, इससे दोनों पक्षों में मतभेद सामने आ गया है, जिसकी वजह से सहमति बनने में बहुत देरी हुई है। इस देरी को लेकर पाकिस्तान के योजना मंत्रालय ने कहा कि यह एक वैश्विक प्रथा है कि दो देशों के बीच बैठकों के मिनट पर उचित परामर्श और सर्वसम्मति के बाद ही दोनों पक्ष उस पर हस्ताक्षर करते हैं।
आपको बता दें कि चीन का चाइना-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर या सीपीईसी प्रोजेक्ट 60 अरब डॉलर का है जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह को चीन के झिंजियांग प्रांत से जोड़ता है।
सीपीईसी चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का प्रमुख प्रोजेक्ट है। भारत चीन के सीपीईसी प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है क्योंकि यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है।












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