China Japan Clash: क्या है सेनकाकू आईलैंड जिस पर भिड़े चीन-जापान? कौन दिखा रहा दादागीरी?
China Japan Clash: पूर्वी चीन सागर (East China Sea) में चीन और जापान के बीच पुराना सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा मे आ गया है। विवादित सेनकाकू आईलैंड (Senkaku Islands), जिसे चीन डियाओयू (Diaoyu) कहता है, के पास दोनों देशों के कोस्ट गार्डों से भरे जहाज आमने-सामने आ गए। इस घटना के बाद जापान और चीन, दोनो ने दावा किया कि उन्होंने दूसरे देश के जहाजो को अपनी समुद्री सीमा से बाहर कर दिया। इससे इलाके में तनव फिर बढ़ गया है।
जापान का दावा, चीनी जहाज उसके इलाके में घुसे
जापानी कोस्ट गार्ड्स के मुताबिक, चीन के चार कोस्ट गार्ड जहाज सेनकाकू आईलैंड के पास गश्त कर रहे थे। इनमें से दो जहाज उस समुद्री इलाके में दाखिल हो गए, जिसे जापान अपना क्षेत्र मानता है। जापान का कहना है कि चीनी जहाजो ने वहां मौजूद उसकी एक मछली पकड़ने वाली एक नाव के काफी करीब जाकर उसे घेरने की कोशिश की। इस घटना के बाद जापानी सुरक्षा एजेसियां तुरंत सक्रिय हो गईं।

जापान ने दी चीन को चेतावनी दी
घटना की जानकारी मिलते ही जापान ने अपने कोस्ट गार्ड जहाज मौके पर भेजे। इन जहाजो ने जापानी मछली पकड़ने वाली नाव के चारो तरफ सुरक्षा घेरा बना दिया। जापानी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने चीनी जहाजों को पीछे हटने की चेतावनी दी। उनके मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब सवा नौ बजे तक चीनी जहाज उस इलाके से बाहर चले गए। जापान ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानुन का उल्लंघन बताया और कहा कि वह अपनी समुद्री सीमाओ की सुरक्षा के लिए आगे भी जरूरी कदम उठाता रहेगा।
चीन ने जापान के आरोपों को बताया गलत
चीन ने जापान के सभी आरोपो को खारिज कर दिया है। बीजिंग का कहना है कि जापान की मछली पकड़ने वाली नाव 'जुइहौ मारु' (Zuihou Maru) चीन के अधिकार वाले समुद्री क्षेत्र में घुस आई थी। चीन के कोस्ट गार्ड के मुताबिक, उन्होंने केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत उस नाव को वहां से हटाने की कार्रवाई की। चीन का कहना है कि उसने कोई गलत कदम नही उठाया और उसकी कार्रवाई पूरी तरह नियमों के मुताबिक थी।
सेनकाकू आईलैंड पर क्यों है इतना बड़ा विवाद?
सेनकाकू आईलैंड पूर्वी चीन सागर में ताइवान और जापान के ओकिनावा प्रांत के बीच स्थित है। इन छोटे और निर्जन आईलैंडो पर फिलहाल जापान का कंट्रोल है, लेकिन चीन इन पर अपना ऐतिहासिक अधिकार जताता है। यही वजह है कि कई दशक से दोनों देश इस इलाके को लेकर आमने-सामने रहते हैं। समय-समय पर यहां जहाजो की गश्त और कूटनीतिक बयानबाजी से तनाव बढ़ता रहता है।
तेल, गैस और समुद्री रास्ते से जुड़ा है मामला
यह इलाका सिर्फ सीमा विवाद तक सीमित नही है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गो के करीब स्थित है। इसके अलावा, समुद्र की तलहटी में बड़ी मात्रा में तेल और गैस के भंडार होने का अनुमान भी लगाया जाता है। इसी कारण चीन और जापान दोनो इस क्षेत्र पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं हैं। आर्थिक और रणनीतिक नजरिए से यह इलाका दोनों देशों के लिए काफी अहम माना जाता है।
ताइवान को लेकर भी बढ़ी है तनातनी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बढ़े तनाव के पीछे ताइवान का मुद्दा भी एक वजह है। पिछले साल नवंबर में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा था कि अगर ताइवान पर हमला होता है, तो जापान चुप नही बैठेगा और जरूरत पड़ने पर सैन्य हस्तक्षेप भी कर सकता है। इस बयान पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे अपनी सप्रभुता के खिलाफ बताया था। यही वजह है कि अब दोनों देश धीरे-धीरे एक दूसरे के खिलाफ माहौल बना रहे हैं।
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