खान सर का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड? अदालत ने पुलिस से मांगे कौन से डाक्यूमेंट्स? गार्डस पर आया बड़ा अपडेट

Khan Sir Coaching Case Update: पटना के चर्चित शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर से जुड़े विवाद में एक नया अपडेट सामने आया है। खान सर और ज्ञान बिंदु के संस्थापक रौशन आनंद के बीच चल रहे मामले में मंगलवार, 7 जुलाई को कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने एक तरफ खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, वहीं जेल में बंद उनके दोनों गार्ड प्रदीप कुमार और तालेबर सिंह की नियमित जमानत याचिका पर भी सुनवाई की।

करीब 40 मिनट तक चली बहस के दौरान अदालत ने कुछ जरूरी सवाल उठाए और मामले से जुड़े अतिरिक्त रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया। इसी बीच पुलिस जांच में दोनों गार्ड्स के हथियारों और लाइसेंस को लेकर भी नई जानकारियां सामने आई हैं। इन तथ्यों को केस डायरी में जोड़ दिया गया है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 8 जुलाई सुबह होगी, जहां अदालत जमानत और जांच से जुड़े पहलुओं पर आगे विचार करेगी। ऐसे में कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण इस मामले के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

Khan Sir Coaching Case Update

जज ने मांगे खान सर के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड

जिला जज रूपेश देव की अदालत में मंगलवार को दोनों पक्षों की दलीलें करीब 40 मिनट तक चलीं। सुनवाई के दौरान रौशन आनंद की शिकायत का जिक्र करते हुए अदालत ने खान सर के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी पेश करने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह रिकॉर्ड उसी दिन उपलब्ध कराया जाए। अब मामले की अगली सुनवाई बुधवार सुबह 10:30 बजे तय की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला काफी समय से लंबित है और इसे अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए। इससे पहले हुई सुनवाई में एडीजे ने खान सर और उनके सहयोगियों को मिली अंतरिम राहत 7 जुलाई तक बढ़ा दी थी।

लाइसेंस पर हुई चर्चा

खान ग्लोबल स्टडीज के लीगल एडवाइजर रंजन सिंह ने सुनवाई के बाद बताया कि मंगलवार को अदालत में मुख्य रूप से हथियार लाइसेंस से जुड़े मुद्दों पर बहस हुई। उन्होंने कहा कि बुधवार को भी इसी मामले में सुनवाई जारी रहेगी। पुलिस जांच के मुताबिक, फायरिंग में जिस हथियार का इस्तेमाल हुआ वह तालेबर सिंह के नाम पर है। तालेबर सिंह उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला है। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि उसके हथियार लाइसेंस का परमिट पूरे देश में मान्य नहीं था। पुलिस का आरोप है कि वह आवश्यक अनुमति लिए बिना हथियार के साथ बिहार आया और सुरक्षा ड्यूटी करता रहा। इस पूरे मामले से जुड़ी जानकारी पुलिस ने अपनी अपडेटेड केस डायरी में दर्ज कर ली है।

स्थानीय स्तर पर नहीं दी गई सूचना

जांच में यह भी सामने आया कि बिहार में हथियार लेकर काम करने की जानकारी न तो स्थानीय प्रशासन को दी गई और न ही संबंधित थाने या आर्म्स मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना दी गई। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है और इसी पहलू की भी जांच की जा रही है। पुलिस जांच में यह बात भी शामिल की गई है कि खान सर ने तालेबर सिंह को सुरक्षा गार्ड के तौर पर रखने के बाद उसका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया। जांच एजेंसी का कहना है कि हथियार के साथ सुरक्षा ड्यूटी करने वाले व्यक्ति से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जानी चाहिए थीं।

दूसरे गार्ड प्रदीप कुमार के हथियार की जांच में पता चला कि उसका लाइसेंस उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से जारी हुआ था और पूरे भारत में मान्य है। हालांकि पुलिस का कहना है कि यह लाइसेंस उसके पिता की हत्या के बाद आत्मरक्षा के उद्देश्य से दिया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस लाइसेंस का इस्तेमाल निजी सुरक्षा ड्यूटी के लिए किया गया, जो लाइसेंस की शर्तों के अनुरूप नहीं माना जा रहा। पुलिस ने इस बिंदु को भी अपनी अपडेटेड केस डायरी का हिस्सा बनाया है।

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