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दक्षिण चीन सागर में चीन का 'शैतानी' प्लान! बना रहा तैरता आइलैंड, न्यूक्लियर अटैक भी नहीं कर पाएगा बाल बांका

China Floating Island: चीन एक विशाल और रहस्यमय फ्लोटिंग आर्टिफिशियल आइलैंड का निर्माण कर रहा है, जिसे बीजिंग न्यूक्लियर ब्लास्ट-रेजिस्टेंट होने का दावा कर रहा है। यह 78,000 टन वजनी स्टील-आर्मर्ड प्लेटफॉर्म पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ परमाणु हमले को भी झेलने में सक्षम बताया जा रहा है। विशेषज्ञों ने इसे 'समुद्र का शाकाल' नाम दिया है।

यह कदम ऐसे समय आया है जब चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा ठोक रहा है, जिससे वियतनाम, फिलीपींस और अन्य पड़ोसी देशों में बेचैनी बढ़ गई है। यह तैरता हुआ ढांचा बीजिंग की आक्रामक समुद्री रणनीति का हिस्सा है जो क्षेत्रीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

China Floating Island

क्या है यह न्यूक्लियर-सेफ 'आर्टिफिशियल आइलैंड'?

चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, यह तैरता हुआ द्वीप दूरस्थ समुद्री मिशनों को अंजाम दे सकता है और इसे किसी भी रणनीतिक समुद्री स्थान पर तैनात किया जा सकता है। इसमें एक कमांड सेंटर, उन्नत रडार सिस्टम, एंटी-मिसाइल शील्ड और अत्यधिक ठंड या गर्मी को झेलने वाला सुपर-आर्मर लगा हुआ है। सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि यह प्लेटफॉर्म परमाणु हमले की स्थिति में भी अपनी परिचालन क्षमता बनाए रख सकता है। यह विशेषता इसे एक अद्वितीय और अत्यधिक खतरनाक सैन्य संपत्ति बनाती है। यह दावा क्षेत्रीय देशों के लिए रणनीतिक रूप से उकसाने वाला है, क्योंकि यह चीन की समुद्र में अजेय उपस्थिति का संकेत देता है।

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चीन इसे क्यों बना रहा है?

दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहाँ से दुनिया का लगभग 30% समुद्री व्यापार होता है। चीन लंबे समय से "नाइन-डैश लाइन" के आधार पर इस क्षेत्र पर दावा करता रहा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय अदालत ने खारिज कर दिया है। चीन की रणनीति अब यह है कि जहाँ उसके दावों को स्वीकार नहीं किया जाता, वहाँ वह भौगोलिक वास्तविकता को बदल दे। तैरते हुए कृत्रिम द्वीप इस रणनीति का सबसे उन्नत संस्करण है। इसे डुबाना या मिसाइलों से नष्ट करना मुश्किल होगा, और यह हर मौसम में सक्रिय रह सकता है, जिससे चीन को विवादित क्षेत्रों में स्थायी और मोबाइल सैन्य उपस्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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वियतनाम के लिए बड़ी चिंता

दक्षिण चीन सागर में चीन से सबसे पुराना और गहरा विवाद वियतनाम का है। चीन पहले भी वियतनामी नौकाओं को रोककर और तेल खोज मिशनों को बाधित करके आक्रामक कार्रवाई कर चुका है। अब, चीन के पास एक तैरता हुआ, आर्मर्ड और परमाणु-प्रतिरोधी ढांचा होगा, जिसे वह वियतनाम के आर्थिक समुद्री क्षेत्र (EEZ) के करीब तैनात कर सकता है। वियतनाम इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देख रहा है। इस तनाव के बावजूद, वियतनाम अभी तक किसी बड़े गठबंधन जैसे क्वाड में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुआ है, लेकिन चीन के इस नए कदम ने उसे जापान और अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर मजबूर किया है।

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दक्षिण चीन सागर में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन इस तरह के कई फ्लोटिंग आइलैंड तैनात करता है, तो दक्षिण चीन सागर में सैन्य तनाव नाटकीय रूप से बढ़ जाएगा। वियतनाम इसका जवाब मिसाइल-डिटेरेंस क्षमताओं को बढ़ाकर दे सकता है, जबकि फिलीपींस अमेरिका की मदद से अपनी नौसेना को मजबूत कर रहा है। भारत भी वियतनाम को ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें देने पर विचार कर चुका है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के बजाय 'मसल पॉलिटिक्स' का खेल बन सकती है, जिसमें चीन केंद्र में होगा और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश उसके बढ़ते दबाव से घिरे होंगे। यह तैरता प्लेटफॉर्म सिर्फ इंजीनियरिंग का कमाल नहीं, बल्कि भू-रणनीति की एक नई चाल है जो क्षेत्र को एक नया हॉटस्पॉट बना सकती है।

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