China New Social Media Rule: चीन का नया सोशल मीडिया रुल! अब बिना डिग्री इन्फ्लुएंसर नहीं दे पाएंगे फर्जी ज्ञान
China New Social Media Rule : सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियों और "फेक एक्सपर्ट्स" पर नकेल कसने के लिए चीन ने एक सख्त कानून लागू किया है। अब कोई भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या कंटेंट क्रिएटर अगर स्वास्थ्य (Medicine), कानून (Law), वित्त (Finance) या शिक्षा (Education) जैसे गंभीर विषयों पर कंटेंट बनाएगा, तो उसके पास उस क्षेत्र में डिग्री या Expertise होना अनिवार्य होगा।
अगर कोई बिना योग्यता के इन विषयों पर बोलता या सलाह देता पाया गया, तो उस पर 100,000 युआन (करीब ₹11.6 लाख) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

क्या कहता है नया कानून ?
चीन की इंटरनेट नियामक संस्था Cyberspace Administration of China (CAC) ने "Regulations on the Accountability of Internet Content Creators for Professional Topics" नाम से नए नियम जारी किए हैं।
इन नियमों के तहत -कोई भी सोशल मीडिया क्रिएटर अगर चिकित्सा, कानून, वित्त या शिक्षा जैसे गंभीर विषयों पर कंटेंट बनाना चाहता है, तो उसे अपनी शैक्षणिक डिग्री, प्रोफेशनल लाइसेंस या सरकारी मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Douyin (TikTok का चीनी संस्करण), Weibo और Bilibili को इन क्रिएटर्स की योग्यता जांचनी होगी। प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट पर डिस्क्लेमर और सोर्स दिखाने होंगे तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले अकाउंट्स को हटाना या निलंबित करना होगा।
क्या है सजा और जुर्माना?
CAC द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक -
- नियम तोड़ने पर कंटेंट हटाया जा सकता है,
- अकाउंट सस्पेंड किया जा सकता है,
- और ₹11 लाख (100,000 युआन) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- यह नियम 25 अक्टूबर को CAC के आधिकारिक पोर्टल पर प्रकाशित किए गए थे और तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
गलत जानकारी पर कसेगा नकेल?
चीन ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि इंटरनेट पर फैल रही गलत सूचनाओं (misinformation) और फर्जी सलाहों को रोका जा सके। अक्सर इन्फ्लुएंसर बिना किसी पेशेवर पृष्ठभूमि के चिकित्सा, कानून या निवेश जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सलाह देते हैं, जिससे लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है। इस कानून के जरिए चीन दुनिया का शायद पहला देश बन गया है जिसने "इन्फ्लुएंसर सर्टिफिकेशन सिस्टम" को कानूनी रूप से लागू किया है।
हालांकि इस कानून को लेकर सोशल मीडिया पर कई आलोचनाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे "कम्युनिस्ट एब्सर्डिटी" और "स्पीच एग्जाम" बताया। कई यूजर्स ने कहा कि यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of speech) को सीमित करता है। कुछ ने तो इसे चीन के "North Korea-ification" की दिशा में एक और कदम बताया।
किस पर पड़ेगा असर?
टेक आउटलेट की रिपोर्ट के अनुसार,स्वास्थ्य और वित्त जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 90% इन्फ्लुएंसर इस नए नियम से प्रभावित हो सकते हैं। अब ऐसे क्रिएटर्स के पास दो विकल्प होंगे -
या तो किसी प्रमाणित विशेषज्ञ के साथ मिलकर कंटेंट बनाएं,
या फिर लाइफस्टाइल, फूड या मनोरंजन जैसे सामान्य विषयों पर फोकस करें।
क्या हर व्लॉगर पर लागू होगा यह नियम?
CAC ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल "प्रोफेशनल या सीरियस टॉपिक्स" पर लागू होंगे। जैसे -अगर कोई व्लॉगर स्ट्रीट फूड का रिव्यू करता है या यात्रा ब्लॉग बनाता है, तो कोई पाबंदी नहीं होगी।लेकिन अगर वह कहे कि "यह खाना कैंसर ठीक कर सकता है" - तो उस पर कार्रवाई होगी।
चीन का यह कानून सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज़ और झूठे दावों के खिलाफ एक कड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसने यह बहस भी छेड़ दी है कि "गलत सूचना को रोकना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन" कैसे बनाया जाए।












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