PoK में तालिबान की जीत का जश्न, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने निकाली रैली, पाकिस्तान बेनकाब
दो दिन पहले इस्लामाबाद में तालिबान के समर्थन में एक मदरसे के ऊपर तालिबानी झंडा फहराया गया था और अब पीओके में रैली निकाली गई है।
इस्लामाबाद, अगस्त 23: आतंकवादी समूहों का समर्थन नहीं करने के पाकिस्तान के दावों का सोमवार को फिर से पर्दाफाश हो गया। पाकिस्तान में दो दिन पहले तालिबानी झंडे मदरसों पर लहराए गये थे और मदरसे की छात्राओं ने तालिबान के समर्थन में गीत गाए थे, लेकिन अब अफगानिस्तान के इस आतंकी संगठन के समर्थन में पाकिस्तानी अधिकृत कश्मीर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने रैली निकाली है। बड़ी बात ये है कि इस रैली का कोई विरोध नहीं किया गया।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रैली
रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के समर्थन में पाकिस्तान के कई इलाकों में जश्न मनाया जा रहा है। वहीं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में तालिबान के समर्थन में एक रैली का आयोजन किया गया। उस रैली का वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी समूहों जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कैडरों को रैली में भाग लेते और हवा में जश्न में गोलियां चलाते हुए देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, रैली के बाद बाद दोनों संगठनों के नेताओं ने रैलियों को संबोधित किया। इसके साथ ही इमरान खान सरकार के लिए और शर्मिंदगी की बात ये भी है कि कई पाकिस्तानी पत्रकारों ने दावा किया है कि तालिबान नेता मुल्ला बरादर और आईएसआई प्रमुख फैज हमीद ने एक साथ नमाज पढ़ी है।

तालिबान को पाकिस्तान का समर्थन
पाकिस्तान उन पहले देशों में से एक है जो अमेरिकी सेना की वापसी के मद्देनजर तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के समर्थन में सामने आया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और कई पाकिस्तानी मंत्रियों ने तालिबान के समर्थन में खुलकर बयान दिए हैं। इमरान खान ने तो यहां तक कहा कि तालिबान ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ दिया है। और कहा था कि तालिबान "बुरे लोग" नहीं हैं और इस्लाम के सिद्धांतों के माध्यम से अफगानिस्तान पर शासन करने की कोशिश कर रहे हैं। दो दिन पहले पाकिस्तान के एक स्कूल से एक वीडियो सामने आया था जिसमें छात्र तालिबान की तारीफ करते नजर आ रहे थे। वहीं, अमेरिका के एक शीर्ष रिपब्लिकन सांसद ने रविवार को आरोप लगाया कि, पाकिस्तान और उसकी खुफिया सेवा ने तालिबान को अफगानिस्तान में बढ़ावा दिया है, जिसकी मदद से तालिबान को काफी फायदा हुआ है।

तालिबान के समर्थन की निंदा
रिपब्लिकन सांसद स्टीव चाबोट ने कहा कि इस्लामाबाद को उस संगठन की जीत का जश्न मनाते देखना बेहद घृणित करने वाला है, जो अफगानिस्तान के लोगों के लिए अनकही क्रूरता लाएगा। 'इंडिया कॉकस' के सह-अध्यक्ष चाबोट ने 'हिंदू पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' के रविवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में भारत के अफगानिस्तान के उन धार्मिक अल्पसंख्यकों का स्वागत करने के कदम की सराहना की, जिनके पास तालिबान के शासन से डरने के उचित कारण हैं। अमेरिका सांसद ने आगे कहा कि, इससे उलट, हम सभी को पता है कि पाकिस्तान और खासकर उसकी गुप्तचर एंजेंसी आईएसआई ने तालिबान के पैर पसारने और देश पर कब्जा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी अधिकारियों को उस संगठन की जीत का जश्न मनाते देखना बेहद घृणित करने वाला है, जो अफगानिस्तान के लोगों के लिए अनकही क्रूरता लेकर लाएगा।

अलर्ट है भारत
तालिबान के अफगानिस्तान की राजधानी पर कब्जा होने के बाद पूरी दुनिया के कट्टरपंथी संगठन काफी ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे हैं। आशंका जताई जा रही है अफगानिस्तान से निकलकर आतंकी भारत की तरफ बढ़ सकते हैं, वहीं अफ्रीकी देशों में भी आतंकी वारदातों में इजाफा होने की आशंका जताई गई है। खासकर पीओके में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों द्वारा रैली निकालने की घटना को भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता है, क्योंकि ये आतंकी कश्मीर के जरिए भारत में दाखिल होकर अशांति फैला सकते हैं।












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