BRICS: IMF और वर्ल्ड बैंक की छुट्टी, डॉलर की दादागिरी होगी खत्म! दिल्ली की बैठक से ऐसे बदलेगा 'वर्ल्ड ऑर्डर'

BRICS Delhi Meeting: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का शंखनाद है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में भारत यह संदेश दे रहा है कि अब विकासशील देश पश्चिमी प्रभुत्व के आगे झुकने के बजाय अपनी शर्तों पर आगे बढ़ेंगे।

इस बैठक का मुख्य केंद्र डॉलर की निर्भरता खत्म करना (De-dollarization) और 'ब्रिक्स पे' (BRICS Pay) जैसे वैकल्पिक भुगतान तंत्र को मजबूत करना है। ईरान के शामिल होने से यह गठबंधन अब एक 'एनर्जी पावरहाउस' बन चुका है, जो IMF और वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं को चुनौती देने की ताकत रखता है। भारत की संतुलित कूटनीति का उद्देश्य एक ऐसी 'मल्टी-पोलर' दुनिया बनाना है जहां ग्लोबल साउथ की आवाज़ सुनी जाए। आइए 5 पॉइंट्स में समझते हैं कि दिल्ली की इस बैठक से क्या बड़ा निकलने वाला है।

BRICS Delhi Meeting

IMF और वर्ल्ड बैंक को सीधी चुनौती

सदियों से गरीब और विकासशील देश कर्ज के लिए पश्चिमी शर्तों पर निर्भर रहे हैं। BRICS अब अपने 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' (NDB) का विस्तार कर रहा है। दिल्ली बैठक में इस बैंक के फंड को बढ़ाने पर बड़ा फैसला हो सकता है, ताकि सदस्य देशों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के आर्थिक मदद मिल सके।

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'डी-डॉलराइजेशन': डॉलर का डर होगा खत्म?

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई देशों को लगा कि अमेरिका डॉलर को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है। इससे बचने के लिए सदस्य देश अपनी स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपया और युआन) में व्यापार का फ्रेमवर्क तैयार कर रहे हैं। अगर तेल का खेल डॉलर से बाहर निकला, तो अमेरिकी करेंसी की बादशाहत खतरे में पड़ जाएगी।

ईरान की एंट्री और 'एनर्जी' की ताकत

ईरान का BRICS में आना एक बड़ा गेम-चेंजर है। इसके जुड़ने से यह ग्रुप दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के एक बड़े हिस्से को कंट्रोल करेगा। बैठक में ईरान के जरिए एक नए आर्थिक कॉरिडोर पर चर्चा हो रही है, जो पश्चिमी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त होगा।

'BRICS Pay': बैंकिंग की नई क्रांति

SWIFT पेमेंट सिस्टम के विकल्प के तौर पर 'BRICS Pay' विकसित किया जा रहा है। यह ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित एक डिजिटल सिस्टम हो सकता है, जिससे सदस्य देश एक-दूसरे को सीधे पैसा भेज सकेंगे। यह ग्लोबल बैंकिंग में अमेरिका की 'जासूसी' और 'कंट्रोल' को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है।

भारत का 'ग्लोबल साउथ' विजन

भारत की भूमिका यहां सबसे अहम है। वह एक तरफ अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है, तो दूसरी तरफ BRICS का संस्थापक। भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि यह मंच किसी एक देश (जैसे चीन) के प्रभाव में न आए, बल्कि विकासशील देशों की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बने।

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