BRICS 2026 में क्यों नहीं आया China? Trump का दबाव या राजनीतिक संकट? ईरान ने कैसे ज्वाइन किया ग्रुप?
BRICS 2026: Brazil, Russia, India, China और South Africa जैसे देशों ने BRICS ग्रुप इसलिए बनाया था ताकि पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और यूरोप के बढ़ते दबदबे को टक्कर दी जा सके। इसका मकसद विकासशील देशों को एक मजबूत वैश्विक आवाज देना था ताकि दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सिर्फ पश्चिमी देशों का दबदबा न रहे। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि BRICS के सबसे बड़े सदस्यों में से एक China खुद इस मंच को लेकर दबाव महसूस कर रहा है। खास बात यह है कि यह दबाव अमेरिका की तरफ से माना जा रहा है।
नई दिल्ली की BRICS से China ने बनाई दूरी
चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को घोषणा की कि 14 मई को भारत में होने वाली BRICS बैठक में China की तरफ से कोई भी हाई-लेवल प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump 13 मई को Beijing पहुंच रहे हैं। ट्रंप 14 और 15 मई को चीन में कई अहम बैठकों में हिस्सा लेने वाले हैं। यानी जिस समय भारत में BRICS बैठक हो रही होगी, उसी समय चीन का फोकस अमेरिका और Donald Trump के साथ बातचीत पर रहेगा।

क्या Trump के दबाव में बदली China की रणनीति?
अब चीन की इस दूरी को सीधे तौर पर Donald Trump के पुराने BRICS-विरोधी बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है। Trump लंबे समय से BRICS को लेकर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। उन्होंने कई बार आरोप लगाया कि BRICS देश अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा Trump ने यह भी कहा था कि जो देश BRICS के साथ बने रहेंगे या उसकी America Anti-Policy को सपोर्ट करेंगे, उन्हें अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
Trump पहले भी दे चुके हैं खुली चेतावनी
Donald Trump ने पहले खुले तौर पर दावा किया था कि उनकी चेतावनियों के कारण कई देश BRICS से दूरी बनाने लगे हैं। अब China का भारत में होने वाली BRICS बैठक में हाई-लेवल प्रतिनिधि न भेजना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि China ने आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई कारण नहीं बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार इसे अमेरिका-चीन बातचीत और व्यापारिक दबाव से जोड़कर देख रहे हैं।
पॉलिटिकल संकट से भी जूझ रहा चीन
एक वजह ये भी है कि चीन एक बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग फिलहाल नेताओं की कमी से जूझ रहे हैं। उसका बड़ा कारण हैं कि जिनपिंग ने पिछले 12 महीनों में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के तहत कई बड़े नेताओं को ठिकाने लगा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व रक्षा मंत्री Li Shangfu और Wei Fenghe समेत कई बड़े नेताओं को भ्रष्टाचार मामलों में सजा दी गई। इसके अलावा कुछ मंत्रियों को पद से भी हटाया गया है।
BRICS की अध्यक्षता बनाम अमेरिका से रिश्ते
फिलहाल BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। ऐसे समय में अमेरिका लगातार भारत के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में Donald Trump ने अपने करीबी सहयोगी Sergio Gor को भारत में अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Sergio Gor हाल ही में अमेरिका से नई दिल्ली लौटे हैं और उनका फोकस खास तौर पर QUAD Summit और India-US Trade Relations को मजबूत करने पर है।
14 मई की बैठक में कौन-कौन से देश होंगे शामिल?
नई दिल्ली में 14 मई को होने वाली BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में कई बड़े देशों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं-
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Brazil
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Russia
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South Africa
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Egypt
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Ethiopia
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Iran
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Indonesia
जानकारी के मुताबिक UAE और Iran का प्रतिनिधित्व Deputy Foreign Minister Level पर हो सकता है।
वहीं China की तरफ से सिर्फ Sherpa Delegation शामिल होने की संभावना बताई जा रही है।
BRICS 2026 में कैस पहुंचा ईरान?
ईरान को BRICS में बुलाने करने और बाद में सदस्यता देने का फैसला BRICS के विस्तार (expansion) के हिस्से में हुआ, जिसमें ब्रिक्स ने 2023–2024 के दौर में मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र के कुछ प्रमुख देशों को शामिल करने का फैसला लिया। इसके पीछे एक बड़ा कारण ये भी रहा कि ईरान एनर्जी से सम्पन्न देश है। ऐसे में उसका BRICS में आना ग्रुप के लिए अच्छा ही रहता।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
इस BRICS बैठक में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। जिनमें-
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Global South की भूमिका
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Multilateral Cooperation
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Economic Partnership
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Regional Security
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मौजूदा Geopolitical Tensions
यानी यह बैठक सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
भारत ने क्या रखा है इस बार का थीम?
भारत ने अपनी BRICS Presidency के लिए इस बार एक खास थीम तय की है- Building Resilience, Innovation, Cooperation and Stability. इसी थीम के तहत 13 जनवरी को BRICS 2026 की वेबसाइट, थीम और लोगो लॉन्च किए गए थे।
क्या BRICS में बढ़ रही है अंदरूनी राजनीति?
China की इस दूरी के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या BRICS के अंदर भी राजनीतिक दबाव और रणनीतिक बदलाव शुरू हो चुके हैं? एक तरफ BRICS खुद को पश्चिमी प्रभाव के विकल्प के रूप में पेश करता है, वहीं दूसरी तरफ उसके सबसे बड़े सदस्य देशों में से एक China का अमेरिका के साथ संबंधों को प्राथमिकता देना कई संकेत दे रहा है।
Global Politics में क्यों अहम है BRICS?
अगर China वास्तव में अमेरिका के दबाव में BRICS से दूरी बना रहा है, तो इसका असर सिर्फ इस संगठन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि-
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Global Trade
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Dollar Dominance
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India-China Relations
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US-China Diplomacy
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और Global South Politics
पर भी देखने को मिल सकता है।
यानी आने वाले दिनों में BRICS की दिशा और ताकत काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके सदस्य देश अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के बीच किस तरह बैलेंस बनाते हैं।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।
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