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BrahMos: फिलीपींस, वियतनाम के बाद चीन का एक और पड़ोसी खरीदेगा ब्रह्मोस, भारतीय मिसाइल से क्यों डरता है ड्रैगन?

BrahMos Deal: भारतीय ब्रह्मास्त्र, यानि ब्रह्मोस मिसाइल से चीन डरता है और इसीलिए ड्रैगन के पड़ोसियों में ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की रेस लगी हुई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को अपने गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए काम कर रहा है और इस दौरान ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर अहम समझौता हो सकता है।

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को लेकर बातचीत हो रही है। इसके अलावा, रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि भारत, मिसाइल के निर्यात के बारे में कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बातचीत कर रहा है और पिछले महीने (दिसंबर 2024) में, जब भारतीय नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने इंडोनेशिया का दौरा किया था, तो ब्रह्मोस की संभावित बिक्री पर चर्चा हुई थी।

brahmos indonesia missile deal

भारत-इंडोनेशिया में ब्रह्मोस मिसाइल डील? (India-Indonesia Brahmos Missile Deal)

इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री, सजाफ्री स्जामसोएद्दीन ने हाल ही में पुष्टि की है, कि ब्रह्मोस तकनीक पर सहयोग एजेंडे में था। यह सौदा पिछले कुछ समय से विचाराधीन था, लेकिन बजट की कमी के कारण इंडोनेशियाई सरकार आगे नहीं बढ़ पाई। और अब इंडोनेशियाई राष्ट्रपति, रक्षा बजट में वृद्धि के लिए दबाव बना रहे हैं।

इंडोनेशियाई राष्ट्रपति की नई दिल्ली यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में तेजी आने की संभावना है, खासकर इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइलों की बिक्री में।

सितंबर 2024 में इंडोनेशिया के National Resilience Institute के मेजर जनरल युनियांतो के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने संभावित सैन्य सहयोग पर चर्चा करने के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस का दौरा किया था। इंडोनेशिया, जो अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है, वो ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई-लॉन्च किए गए संस्करण में काफी दिलचस्प रखता है। इंडोनेशिया पहले से ही रूसी Su-27 लड़ाकू विमानों और किलो-क्लास पनडुब्बियों का संचालन करता है और ब्रह्मोस मिसाइल उसके लिए मुफीद सौदा हो सकता है।

ब्रह्मोस, भारत और रूस के बीच एक संयुक्त उद्यम से बनाई गई मिसाइल है। और मिसाइल की बिक्री के लिए भारत और रूस, दोनों की मंजूरी होना जरूरी है। चूंकी इंडोनेशिया कई रूसी हथियारों का संचालन करता है, इसलिए रूस को ब्रह्मोस मिसाइल डील को लेकर किसी आपत्ति की उम्मीद नहीं है।

भारत, इंडोनेशिया को भारतीय स्टेट बैंक या किसी अन्य भारतीय राष्ट्रीय बैंक से ऋण देने की पेशकश कर सकता है। शुरुआत में, EXIM (निर्यात-आयात) बैंक को ऋण की प्रक्रिया करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

भारत के 'ब्रह्मास्त्र' या आकाशीय हथियार कहे जाने वाले ब्रह्मोस, भारत के परमाणु त्रय का हिस्सा है, जो देश को परमाणु हथियार से प्रभावित होने के बाद वापस हमला करने की अनुमति देता है। यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, और इसे पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों या भूमि प्लेटफार्मों से लॉन्च किया जा सकता है।

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चीन को पड़ोसियों में ब्रह्मोस खरीदने की रेस

भारत, पहले से ही ब्रह्मोस मिसाइलों के लिए 700 मिलियन डॉलर के सौदे के लिए वियतनाम के साथ बातचीत कर रहा है, जबकि फिलीपींस पहले से ही भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदकर उसे दक्षिण चीन सागर में तैनात कर चुका है।

भारत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को चीन के विस्तारवादी मंसूबों के खिलाफ मदद करने के लिए अपने हथियार सिस्टम को आगे बढ़ा रहा है। भारत, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को उनकी रक्षा को मजबूत करने में मदद करने के लिए लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) पद्धति के माध्यम से काम कर रहा है।

ब्रह्मोस के नए महानिदेशक जयतीर्थ जोशी ने कहा है, कि फर्म को जल्द ही एक नया निर्यात ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, "ऐसे कई देश हैं जिन्होंने ब्रह्मोस खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। हम सभी इच्छुक पक्षों के साथ अपनी बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं और जल्द ही अपने अगले निर्यात ऑर्डर पर हस्ताक्षर करने के लिए काफी आशान्वित हैं।" सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस के भारतीय-रूसी निर्माता के ऑर्डर का पोर्टफोलियो 7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।

इससे पहले 2024 में, रूसी एजेंसी TASS ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रबंध सह-निदेशक अलेक्जेंडर मक्सिचेव के हवाले से कहा था, कि इंडोनेशिया, वियतनाम और संयुक्त अरब अमीरात ने मिसाइल में दिलचस्पी दिखाई है।

भारत के पास ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड में 50.5% की बड़ी हिस्सेदारी है, जबकि रूस के पास 49.5% हिस्सेदारी है, जिसका मतलब है कि मॉस्को संयुक्त उद्यम में एक जूनियर वित्तीय भागीदार है। हालांकि, ब्रह्मोस की तकनीकी साझेदारी के मामले में यह बड़ा भाई है और संभावित खरीदारों पर वीटो लगाने की शक्ति रखता है।

ब्रह्मोस मिसाइल को क्यों कहा जाता है ब्रह्मास्त्र?

ब्रह्मोस, ध्वनि की गति से तीन गुना ज्यादा गति से उड़ता है, जिससे दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना और मार गिराना मुश्किल हो जाता है। इसकी एक खासियत यह है, कि यह मिसाइल रक्षा प्रणालियों से बचने के लिए जमीन के बेहद करीब से उड़ान भर सकता है। वास्तव में, टर्मिनल चरण के दौरान, मिसाइल जमीन से 10 मीटर की गहराई तक उड़ सकती है।

हवा में उड़ने वाला ब्रह्मोस भारतीय सशस्त्र बलों के लिए "प्रमुख पारंपरिक हमला करने वाला हथियार" बन गया है। भारतीय सेना ने चीन के साथ अपनी सीमा पर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में मिसाइलों के जमीनी संस्करण को तैनात किया है।

भारतीय नौसेना के दस युद्धपोतों में ब्रह्मोस मिसाइल लगाया गया है और पांच अन्य जहाजों में ब्रह्नोस लगाने की तैयारी चल रही है। इंडियन एयरफोर्स ने ब्रह्मोस के हवाई संस्करण को वितरित करने के लिए अपने 40 सुखोई को संशोधित किया है, और सरकारी स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) विमान निर्माता उन सभी को क्रमिक रूप से संशोधित करेगी।

पिछले कुछ वर्षों में ब्रह्मोस में कई अपग्रेड किए गए हैं, जिसमें बेहतर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में बदलाव किए गए हैं, जिससे इसकी रेंज में बढ़ोतरी हुई है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने के अलावा अपनी मिसाइल के अन्य संस्करण भी विकसित करने की प्रक्रिया में है, जिसकी गति मैक 8 होगी और संभावित रेंज 800 किमी होगी।

2024 की शुरुआत में, भारतीय नौसेना ने अपनी विस्तारित-दूरी वाली भूमि-हमला ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया था। ब्रह्मोस भारतीय नौसेना का प्राथमिक हथियार बन गया है और ब्रह्मोस के साथ सभी पुरानी मिसाइलों की जगह ले रहा है।

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