RudraM-II: चीनी J-20 को आसमान में ही भस्म कर डालेगा भारत का महाकाल, देश की नई ताकत पर होगा गर्व
RudraM-II: चीन ने भारत को अपनी ताकत दिखाने के लिए सिक्किम की सीमा से सिर्फ 150 किलोमीटर की दूरी पर अपना स्टील्थ फाइटर जेट J-20 को तैनात कर दिया है, जिसको लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है, कि ये भारत के लिए चिंता की बात है।
लेकिन, भारत ने एक ऐसी ताकत का सफल परीक्षण किया है, जो चीनी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान J-2O फाइटर जेट को आसमान में ही भस्म कर डालेगा। भारत ने सबसे खतरनाक दुश्मन चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए रुद्रएम-II हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल का कामयाब परीक्षण किया है।

रुद्रएम-II मिसाइल एक सुपरसोनिक रफ्तार वाली मिसाइल है, जिसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों का काल कहा जाता है और माना जा रहा है, कि चीनी जे-20 फाइटर जेट जैसे स्टील्थ फाइटर जेट जब इसकी जद में आएंगे, तो आसमान में ही उसके परखच्चे उड़ जाएंगे।
भारत की नई ताकत रुद्रएम-II मिसाइल
भारत ने रुद्रएम-II मिसाइल को रूस के विनाशक Kh-31PD मिसाइल से प्रेरणा लेकर बनाया है, जो एयर टू सरफेस मिसाइल है, जिसे अब प्यार से 'सुपरसोनिक डेथ' कहा जाता है।
रुद्रएम-II, भारत में बनी एक स्वदेशी सॉलिड-प्रोपेल्ड मिसाइल सिस्टम है, जिसे खास तौर पर दुश्मनों के हथियार भंडार, उसके फाइटर जेट्स और सैन्य प्रॉपर्टी को ध्वस्त करने के लिए डिजाइन किया गया है। भारत ने अपनी इस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा तट से भारतीय वायु सेना के Su-30MK-I प्लेटफॉर्म से किया है।
DRDO के मुताबिक, रुद्रएम-II मिसाइल ने परीक्षण के दौरान अपनी सभी उद्येश्यों को प्राप्त कर लिया है और उड़ान के दौरान कंट्रोल, नेविगेशन और वेलिडेटिंग प्रपल्शन एल्गोरिदम को फॉलो किया है। आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, मिसाइल के प्रदर्शन को इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम, रडार और टेलीमेट्री स्टेशनों सहित रेंज ट्रैकिंग उपकरणों द्वारा कैप्चर किए गए उड़ान डेटा का उपयोग करके सत्यापित किया गया, जिन्हें इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर द्वारा जहाजों सहित अलग अलग स्थानों पर तैनात किया गया था।
कितनी खतरनाक है ये मिसाइल?
भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के सहयोग से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रुद्रएम-II को तैयार किया है, जिसने भारत की रक्षा क्षमताओं को काफी बढ़ा दिया है।
भारत ने इन मिसाइलों के विकास का कार्यकम करीब 8 साल पहले शुरू किया था, जिसका मकसद भारतीय वायुसेना की सामरिक क्षमता को बढ़ाना था।
भारत सरकार की योजना आने वाले वक्त में तेजस फाइटर जेट, AMCA और TEDBF समेत तमाम भारतीय अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में रुद्रएम-II मिसाइल को फिट करने की योजना है, ताकि देश की वायुशक्ति एक नये लेवल को हासिल कर सके। ये मिसाइलें मिग-29, मिराज, जगुआर और सुखोई विमानों में भी लगाई जा सकती हैं, जो भारत के दुश्मनों के खिलाफ एक खतरनाक डिफेंस प्रदान करती हैं।

चीन का जे-20 फाइटर जेट कितना खतरनाक?
चीन ने सिक्किम सीमा से महज पत्थर फेंकने की दूरी पर स्थित एयर बेस शिगात्से में अपने दुर्जेय जे-20 स्टील्थ लड़ाकू विमानों को तैनात करके अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता की स्थिति है।
भारत के रुद्रएम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से ठीक एक दिन पहले, ऐसी खबरें आईं थीं, कि जे-20 'माइटी ड्रैगन' ने पश्चिम बंगाल के हासीमारा से सिर्फ 290 किलोमीटर की दूरी पर अपनी स्थिति संभाल ली है, जहां भारत के 16 राफेल जेट विमानों का दूसरा स्क्वाड्रन पहरा दे रहा है।
जे-20 लड़ाकू विमान को चीन के चेंगदू एयरोस्पेस कॉरपोरेशन ने विकसित किया है और ये डबल सीटर ऑल वेदर स्टील्थ पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसे हवाई श्रेष्ठता हासिल करने और सटीक हमलों के लिए डिजाइन किया गया है। चीन दावा करता है, कि जे-20 लड़ाकू विमान, रडारों को चकमा देने की क्षमता रखता है, लिहाजा भारत को खुद का पांचवीं पीढ़ी का विमान बनाने से पहले, चीनी खतरे को काउंटर करने के लिए हथियार की जरूरत थी रुद्रएम-2 मिसाइल इसमें अहम भूमिका निभा सकती है।
रूस के 'सुपरसोनिक डेथ' पर आधारित है रुद्रएम-2
रूस की दुर्जेय Kh-31PD मिसाइल से प्रेरणा लेते हुए भारत ने रुद्रएम-II मिसाइल को तैयार किया है, जो दुश्मन की हवाई सुरक्षा के खतरे को खतरनाक अंदाज में काउंटर करे।
Kh-31PD मिसाइल को रूस के पायलटों ने उसकी खतरनाक रफ्तार और विनाशकारी हमला करने की ताकत की वजह से 'सुपरसोनिक डेथ' नाम दिया है और इस मिसाइल ने यूक्रेन के युद्ध मैदानों पर खुद को विनाशक हथियार के रूप में साबित किया है, और इसकी सफलता प्रतिशत 98% है।
भारत ने साल 2001 में रूस से Kh-31 मिसाइल के साथ साथ अपने Su-30MKI फाइटर जेट के लिए 60 Kh-31A और 90 Kh-31P वेरिएंट हासिल की थी। जुलाई 2019 में ऐसी रिपोर्ट्स आईं थीं, कि भारत ने कई और Kh-31 मिसाइलों की खरीददारी की है। रूसी मिसाइल की सबसे खास बात ये है, कि इसे काफी आसानी से रूसी जेट्स में लगाया जा सकता है और भारत के ज्यादातर हथियार रूसी हैं।
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