Akash, Pinaka, BrahMos, Tejas.. घातक हथियार बेचने में भारत बना रहा दबदबा, कैसे बनेगा Top-10 डिफेंस एक्सपोर्टर?
Top 10 Big Weapon Exporter: भारत की पहचान अभी तक दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीददार देश के तौर पर रही है, लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत, हथियार बेचने वाले देश के तौर पर भी अपनी पहचान कायम कर रहा है।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में घोषणा की है, कि भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पहली बार 21,000 करोड़ (2.63 अरब डॉलर) को पार कर गया है और भारत अपने हथियार बेचने की क्षमता को दोगुना करना चाहता है।

लिहाजा, भारत की इस आकांक्षा को पूरा करने के लिए LCA तेजस, ब्रह्मोस मिसाइल, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर्स, पिनाका MLRS, आकाश SAM जैसे विनाशक हथियार अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हथियारों का बड़ा बाजार बनेगा भारत!
डिफेंस एक्सपोर्ट में अपनी पहचान बनाना दुनियाभर के देशों में डिफेंस इंडस्ट्रीज एक प्रमुख लक्ष्य रहा है। क्योंकि, इससे डिफेंस इंडस्ट्रीज को बगैर सरकारी मदद नये हथियारों के निर्माण के लिए रिसर्च करना, टेक्नोलॉजी बनाना, डिजाइ बनाना और प्रोडक्शन शुरू करना काफी आसान हो जाता है। दुनिया के जो भी विकसित देश हैं, उन्होंने अपनी डिफेंस इंडस्ट्री को तेजी से बढ़ाया है। अमेरिका, जापान, इजराइल और फ्रांस जैसे देशों ने टॉप-10 डिफेंस एक्सपोर्टर्स में अपना स्थान बनाया है।
साल 2019 से 2023 तक ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट में अकेले अमेरिका की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत रही है।
डिफेंस एक्सपोर्ट ना सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने का काम करता है, बल्कि ये दो देशों के बीच के राजनयिक संबंधों को भी मजबूत करता है, जिससे घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार वाले देश, अक्सर मित्र देशों को ही हथियार निर्यात करना पसंद करते हैं।
शीत युद्ध के दौरान से ही भारत को सोवियत संघ हथियारों को लेकर आपस में जुड़े हुए हैं और सोवियत संघ ने लगातार भारत को हथियारों की आपूर्ति की है और इसी का नतीजा है, कि भारत और रूस में अभी भी द्विपक्षीय संबंध मजबूत हैं।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की फैक्ट शीट 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में दुनिया में 66 देश हथियार निर्यात कर रहे हैं। जिनमें शीर्ष पांच हथियार निर्यातक संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी हैं, जिनका वैश्विक रक्षा निर्यात में 75% हिस्सा है।
पिछले दशक में, दक्षिण कोरिया और तुर्की जैसे कई नए खिलाड़ी हथियार बेचने वाले देशों में शामिल हुए हैं। वहीं, अब भारत वैश्विक हथियार निर्यात लिस्ट में अपना स्थान बनाने की कोशिश कर रहा है और मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान ही (साल 2015 से) डिफेंस एक्सपोर्ट में फोकस कर रहा है।

डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत का स्थान
साल 2023 तक भारत SIPRI की वैश्विक हथियार निर्यातकों की लिस्ट में 23वें स्थान पर है। हथियार निर्यात बाजार में भारत की स्थिति को और बढ़ाने के लिए, भारत सरकार ने कई नीतिगत पहल की हैं। 2025 तक डिफेंस एक्सपोर्ट में 5 अरब डॉलर का लक्ष्य निर्धारित करना भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।
मार्च 2024 में सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए रक्षा निर्यात के आंकड़े जारी किए हैं, जिसके मुताबिक, साल 2023-24 में भारत का रक्षा निर्यात ₹21,083 करोड़ (2.68 अरब डॉलर) तक पहुंच गया। वहीं, पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वर्ष डिफेंस एक्सपोर्ट में 32.6% की वृद्धि दर्ज की गई। सार्वजनिक क्षेत्र की 40% की तुलना में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 60% थी।
2015 से पहले, भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री मुख्य रूप से भारतीय सशस्त्र बलों की घरेलू मांगों को पूरा करने पर फोकस थी। लिहाजा भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट काफी मामूली था।
साल 2013-14 में भारत ने सिर्फ 686 करोड़ रुपये के ही हथियार बेचे थे। लेकिन, 2023-24 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 21,083 करोड़ हो गया है, जो पिछले दशक के मुकाबले 31 गुना ज्यादा है।
भारत वर्तमान में 84 देशों को डिफेंस सामानों का निर्यात कर रहा है। इनमें डिफेंस हार्डवेयर जैसे गश्ती जहाज, लो-बैंड रडार, एंटी-टैंक हथियार, बख्तरबंद वाहन, टॉरपीडो, बुलेटप्रूफ जैकेट, छोटे हथियार, तोपखाने बंदूकें, रॉकेट लॉन्चर, सेंसर और नाइट विजन डिवाइस शामिल हैं।
भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा रहा है, लेकिन, भारतीय डिफेंस एक्सपोर्ट मुख्य तौर पर टेक्नोलॉजी से दूर रहा है। भारतीय डिफेंस सेक्टर टेक्नोलॉजी की कमजोरी से जूझता रहा है। इसलिए, भारत को अपने निर्यात का मूल्य बढ़ाने के लिए उच्च-स्तरीय प्रौद्योगिकी-आधारित हथियार प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
लेकिन, इसके बाद भी भारत ने कुछ विनाशक हथियार स्वदेशी तौर पर बनाए हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा है।

भारत के विनाशक हथियार कौन कौन हैं?
हवाई क्षेत्र में, भारत ने एक लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA), तेजस, एक एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), ध्रुव, एक लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH), प्रचंड और एक लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) विकसित किया है।
वहीं, जमीनी हथियार में भारत ने मेन बैटल टैंक (MBT) अर्जुन और कई हॉवित्जर और MLRS विकसित किए हैं।
इसी तरह, भारत ने समुद्री क्षेत्र में आक्रामक और रक्षात्मक भूमिकाओं के लिए कई जहाजों और एक एयरक्राफ्ट कैरियर का डिजाइन और निर्माण किया है।
ये सभी डिफेंस प्रोडक्ट्स पूर्ण हथियार प्रणालियां हैं, जिसका मतलब ये हुआ, कि इन्हें बेचने के साथ साथ इनके सामानों और उपकरणों की भी बिक्री शामिल होती है। उदाहरण के लिए, किसी फाइटर जेट के निर्यात में कंप्लीट वीपन सिस्टम, फ्लाइट सिमुलेटर, हैंगर, लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स (एलआरयू), मैंटिनेंस और ओवरहाल (एमआरओ) शामिल होते हैं।
कंप्लीट वीपन सिस्टम के निर्यात का सबसे बड़ा फायदा ये है, कि उस हथियार की जितनी जीवनरेखा होगी, उतने दिनों तक हथियार खरीदने वाला देश, हथियार बेचने वाले देश पर निर्भर रहेगा।
लिहाजा, भारत अगर एक महत्वपूर्ण हथियार बाजार बनना चाहता है, तो उसे उन हथियारों की पहचान करनी होगी, जिसका कंप्लीट वीपन सिस्टम भी भारत तैयार कर सकता है, ताकि भविष्य में ऐसे हथियार बनाए जाएं, जो किसी देश को रणनीतिक तौर पर भारत से जोड़े।
टैंक, लड़ाकू विमान और बड़े विस्थापन जहाजों जैसे उच्च कीमत वाले डिफेंस प्लेटफार्मों को विकसित करने के अलावा, भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री ऐसे हथियार और गोला-बारूद विकसित करने पर काम कर सकता है जिन्हें दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले मौजूदा विमानों, टैंकों और जहाजों में लगाया जा सकता है।
और इजराइली डिफेंस इंडस्ट्री इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इजराइली डिफेंस इंडस्ट्री विभिन्न प्रकार के हथियार और गोला-बारूद विकसित करता है, जैसे बख्तरबंद वाहक, तोपखाने बंदूकें, टैंक, जिसकी सप्लाई कई देशों में की जाती है।
हालांकि, इजराइली डिफेंस इंडस्ट्री पहले से ही डिफेंस सेंसर, मिसाइल, गोला बारूद, वार सिस्टम, डिफेंस सिस्टम, रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और वार मैनेजमेंट सिस्टम बनाने के लिए प्रसिद्ध रहा है, जिसे किसी भी प्लेटफॉर्म पर लगाया जा सकता है, चाहे वो प्लेटफॉर्म रूसी हों या फिर किसी पश्चिमी देश के।
लिहाजा, प्रोडक्ट आधारित इजराइली डिफेंस इंडस्ट्री, डिफेंस एक्सपोर्ट में काफी ज्यादा योगदान देते हैं और भारत भी इजराइली डिफेंस प्रोडक्ट का एक महत्वपूर्ण खरीददार रहा है। भारतीय सशस्त्र बल जिन फ्रांसीसी, रूसी और भारतीय प्लेटफार्मों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें कई तरह के इजरायली हथियार, गोला-बारूद, सेंसर, वार मैनेजमेंट सिस्टम और कम्युनिकेशन सिस्टम को शामिल किया गया है।
भारत सरकार वर्तमान में डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए ऋण सहायता और डिफेंस अताशे की भूमिका का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वर्तमान में प्रस्तावित ज्यादातर डिफेंस एक्सपोर्ट ऋण व्यवस्था के तहत हैं। यानि, भारत किसी देश को ऋण देकर अपना हथियार बेचता है।
हालांकि, भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं और अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस, इजराइल, दक्षिण कोरिया समेत दर्जन भर से ज्यादा मजबूत प्रतिद्वंदी हैं, जिन्होंने अपने डिफेंस टेक्नोलॉजी का लोहा मनवाया है, लिहाजा भारत को डिफेंस सेक्टर में अपनी विश्वसनीयता मजबूत करनी होगी, ताकि भारतीय हथियार खरीदने को लेकर ज्यादा से ज्यादा देशों में दिलचस्पी पैदा होगा।












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