Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

दक्षिण चीन सागर में आज से भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती! चीन के दुश्मन के हाथ होगा आज का 'ब्रह्मास्त्र'

India-Philippines BrahMos Missiles: भारतीय वायु सेना का सी-17 ग्लोबमास्टर और रूसी आईएल-76 महत्वपूर्ण कार्गो के साथ आज दक्षिण चीन सागर के लिए उड़ान भरेंगे, जो क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत को काउंटर करने में उसके दुश्मनों की मदद करेंगे।

यूरेशियन टाइम्स ने नाम ना छापने की शर्त पर एक अधिकारी के हवाले से इस बात की पुष्टि की है, कि आज भारत, दो ब्रह्मोस मिसाइलों की डिलीवरी फिलीपींस को देगा और भारतीय वायुसेना के दो भारी भारोत्तोलक विमान, फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलें पहुंचाएंगे।

India to deliver BrahMos

वहीं, धीरे धीरे बाकी मिसाइलों की डिलीवरी भी शुरू कर दी जाएगी और उसके बाद फिलीपींस की सेना को ब्रह्मोस मिसाइल ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं, फिलीपींस के एक मीडिया ऑउटलेट, मनीला बुलेटिन ने भी डिलीवरी से जुड़े एक सूत्र के हवाले से कहा है, कि क्लार्क अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली के आगमन की संभावित तारीख 19 अप्रैल है।

सूत्र ने कहा, कि भारतीय मिसाइल प्रणाली "कथित तौर पर" चीनी आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए "आ रही है" और इसकी पुष्टि की गई है। हालांकि, हमारे पास ये जानकारी नहीं है, कि खबर लिखे जाने तक, ब्रह्मोस मिसाइल की डिलीवरी हो चुकी है या नहीं।

दक्षिण चीन सागर में आज से भारतीय मिसाइल की तैनाती

फिलीपींस की सशस्त्र सेना (एएफपी) ब्रह्मोस मिसाइल की डिलीवरी को लेकर काफी "उत्साहित" है। लेकिन, एएफपी और राष्ट्रीय रक्षा विभाग (डीएनडी) ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है। हालांकि, फिलीपींस की सेना दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल को फिलीपीन मरीन कॉर्प्स (पीएमसी) में शामिल करने को लेकर काफी उत्सुक है।

वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए फिलीपींस की सशस्त्र सेना (एएफपी) के प्रवक्ता कर्नल फ्रांसेल मार्गारेथ पाडिला ने कहा, कि "हम तब तक टिप्पणी नहीं कर सकते, जब तक कि क्षमता हमें नहीं सौंप दी जाती। जैसे ही उपकरण औपचारिक रूप से एएफपी को सौंप दिया जाएगा, हम जानकारी प्रदान करेंगे।"

जबकि, एएफपी सार्वजनिक मामलों के कार्यालय के प्रमुख कर्नल ज़ेरक्सेस त्रिनिदाद ने कहा, कि "(हमें) उम्मीद है, कि इसे इस्तेमाल करने के लिए फौरन एएफपी को सौंप दिया जाएगा।"

आपको बता दें, कि 17 फरवरी 2023 को, इक्कीस फिलीपींस मरीन के एक बैच ने ब्रह्मोस एंटी-शिप सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के संचालन और रखरखाव को लेकर ट्रेनिंग हासिल किया था।

ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री सरकार-से-सरकार (जी2जी) सौदे के माध्यम से भारत और फिलीपींस के बीच की गई थी। इस सौदे में तीन मिसाइल बैटरियों की डिलीवरी, ऑपरेटरों और अनुरक्षकों के लिए प्रशिक्षण और आवश्यक इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स सपोर्ट (आईएलएस) पैकेज शामिल है। एक एकल मिसाइल बैटरी में आमतौर पर तीन मोबाइल ऑटोमेटिक लांचर होते हैं, जिनमें से प्रत्येक में दो या तीन मिसाइल ट्यूब होते हैं, साथ ही इसके ट्रैकिंग सिस्टम भी होते हैं।

दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता को काउंटर करने के लिए फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल खरीदा है, जिसके बारे में कहा जाता है, कि फिलहाल चीन के एयर डिफेंस में इतनी शक्ति नहीं है, कि वो ब्रह्मोस मिसाइल को ट्रैक करके उसे रोक सके।

भारत-फिलीपींस में ब्रह्मोस डील

ब्रह्मोस मिसाइलें, जिनका नाम भारतीय नदी ब्रह्मपुत्र और रूसी नदी मोस्कोवा को मिलाकर रखा गया है, उसे भारतीय वायुसेना के भारी एयरलिफ्टरों-रूसी आईएल-76 और अमेरिकी सी-17 ग्लोबमास्टर, दक्षिण पूर्व एशियाई देश फिलीपींस को पहुंचाने जाएंगे। ये मिसाइल इकाइयां, दुनिया की सबसे लंबी तटरेखा वाले देश को सुरक्षित करने में मदद करेंगी।

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में समुद्री सुरक्षा और एशियाई सुरक्षा वास्तुकला विशेषज्ञ डॉ. पूजा भट्ट ने कहा, कि "ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को दक्षिण चीन सागर में ना सिर्फ चीनी खतरों से निपटने के लिए तैनात किया गया है, बल्कि ये मिसाइल सिस्टम फिलीपींस की ताकत को भी बढ़ाता है। इसके अलावा, यह मिसाइल सिस्टम पश्चिम फिलीपींस सागर में अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा करने के मजबूत इरादे वाले चीन के विरोधी देशों को एक मजबूत भू-रणनीतिक संकेत भी भेजता है।"

ब्रह्मोस का लक्ष्य फिलीपींस के साथ लगभग 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर का फॉलो-ऑन ऑर्डर हासिल करना भी है। ऐसी उम्मीद है, कि फिलीपींस सेना जमीन से ऑपरेट होने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों का ऑर्डर भी भारत को देने वाली है।

चीन के खिलाफ खुद को मजबूत करता फिलीपींस

दक्षिण चीन सागर के पूरे हिस्से पर चीन अपना दावा करता है और फिलीपींस, इंडोनेशिया, ब्रूनेई, मलेशिया जैसे देशों के दावे को सिरे से खारिज करता है। इसके अलावा, चीन इन देशों को दक्षिण चीन सागर में अकसर धमकाता रहता है, जिसको लेकर साल 2013 से फिलीपींस ने अपनी सेना को मजबूत, आधुनिक और चीन को जवाब देने की स्थिति नें बनाना शुरू किया।

इसी कड़ी में 31 दिसंबर 2021 को फिलीपींस के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की थी, कि उसने ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को 374 मिलियन डॉलर में तट-आधारित एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति करने के उसके प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का ऑर्डर दिया है।

ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, और इसे पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों या फिर भूमि आधारित प्लेटफार्मों से भी लॉन्च किया जा सकता है। यह आवाज की रफ्तार से तीन गुना ज्यादा गति से उड़ान भरता है, लिहाजा दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना और मार गिराना काफी मुश्किल हो जाता है।

मिसाइल प्रणाली की डिलीवरी ऐसे समय में हुई है, जब दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के बीच तनाव के कारण आक्रामक सैन्य टकराव शुरू हो चुके हैं।

पिछले एक दशक में, चीन ने पैरासेल्स और स्प्रैटलिस नामक दो द्वीप श्रृंखलाओं का उपयोग करके, इन दक्षिण चीन सागर के जल पर पहले से ज्यादा नियंत्रण होने का दावा कर दिया है। दक्षिण चीन सागर में चीन ने कई कृत्रिम द्वीप भी बनाए हैं, जिससे उसका दावा और मजबूत है और कई अलग अलग द्वीपों पर बीजिंग ने सैन्य चौकियों और हवाई पट्टियों का निर्माण भी किया है। लेकिन, फिलीपींस ने अब बीजिंग के क्षेत्रीय दावों का काफी आक्रामकता के साथ सशक्त प्रतिरोध करना शुरू कर दिया है।

फिलीपींस के अलावा, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया ने भी ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिस तरह से चीन हिंद महासागर में घुसने के लिए भारत के पड़ोसी देशों पर डोरे डालता है, भारत उससे भी ज्यादा आक्रामक होकर, दक्षिण चीन सागर में चीन के पड़ोसी देशों के साथ ना सिर्फ अपने संबंधों को अत्यधिक मजबूत कर रहा है, बल्कि उन्हें ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें भी दे रहा है, जिसको चीन अकसर तनाव भड़काने वाला कदम करार देने की कोशिश करता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+