चीन से बढ़ती नजदीकी के बीच भारत पहुंचे भूटान के राजा, क्या डोकलाम पर मोदी सरकार को दे पाएंगे भरोसा?
Bhutan King Jigme Khesar Namgyel India Visit: भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक की शुक्रवार से शुरू होने वाली आठ दिवसीय भारत यात्रा के लिए भारत पहुंच गये हैं। भूटान के राजा का भारत दौरा इस वक्त हो रहा है, जब खबर है, कि अपने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए भूटान-चीन के बीच बातचीत चल रही है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच "अनुकरणीय" साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी क्षमता पर जोर देते हुए इस यात्रा की घोषणा की है।
आपको बता दें, कि चीन ने भूटान के सामने एक समझौता पैकेज रखा है, जिसके तहत चीन ने भूटान को ऑफर दिया है, कि वो डोकलाम चीन के हवाले कर दे और बदले में बाकी विवादित जमीन पर चीन अपना दावा छोड़ देगा। लिहाजा, भारत के लिए ये डील काफी चिंताजनक है, क्योंकि अगर डोकलाम चीन के हाथ में आता है, तो पूर्वोत्तर भारत पर डायरेक्ट खतरा आ जाएगा।

भूटान के राजा का भारत दौरा
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी एक बयान के मुताबिक, भूटान के किंग की ये यात्रा 10 नवंबर को खत्म होगी और इस दौरान वो भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि वांगचुक अपनी यात्रा के दौरान असम और महाराष्ट्र का भी दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, कि यह यात्रा दोनों पक्षों को "द्विपक्षीय सहयोग के संपूर्ण आयाम की समीक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने" का अवसर प्रदान करेगी।
गौरतलब है कि भूटान किंग की यह यात्रा, चीन और भूटान द्वारा बीजिंग में 25वें दौर की सीमा वार्ता आयोजित करने और "भूटान-चीन सीमा के परिसीमन और सीमांकन पर संयुक्त तकनीकी टीम की जिम्मेदारियों और कार्यों" पर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ हफ्तों बाद हो रही है।
भूटान के राजा ने इस साल की शुरुआत में भी भारत का दौरा भी किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा, कि भारत और भूटान के बीच दोस्ती और सहयोग के अनूठे संबंध हैं, जो समझ और आपसी विश्वास पर आधारित हैं।
वांगचुक शुक्रवार को असम पहुंच गये हैं, जो पड़ोसी देश के किसी भी राजा की पूर्वोत्तर राज्य की पहली यात्रा होगी। वह अपनी भारत यात्रा के अगले चरण के लिए रविवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। हालांकि, इस बार महारानी, भूटान के राजा के साथ नहीं आ रही हैं।

कैसे हैं भारत-भूटान के संबंध
भारत और भूटान के बीच काफी करीबी संबंध हैं और दोनों देशों के बीच के लोगों के बीच भी पारिवारिक रिश्ते हैं। भारत और भूटान के लोगों के बीच शादी ब्याह भी होते हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान इस रिश्ते को और मजबूत करने की कोशिश की गई, क्योंकि चीन के साथ भारत का तकरार बढ़ा है।
भारत और भूटान के बीच अनूठे संबंध को अगस्त 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान की यात्रा की थी। इसके अलावा, जनवरी 2023 में भारतीय विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने भी भूटान का दौरा किया था।
वहीं, फरवरी 2023 में, भूटान की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष वांगचुक नामग्याल के नेतृत्व में भूटान के एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, भारत की राष्ट्रपति ने कहा था, कि भारत दोनों देशों के बीच बहुमुखी और अद्वितीय मित्रता को बहुत महत्व देता है।
राष्ट्रपति ने कहा था, कि इस साल भूटान सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) के समूह के देशों से आगे निकल जाएगा और 2034 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने की राह पर चल पड़ेगा।
भारत-भूटान में है विशेष संधि
आपको बता दें, कि भारत-भूटान संबंधों का मूल ढांचा दोनों देशों के बीच 1949 में हस्ताक्षरित मित्रता और सहयोग की संधि है, जिसे फरवरी 2007 में नवीनीकृत किया गया था।
द्विपक्षीय संबंधों को दोनों देशों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान से आगे बढ़ाया गया है। वहीं, भूटान की विदेश नीति भी भारत ही तय करता है, जबकि 50 देशों के साथ ही भूटान के साथ राजनयिक संबंध हैं, और सिर्फ भारत, बांग्लादेश और कुवैत में ही भूटान में दूतावास हैं।
भूटान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से किसी के साथ भी औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं, जिसको लेकर चीन बौखलाया रहता है और चीन की कोशिश लगातार, किसी भी तरह से भूटान में अपना पैर पसारने की है, ताकि वो पूर्वोत्तर भारत के लिए खतरा पैदा कर सके।
इसीलिए, अब जब ऐसी खबरें हैं, कि चीन और भूटान राजनयिक संबंध स्थापित कर सकता है, तो ये भारत के लिए चिंता की बात है और भारत, लगातार चीन और भूटान के बीच बढ़ते संबंध पर नजर रख रहा है।












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