Bangladesh: जेल में Iskcon संत चिन्मय दास की हालत गंभीर, बांग्लादेशी-अमेरिकी ने डोनाल्ड ट्रंप से की अपील
Iskcon Chinmoy Das Bangladesh: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लगातार जारी हिंसा के बीच जेल में बंद इस्कॉन के संत चिन्मय दास की हालत गंभीर हो गई है और उनकी स्थिति पर चिंता जताते हुए बांग्लादेशी-अमेरिकी हिंदुओं ने भावी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हस्तक्षे करने की अपील की है।
बांग्लादेशी अमेरिकी समूहों ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आग्रह किया है, कि वे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार के तहत अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए बांग्लादेश में हस्तक्षेप करें।

बांगलादेश में इस साल अगस्त में एक छात्र आंदोलन ने निर्वाचित शेख हसीना सरकार को गिरा दिया था और उसके बाद से ही हिंदुओं के खिलाफ देशभर में हिंसा शुरू हो गई। शेख हसीना के जाने के बाद मोहम्मद यूनुस की सरकार ने जेलों में बंद इस्लामिक चरमपंथियों को रिहा कर दिया है, जो देश में जमकर उत्पात मचा रहे हैं।
बांग्लादेशी-अमेरिकी हिंदुओं की ट्रंप की अपील
बांग्लादेशी-अमेरिकी हिंदुओं ने यूनुस सरकार के आदेश के बाद गिरफ्तार किए गए इस्कॉन भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई सुनिश्चित करने में भी उनके हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा, कि हिंदू पुजारी "गंभीर रूप से बीमार" हैं। बांग्लादेशी अमेरिकी कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश की स्थिति को इस्लामी ताकतों से अल्पसंख्यकों के लिए "अस्तित्व का खतरा" बताया है।
ट्रंप को संबोधित करते हुए ज्ञापन में, बांग्लादेशी अमेरिकी हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों के गठबंधन ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में बांग्लादेश की भागीदारी को आंतरिक जातीय और धार्मिक उत्पीड़न की समाप्ति से जोड़ने का भी सुझाव दिया है।
माना जा रहा है, कि बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान जो बयान जारी किया था, उसी को देखते हुए अब ज्ञापन सौंपा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान, डोनाल्ड ट्रंप ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा करते हुए यूनुस सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने देश को "पूरी तरह से अराजकता की स्थिति में" बताया था।
पिछले महीने अपने दिवाली संदेश में ट्रंप ने कहा था, कि "मैं हिंदुओं, ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बर्बर हिंसा की कड़ी निंदा करता हूं, जिन पर बांग्लादेश में भीड़ द्वारा हमला किया जा रहा है और लूटपाट की जा रही है, जो पूरी तरह से अराजकता की स्थिति में है।"
चिन्मय कृष्ण दास को तुरंत रिहा करने की मांग
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCOP) ने डोनाल्ड ट्रंप से इस्कॉन भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है, जिन्हें बांग्लादेश की इस्लामिक कट्टरपंथी सरकार ने देशद्रोह के आरोप में गलत तरीके से कैद कर रखा है।
दास को 25 नवंबर को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था। और चटगांव की एक अदालत ने उन्हें देश के झंडे का कथित रूप से अपमान करने के लिए देशद्रोह के आरोप में उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए जेल भेज दिया था। मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी को है। अक्टूबर में दास के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जब उन्होंने चटगांव शहर में एक बड़ी रैली का नेतृत्व किया था, जहां उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया गया था।
चिन्मय कृष्ण दास गंभीर रूप से बीमार
वहीं, एक और अन्य बांग्लादेशी बंगाली हिंदू अधिकार समूह, बांग्लादेश शोमिलिटो सनातन जागरण जोते (BSSJJ) ने दावा किया है, कि चिन्मय दास जेल में "गंभीर रूप से बीमार" हैं। इसने कहा है, कि दास को बांग्लादेश में यूनुस सरकार के तहत "उचित इलाज नहीं मिल रहा है"। दास BSSJJ के प्रवक्ता भी हैं। समूह ने नए साल के दिन दास के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए सार्वजनिक प्रार्थना करने का भी आह्वान किया है।
बीएसएसजेजे ने एक बयान में कहा है, कि "चिन्मय कृष्ण प्रभु जेल में गंभीर रूप से बीमार हैं और सरकार की ओर से उन्हें उचित इलाज नहीं मिल रहा है। उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके ठीक होने के लिए 1 जनवरी को बांग्लादेश के हर मंदिर में प्रार्थना करने का आह्वान किया गया है।"
कट्टरपंथ के रास्ते पर फिसल रहा बांग्लादेश
BHBCOP ने रविवार को बयान जारी करते हुए कहा है, कि बांग्लादेश में कट्टरपंथ की ओर बढ़ने का जोखिम है, जिसका न सिर्फ दक्षिण एशिया में, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
इसने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कानूनों में व्यापक बदलाव की भी मांग की है और एक नए अल्पसंख्यक संरक्षण अधिनियम का प्रस्ताव रखा है। इसकी प्रमुख सिफारिशों में सुरक्षित परिक्षेत्रों की स्थापना, अल्पसंख्यकों के लिए एक अलग निर्वाचन क्षेत्र और धार्मिक प्रथाओं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए घृणा अपराधों और अभद्र भाषा के खिलाफ कानून बनाने की मांग शामिल हैं।












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