पाकिस्तान-चीन की गोद में बैठने को तैयार बांग्लादेश! मोहम्मद यूनुस की हरकतों से क्यों भारत को रहना चाहिए सतर्क?
Bangladesh-Pakistan Relation: शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश अब उन घावों को भुलने की तैयार कर रहा है, जो उसे पाकिस्तान की सेना की तरफ से दिए गये थे। 1971 की लड़ाई के दौरान पाकिस्तान की सेना ने लाखों बांग्लादेशी महिलाओं के साथ रेप किया था और मौत के घाट उतार दिया था।
लेकिन, अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस, धीरे धीरे बांग्लादेश को पाकिस्तान और चीन की गोदी में बिठाने की पूरी तैयारी करते जा ररहे हैं। हालांकि, 5 अगस्त को शेख हसीना के देश से भागने के बाद से भारत, बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और साथ ही बीएनपी के साथ अपने संबंधों में सतर्क रहा है, लेकिन वह इस क्षेत्र में तेजी से हो रहे रणनीतिक पुनर्गठन से अनजान नहीं है।

भारत के लिए सुरक्षा और रणनीतिक चिंताएं कई गुना हैं। पाकिस्तान और चीन, बांग्लादेश के साथ संबंधों को फिर से जीवंत करने की कोशिश कर रहे हैं, इसका मतलब सिर्फ व्यापार और संस्कृति या खेल में आदान-प्रदान बढ़ाना नहीं है, बल्कि, बढ़ते राजनीतिक जुड़ाव पिछले चार महीनों में कई नीतिगत और रणनीतिक कदमों का नतीजा हैं।
भारत को क्यों रहना चाहिए सतर्क?
मिस्र में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मोहम्मद यूनुस के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद पता चला है, कि बांग्लादेश को लेकर इस्लामाबाद में बंद दरवाजों के पीछे तेज रणनीतिक और नीतिगत योजना बनाई गई है।
ये कोशिशें 5 अगस्त को ही शुरू हो गए थे, जब पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने अलग-अलग मौकों पर बीएनपी नेताओं और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार से मुलाकात करनी शुरू की। रणनीतिक महत्व के मुद्दों पर बातचीत करने के लिए एक साथ कदम उठाए गए, जिसमें बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल, गृह मामलों के सलाहकार, सामाजिक कल्याण और महिला एवं बाल मामलों के सलाहकार, सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार और वाणिज्य के सलाहकार के साथ बैठकें की गईं।
पिछले चार महीनों में फेडरेशन ऑफ बांग्लादेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FBCCI) के लिए व्यापारिक समुदायों को एक साथ लाने और व्यापार संबंधों को बेहतर बनाने पर विचारों का आदान-प्रदान करने के अवसर भी सामने आए।
और सितंबर तक, विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन के लिए यह घोषणा करने का मंच तैयार हो गया था, कि बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंध रखना चाहता है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक "पिछले चार महीनों में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कम से कम 17 आमने-सामने की बैठकें हुईं, जबकि 2019 से ऐसी सिर्फ दो बैठकें हुई थीं।"
एक्सपर्ट्स ने शहबाज शरीफ-यूनुस बैठक को सफल बनाने के पीछे किए गए काम के बारे में बताया, खासकर तब जब यूनुस ने 1971 में अलगाव से उत्पन्न मुद्दों को हल करने की उत्सुकता जताई थी।
पाकिस्तान और बांग्लादेश कैसे सुधार रहे संबंध?
पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं और इसी के तहत दोनों देशों के बीच साल 1971 के बाद से पहला सीधा शिपिंग कनेक्शन तब स्थापित हुआ, जब पिछले महीने कराची बंदरगाह से चटगांव बंदरगाह तक एक मालवाहक जहाज पहुंचा था।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में एक बड़ा कदम होने के अलावा, यह लोगों से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ निकटता की तलाश का भी संकेत है। पाकिस्तान अब बांग्लादेशी नागरिकों को आने से पहले वीजा देने लगा है, जो अब अपने वीजा पोर्टल पर क्रेडेंशियल अपलोड करके 48 घंटों में निःशुल्क पाकिस्तानी वीजा प्राप्त कर सकते हैं, जबकि ढाका ने पाकिस्तान से आयात के लिए सीमा शुल्क निरीक्षण के साथ-साथ बांग्लादेश में प्रवेश करने के लिए वीज़ा चाहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सुरक्षा मंजूरी आवश्यकताओं को भी माफ कर दिया है।
सूत्रों ने कहा है, कि यूएस-बांग्ला एयरलाइंस टीमों के साथ सीधी पाकिस्तान-बांग्लादेश उड़ानों की संभावनाओं पर चर्चा करने जा रहे हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है, कि इस तरह के कदम से पाकिस्तान में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ सकते हैं, क्योंकि बांग्लादेशी छात्र पाकिस्तान का रूख कर सकते हैं। बांग्लादेशी प्रीमियर लीग के उद्घाटन समारोह में गायक राहत फतेह अली खान का प्रदर्शन बताता है, कि बांग्लादेश अब पाकिस्तान के लिए खुल चुका है।
चीन के साथ बांग्लादेश कैसे बना रहा रिश्ते?
दूसरी तरफ, भारत के दूसरे पड़ोसी चीन के पास बांग्लादेश में कोई राजनीतिक पसंदीदा नहीं है, और उसने सत्ता में बैठे लोगों को जल्दी से अपने साथ जोड़ लिया है। सितंबर की शुरुआत में, बांग्लादेश में चीनी राजदूत याओ वेन ने ढाका में पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) के प्रमुख शफीकुर रहमान से मुलाकात की थी। और यह 2010 के बाद पहली बार था, जब कोई विदेशी राजनयिक जेईआई कार्यालय गया था, जो भारत की चिंता बढ़ाता है।
द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, "पूरे राजनीतिक स्पेक्ट्रम में संचार की लाइनें बनाए रखने की बीजिंग की इच्छा, इस क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही राजनीतिक स्थिति के अनुकूल होने की उसकी क्षमता को दर्शाती है।"
इसका नतीजा बीजिंग के लिए सकारात्मक रहा क्योंकि ढाका में चीनी दूतावास ने 25 नवंबर को जमात-ए-इस्लामी, हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश, खिलाफत मजलिस, बांग्लादेश खिलाफत आंदोलन और निजाम-ए-इस्लाम पार्टी जैसे राजनीतिक दलों के नेताओं के लिए एक स्वागत समारोह की मेजबानी करने के लिए अपने दरवाजे खोले।
वहीं, बीएनपी प्रतिनिधिमंडल ने 7 से 16 नवंबर तक बीजिंग में राजनीतिक दल और सहयोग कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें दक्षिण पूर्व एशियाई और दक्षिण एशियाई देशों के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एक साथ आए थे। एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया, कि पहले चीन ऐसे आयोजनों में अवामी लीग के नेताओं की मेजबानी करता था।
वहीं, 5 नवंबर को जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने घोषणा की, कि चीन ने चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले सभी अल्प विकसित देशों (एलडीसी) को 1 दिसंबर से चीन को निर्यात की जाने वाली 100 प्रतिशत टैरिफ लाइनों के लिए शून्य-टैरिफ ट्रीटमेंट देने का फैसला किया है, तो दोनों पक्षों में बहुत खुशी हुई।
वहीं, शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद पहली बार चीनी नौसेना के बेड़े ने ढाका का दौरा किया है, जिसने निश्चित तौर पर भारतीय रणनीतिकारों को परेशान किया होगा। और एक्सपर्ट्स का मानना है, कि बांग्लादेश अब चीन और पाकिस्तान की गोद में बैठने के लिए बिल्कुल तैयार है और भारत को उसी के मुताबिक रणनीतिक तैयारी करनी चाहिए।












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