Bangladesh Election: चुनाव से ठीक पहले ढाका पहुंचे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी, क्या है यूनुस का प्लान?
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले ही देश में हिंसा और अस्थिरता को लेकर गंभीर चेतावनियां सामने आ रही हैं। कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
ढाका में लश्कर के आतंकवादियों की घुसपैठ
इसी बीच एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादी बांग्लादेश में घुस आए हैं। यह दावा ऐसे समय आया है, जब चुनाव नजदीक हैं और देश पहले से राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है।

कराची से ढाका आई फ्लाइट पर शक
पाकिस्तान से मिली जानकारी के मुताबिक, बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट BG-342 में कम से कम चार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी सवार थे। यह फ्लाइट कराची से ढाका पहुंची थी। खास बात यह है कि यह घटना दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाओं की बहाली के कुछ ही दिनों बाद हुई। ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब ढाका के रास्ते बंगाल बॉर्डर से आतंकवादी भारत में घुसेंगे या बांग्लादेश के चुनाव को ही मैन्युपुलेट करेंगे?
हवाई सेवाओं की बहाली पर बढ़ा विवाद
बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सीधी उड़ानों की बहाली पहले से ही विवादों में घिरी हुई है। अब इस कथित आतंकी घुसपैठ के दावे ने आग में घी डालने का काम किया है। कई लोग इसे एक गंभीर सुरक्षा चूक मान रहे हैं।
इन्वेस्टिगे
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह गंभीर आरोप खोजी पत्रकार शाहिदुल हसन खोकन ने लगाए हैं। खोकन ने इसे यूनुस सरकार की खतरनाक लापरवाही बताया है। उन्होंने सरकार पर इस्लामी झुकाव और पाकिस्तान समर्थक रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।
खोकन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शनिवार को जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि फ्लाइट BG-342, 30 जनवरी को सुबह 4:20 बजे कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़कर ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरी थी। इस फ्लाइट में कुल 113 यात्री सवार थे।
पासपोर्ट से खुली पोल
खोकन के मुताबिक, इन कथित आतंकवादियों के नाम और उनके संबंध यात्रा दस्तावेजों में दर्ज थे। उन्होंने दावा किया कि यह या तो सरकार की भारी लापरवाही है या फिर जानबूझकर की गई अनदेखी, जो एक बड़ी सुरक्षा चूक की ओर इशारा करती है। अपनी पोस्ट में खोकन ने साफ लिखा, "लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी पाकिस्तान से बांग्लादेश पहुंच गए।" उन्होंने कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं, जिनमें कथित संदिग्धों के पासपोर्ट डिटेल्स दिखाई दे रहे थे।
द डेली रिपब्लिक की रिपोर्ट क्या कहती है
बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट 'द डेली रिपब्लिक' के अनुसार, यह दावा यूनुस सरकार द्वारा ढाका और कराची के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने के फैसले के ठीक बाद सामने आया। यह एयर रूट लगभग 14 साल बाद दोबारा खोला गया था।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि यह फैसला पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ अघोषित समझौतों के बाद लिया गया। हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
वीजा और जांच में ढील के आरोप
आलोचकों का आरोप है कि हवाई मार्ग की बहाली के साथ कई विवादित रियायतें दी गईं। इनमें पाकिस्तानी सरकारी अधिकारियों, सैन्य कर्मियों और खुफिया एजेंटों के लिए विशेष वीजा छूट, बांग्लादेशी बंदरगाहों पर पाकिस्तानी जहाजों के लिए ढीले निरीक्षण नियम और लेन-देन की जांच में कमी शामिल है।
नागरिक विमानों के गलत इस्तेमाल की चिंता
इन आरोपों के बाद यह डर और गहरा गया है कि अब नागरिक विमानों का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों की आड़ के तौर पर किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।
लश्कर-ए-तैयबा का खतरनाक इतिहास
लश्कर-ए-तैयबा संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित एक आतंकी संगठन है। यह 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों समेत कई बड़े आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है। माना जाता है कि यह संगठन पाकिस्तान की ISI के समर्थन से काम करता है।
हाफिज सईद के करीबी नेता की एंट्री
द डेली रिपब्लिक' की रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद के करीबी इब्तिसाम इलाही जहीर ने अक्टूबर 2025 में कई हफ्तों तक बांग्लादेश का दौरा किया था। वह पाकिस्तान की मरकज़ी जमीयत अहले-हदीस के महासचिव हैं।
इस दौरान जहीर ने ढाका और भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे कई संवेदनशील जिलों का दौरा किया। इनमें चपाईनवाबगंज, नाचोल, रंगपुर, लालमोनिरहाट, नीलफामारी, जॉयपुरहाट और राजशाही शामिल हैं।
भड़काऊ भाषणों का आरोप
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहीर ने इन इलाकों में इस्लाम के लिए बलिदान, धर्मनिरपेक्ष ताकतों के खिलाफ एकजुटता और कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की बात करते हुए भाषण दिए।
स्थानीय कट्टरपंथी समूहों से मुलाकात
उन्होंने अहले-हदीस बांग्लादेश से जुड़े स्थानीय कट्टरपंथी समूहों और असदुल्ला अल-ग़ालिब जैसे लोगों से भी मुलाकात की। यूनुस के सत्ता में आने के बाद यह जहीर का दूसरा दौरा था। इससे पहले वह फरवरी 2025 में भी बांग्लादेश आया था।
भारत की सुरक्षा पर भी खतरा
सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसी धार्मिक प्रचार गतिविधियां लश्कर-ए-तैयबा के सीमा-पार नेटवर्क को फिर से मजबूत करने, संवेदनशील इलाकों में भर्ती करने और भारत की पूर्वी सीमा व पूर्वोत्तर राज्यों को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा हो सकती हैं।
बांग्लादेश बनता जा रहा है ट्रांजिट कॉरिडोर?
'द डेली रिपब्लिक' के अनुसार, आलोचकों का कहना है कि यूनुस सरकार की पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से बढ़ती नजदीकी, कमजोर घरेलू सुरक्षा, कार्गो निरीक्षण में ढील और वीजा जांच में लापरवाही ने बांग्लादेश को जिहादी संगठनों के लिए आसान रास्ता बना दिया है।
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