Balen Shah का बड़ा फैसला, सभी नेता अधिकारियों की संपत्ति की होगी जांच, लिस्ट में 5 पूर्व PM के भी नाम
Balen Shah Nepal Corruption Investigation: प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है। 'संपत्ति जांच आयोग' को हरी झंडी मिलते ही देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
रिटायर्ड जस्टिस राजेन्द्र कुमार भण्डारी की अध्यक्षता में गठित यह पांच सदस्यीय आयोग 1988 से लेकर वर्तमान तक सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति का कच्चा चिट्ठा खोलेगा। इस कदम का उद्देश्य सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय करना और अवैध रूप से अर्जित धन को उजागर करना है।

जांच के दायरे में दिग्गज राजनेता
इस आयोग का क्षेत्राधिकार अत्यंत व्यापक है। इसमें वर्तमान प्रधानमंत्री से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्पकमल दहाल 'प्रचंड' जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं। जांच केवल नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों की देश-विदेश में मौजूद संपत्तियों को भी खंगाला जाएगा। इसके अलावा, प्रदेशों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, विधायक और स्थानीय निकायों के प्रमुख भी इस रडार पर हैं, जिससे कोई भी रसूखदार व्यक्ति बच न सके।
प्रशासनिक अधिकारियों पर भी नकेल
नागरिक सेवा और सुरक्षा बलों के उच्चाधिकारी भी इस जांच की जद में हैं। मुख्य सचिव से लेकर सह-सचिव स्तर तक के अधिकारी, पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो और सशस्त्र पुलिस बल के कद्दावर अफसरों की संपत्ति की वैधता जांची जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि सेना के बहाल अधिकारियों और वर्तमान न्यायाधीशों को छूट दी गई है, लेकिन अवकाश प्राप्त सैन्य अधिकारी और रिटायर्ड जज अपनी संपत्ति के स्रोत बताने के लिए बाध्य होंगे। कूटनीतिक मिशनों में तैनात कर्मचारी भी जांच के अधीन रहेंगे।
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जांच की समय-सीमा और प्राथमिकता
आयोग ने अपनी जांच को दो चरणों में विभाजित किया है। पहले चरण में वर्ष 2006 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के दौरान सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की जांच होगी। इसके बाद, दूसरे चरण में 1988 से 2008 तक के दौर को कवर किया जाएगा। आयोग विशेष रूप से उन विभागों पर ध्यान केंद्रित करेगा जो सीधे जनता से जुड़े हैं, जैसे कर, भूमि सुधार और यातायात, जहां भ्रष्टाचार की शिकायतें सबसे अधिक रहती हैं।
निष्पक्षता और शिकायत की प्रक्रिया
प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग लिखित, डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से भी शिकायतें स्वीकार करेगा। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यदि किसी व्यक्ति की संपत्ति उसके वैध आय स्रोतों से अधिक पाई जाती है, तो आयोग सीधे कार्रवाई की सिफारिश करेगा, जिस पर सरकार को 45 दिनों के भीतर कदम उठाना होगा। विदेश में छिपी संपत्ति का पता लगाने के लिए इंटरपोल और कूटनीतिक चैनलों की सहायता भी ली जाएगी।
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आयोग के सदस्यों पर भी कड़ी नजर
भ्रष्टाचार विरोधी इस मुहीम में 'स्वच्छता' का पैमाना खुद आयोग के सदस्यों पर भी लागू होता है। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को अपनी नियुक्ति के सात दिनों के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य है। यदि आयोग का कोई सदस्य अक्षमता या अनुचित आचरण में लिप्त पाया जाता है, तो सरकार उसे तत्काल पद से हटा सकती है। 38 विशेषज्ञों की टीम के साथ यह आयोग एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट चरणबद्ध तरीके से प्रस्तुत करेगा।












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