Balen Shah Foreign Policy: बालेन सरकार का चीन को बड़ा झटका, ड्रैगन के साथ हुए कई समझौतों की जांच के आदेश

Balen Shah Foreign Policy: नेपाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही चीन के साथ हुए पिछले आर्थिक समझौतों पर सवाल उठने लगे हैं। दिल्ली के थिंक टैंक 'ICRR' के अनुसार, चीन ने आर्थिक मदद के बहाने नेपाल की राजनीति और आंतरिक निर्णयों में हस्तक्षेप बढ़ाया है।

पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के कार्यकाल में हुए कई बड़े समझौतों को अब शक की निगाह से देखा जा रहा है। नई सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक पुरानी अटकी हुई परियोजनाओं की जांच पूरी नहीं होती, चीन के साथ कोई नया समझौता नहीं किया जाएगा।

Balen Shah Foreign Policy

ओली सरकार के फैसलों पर सवाल

के.पी. शर्मा ओली के कार्यकाल (2016-2018) के दौरान नेपाल ने चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) में शामिल होकर कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। उस समय इन्हें नेपाल की आर्थिक आजादी के लिए क्रांतिकारी बताया गया था। हालांकि, अब यह आरोप लग रहे हैं कि इन प्रोजेक्ट्स के पीछे कोई ठोस वित्तीय योजना नहीं थी। नई सरकार यह जांच कर रही है कि आखिर क्यों ये समझौते केवल कागजों तक सीमित रह गए और इनका लाभ नेपाल की जनता को क्यों नहीं मिला।

Nepal Political News: अटकी हुई प्रमुख परियोजनाएं

नेपाल में चीन की कई बड़ी योजनाएं सालों से ठप पड़ी हैं। इनमें बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना सबसे प्रमुख है, जिसका ठेका कई बार रद्द और बहाल हुआ, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा। इसी तरह, काठमांडू को चीन से जोड़ने वाली केरंग-काठमांडू रेलवे भी तकनीकी और वित्तीय कारणों से 2026 तक अटकी हुई है। ट्रांस-हिमालयी कनेक्टिविटी नेटवर्क और सीमा पार बिजली लाइनों जैसे प्रोजेक्ट्स भी सिर्फ चर्चा का विषय बनकर रह गए हैं, जिससे नेपाल के विकास को धक्का लगा है।

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Nepal China Infrastructure Deals: डिजिटल और सुरक्षा संबंधी चिंताएं

आर्थिक प्रोजेक्ट्स के अलावा, चीन की टेक कंपनियों जैसे हुवावे (Huawei) और ZTE द्वारा नेपाल में किए जा रहे डिजिटल विस्तार ने भी नई सरकार की चिंता बढ़ा दी है। 2017 से शुरू हुए इन प्रयासों की गति बहुत धीमी है और इनके रणनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बुनियादी ढांचे में चीनी हस्तक्षेप से नेपाल की डेटा सुरक्षा और संप्रभुता पर खतरा हो सकता है, यही कारण है कि इन प्रोजेक्ट्स की भी गहन समीक्षा की जा रही है।

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नई सरकार का कड़ा रुख

नेपाल की वर्तमान सरकार अब चीन के साथ अपने संबंधों में सावधानी बरत रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि परियोजनाओं में देरी और पारदर्शिता की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रसुवागढ़ी सीमा पर बुनियादी ढांचे के निर्माण और उत्तरी राजमार्गों की अधूरी स्थिति ने बीजिंग की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। जब तक इन पुरानी परियोजनाओं में प्रगति नहीं होती और इनकी वित्तीय पारदर्शिता स्पष्ट नहीं होती, तब तक नेपाल चीन के साथ किसी भी नई डील पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।

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